بسم الله الرحمن الرحيم 

 سُبْحَانَ الَّذِي أَسْرَىٰ بِعَبْدِهِ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَى الَّذِي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ آيَاتِنَا

तन्जीह उस खुदा की जो अपने बन्दे को मस्जिदे हराम से मस्जिदे अक्सा की तरफ रात में ले गया, जिस जगह को हमने मुबारक बनाया, ताके उसे हमारी आयात बताएं

(सूरह अल इसराअ : १)

मबअस के दिन रोज़ा “मोअती उस सुआलात”: मबअस के मुबारक दिन में हम इस्लाम की शरुआत और हमारे नबी मुस्तफा स.अ. के एहसानात का शुकुर करते हुए और ख़ुशी मनाते हुए रोज़ा रखते है। एहले बैत से ज़िक्र है मुमिन मबअस के दिन में रोज़ा रखे, “अल्लाहुम्मा या मोअती उस सुआलात” की दोआ पढ़ कर इफ्तार करे तो ६० साल की कफारत है और दुनिया के देन आसान होते है।

मबअस के दिन में यह भी आदत है कि हम अपने छोटे फ़रज़न्दो को भी रोज़ा करना सिखाते है, उसकी उम्र के मुताबिक़ जितना इम्कान हो, ताके उन्हें भी इस दिन की एहेम्मियेत का एहसास हो और रोज़ा करने की आदत हो।

मेअराज की रात और मबअस के दिन मुमिनीन इस तरह अमल करे:

  • मेअराज की रात वशेक की नमाज़ पढ़े। यहाँ क्लिक करे वाशेक की नियत और दोआ के लिये
  • मुमिनीन नमाज़ और दोआ पढ़ने के बाद सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. का वसीला मुबारक सुने
  • मबअस के दिन २७ वी रजब, मुमिनीन सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. का कसीदा मुबारका "طه النبي المصطفى خير الورىٰ" की तिलावत करे (ऑडियो रेकोर्डिंग और अंग्रेजी में तर्जुमा भी पेश है)

मुमिनीन सिजिल्ल में छपे लेख “इस्लाम के दआईम– नमाज़ (रसूलुल्लाह स.अ. का मेअराज)” पढ़ सकते। इस लेख को शेह्ज़ादा डॉ. अज़ीज़ भाईसाहेब ने गए साल लिखा है और इसमें दआएमुल इस्लाम में से ज़िक्र है कि नमाज़ में पहले ५० फ़र्ज़ वाजिब थे मगर अल्लाह तआला ने एहसान फरमा कर ५ तक कम कर दिया। यूँ हुआ कि मेअराज की रात जब रसूलुल्लाह स.अ. लौट रहे थे तो मूसा नबी ने रसूलुल्लाह स.अ. से पूछा कि क्या वाजिब किया गया है...

मुमिनीन सिजिल्ल का लेख “मबअस और मेअराज – आज के लिये हिदायत” भी पढ़ सकते है, जिसे शेह्ज़ादा डॉ. अज़ीज़ भाईसाहेब ने दो साल कब्ल लिखा है। इसमें मेअराज की रात की ज़िक्र है। जब जिब्रईल ने रसूलुल्लाह स.अ. से कहा कि मला ए आला में फरिश्तो में विवाद है कि इन तीन चीज़ों में से अफज़ल में अफज़ल क्या है : सख्त ठंडी की मौसम में वुज़ू करना, इमामत की नमाज़ के लिये चल कर जाना या एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ का इंतज़ार करना...