بسم الله الرحمن الرحيم

إِنَّ الْمُسْلِمِينَ وَالْمُسْلِمَاتِ وَالْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَالْقَانِتِينَ وَالْقَانِتَاتِ وَالصَّادِقِينَ وَالصَّادِقَاتِ وَالصَّابِرِينَ وَالصَّابِرَاتِ وَالْخَاشِعِينَ وَالْخَاشِعَاتِ وَالْمُتَصَدِّقِينَ وَالْمُتَصَدِّقَاتِ وَالصَّائِمِينَ وَالصَّائِمَاتِ وَالْحَافِظِينَ فُرُوجَهُمْ وَالْحَافِظَاتِ وَالذَّاكِرِينَ اللَّهَ كَثِيرًا وَالذَّاكِرَاتِ أَعَدَّ اللَّهُ لَهُم مَّغْفِرَةً وَأَجْرًا عَظِيمًا

२२ वी शाबानुल करीम मौलातोना हुर्रतुल मलेका रि.अ. के उर्स का मुबारक दिन है. आपकी शान अज़ीम है और आपका मकाम आला है. सियासती मामलों में भी आप माहिर थी, जिसके सबब आप “बिलकीसुस सुगरा” से मारूफ थी. (छोटी बिलकीस, जो सबा की मलिका थी). मौलातोना हुर्रतुल मलेका, आप यमन के सुलैही खानदान में से थी और आपने ममलकत पर दस साल तक हुकूमत की. आपका इल्म मशहूर था और आप अजब शान से हुकूमत करती थी. ममलकत के हर पहलु पर आप नज़र फरमाती थी. आपने लश्कर की क़ियादत कुछ आयान को सौंपी थी, आप निगरानी रखती थी.

मुस्तन्सिर इमाम स.अ. ने मौलातोना हुर्रतुल मलेका को हुज्जत के आला मर्तबे में कायम फ़रमाया और यमन में दावत आपको सौंपी. आप आलेमा थी और दावत के कई हुदूद को आप सबक पढ़ाती थी. आमिर इमाम के फरमान से मौलातोना हुर्रतुल मलेका ने दोआत मुत्लक़ीन का सिलसिला कायम फरमाया. आप दोआत मुत्लक़ीन की “माँ साहेबा” से मारूफ है.

 

मौलातोना हुर्रतुल मलेका का मिसाल सितारे की तरह चमकता है. आपने दीन और दुनिया, दोनों में आला दर्जा हासिल किया और मुमिनात के लिए एक मिसाल कायम कर दिया.

सैयदना ताहेर सैफुद्दीन री.अ. फरमाते थे कि मैं मेरे मवाली किराम के इरशादात के मुताबिक़ मेरी ज़िन्दगी बसर करता हूँ. २० वी सदी के शुरू में मौलाना ताहेर सैफुद्दीन ने मुमिनात को रगबत दिलाई के वे इल्म तलब करें. आप हमेशा घर में मुमिनात की जो ज़िम्मेदारियाँ है उसकी अहम्मियत की ज़िकर फरमाते और उसके साथ घर के बाहर भी मुमिनात को काम करने के लिए प्रोत्साहित करते. साथ में आप लिहाज़ का ख़याल रखने को भी फरमाते. आपने बेटियों के लिए कई स्कूल बनाई और माँ बाप को बेटियों को तालीम देने की हिदायत दी. आपने ने अपने फ़रज़न्दों को भी रगबत दिलाई कि दीन के इल्म के साथ दुनिया का इल्म भी तलब करें. सैयदना क़ुत्बुद्दीन के अकीलत - उम्मुल मुमिनीन सकीना आईसाहेबा - सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के भाईसाहब रासुल हुदूद सैयदी इब्राहीम भाईसाहब ज़ैनुद्दीन की शहज़ादी, आप सैफी महल में पहली थी जो सैयदना ताहेर  सैफुद्दीन की रज़ा से कथीद्रल हाई स्कूल में पढ़ती थी और उसके बाद कॉलेज से बी.एड. की डिग्री लेकर स्कूल की प्रिंसिपल थी. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने बेटियों को जामेआ सैफिया में भी दाखिल किया. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन की गोल्डन ज्युबिली के मौके पर आपने दावत के नौजवान बेटों के लिए एक संस्था “शबाबुल ईदिज़ ज़हबी” कायम फ़रमाई और बेटियों के लिए “बुनैयातुल ईदिज़ ज़हबी” संस्था कायम फ़रमाई.

सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन आपके वालिद की इक्तेदा करते हुए बेटियों को तालीम के लिए प्रोत्साहित करते थे. आप मुमिनात को रज़ा फरमाते कि स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई करें और डिग्री हासिल करें, और फिर काम भी करें, और आप साथ में ताकीद फरमाते कि माँ बाप का सबसे अहम काम यह है कि फ़रज़न्दों की ध्यान दे कर बराबर से तरबियत करें. जिस वक्त सैयदना बुरहानुद्दीन ने कॉलेज जाने वाले फ़रज़न्दों के लिए संस्था कायम फ़रमाई ‘तोलोबाउल कुल्लियातिल मुमिनून’ आपने साथ में कॉलेज जाने वाली बेटियों के लिए भी संस्था कायम फ़रमाई ‘तालेबातुल कुल्लियातिल मुमिनात’. आपने ‘बुरहानी विमेंस एसोसिएशन’ की संस्था भी कायम फ़रमाई.

सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. जिस अरसे में सैयदना बुरहानुद्दीन रि.अ. के माज़ून थे, और दाई के मर्तबे में आने के बाद भी, हमेशा आप मुमिनात को तालीम हासिल करने के लिए और दावत की खिदमत करने के लिए प्रोत्साहित करते थे. आपने अपने घर में यह अमल करके मिसाल कायम फ़रमाई. आपने आपकी शेह्ज़ादिओं की तरबियत की, उन्हें आले मोहम्मद का इल्म पढ़ाया और उसके साथ दुनिया की मशहूर यूनिवर्सिटिओं में डिग्रीयां हांसिल करने भी भेजा. आप फरमाते कि यह सब करने में नियत दावत की खिदमत करना है. सैयदना कुत्बुद्दीन ने आपकी गोल्डन ज्युबिली में जो स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया, उसमें बेटियों की तालीम के लिए आपने बहुत ताकीद फ़रमाई है.

५१, ५२ और ५३ वे दाई के वारिस सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श., आप साबिक दोआत की इक्तेदा करते है. पिछले वर्ष वाअज़ में, और मुंबई में मार्च २०१७ की प्रेस कॉन्फरन्स में सैयदना ने मौलातोना हुर्रतुल मलेका की ज़िकर फ़रमाई और फ़रमाया कि हमारी कौम में महिलाओ की तरक्की महदूद नहीं.

यह हिदायत दाऊदी बोहरा कौम की बेटियों और महिलाओं का हौंसला बढ़ाता है. मुमिनात क्या क्या हांसिल कर सकती है इस पर कोई रोक नहीं है. मौलातोना हुर्रतुल मलेका ने दावत में आला दर्जा हासिल किया और पूरी ममलकत को भी संभाला.