आका मौला सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. दावत के अर्श पर मुस्तवी होने के बाद पहली बार २४ जून, २०१८ के रोज़ इंदौर तशरीफ़ लाए। मुमिनीन और आयान सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. का इस्तिक्बाल करने एअरपोर्ट पर हाज़िर हुए और सैयदना एस्कोर्ट के साथ अपने मुक़ाम पर तशरीफ़ ले गए। मुमिनीन ने सैयदना के साथ नमाज़, मजलीस और कदमबोसी की बैठक में बरकात हांसिल की। सैयदना ने मुमिनीन के साथ लम्बा समय बिताया, बैठक में हर एक मुमिन की अर्ज़ सुनी, सभी को हिदायत, हिकमत और दोआओ के अनमोल कलाम फरमाएँ।

सैयदना त.उ.श. ने इंदौर के मसूल और जमाअत कमिटी के मेम्बरों को कौम के फायदे के लिये पुरख़ुलूस कोशिष किस राह पर की जाए इसके बारे में इरशादात फरमाएँ और जमाअत के कामो की खिदमत इखलास, ज़िम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ निभाने की हिदायत दी।

सैयदना त.उ.श. ने इंदौर के मुमिनीन को खिताब करते हुए फरमाया – हमारा यहाँ आना यह साबित करता है कि दावत आबाद है, हमारी दोआ तुम्हारे साथ है, अब इस शहर के लोगों पर है कि दावत को जवाब दे कर दुनिया और आखेरत में नजात हांसिल करें।

शाम के वक्त सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. इंटर फेथ (सभी धर्म) ईद मिलन समारोह में तशरीफ़ ले गए जहां पर आप को “माननिय मुख्य अतिथि” की हैसियत से आमंत्रण पेश किया गया था। समारोह की थीम “सिलसिला यारी का” रखी गयी थी, और मकसद था कि अलग अलग मज़हब के लोग बिरादरी और मिलन्साही से जमे हो। दो संस्था – ‘निनाद’ और ‘अदबी कुनबा’- के सदस्यों ने इस समारोह का आयोजन कर उसमें हिंदु, मुस्लिम, इसाई, सिक्ख धर्मो के पेशवाओं के साथ सरकारी अधिकारिओं, पुलिस, प्रेस और शहर के नामी गिरामी हसतीओं को आमंत्रित किया गया था।

सैयदना का खैर मकदम करते हुए मुन्तज़मीन ने तक़रीर में अर्ज़ की कि आप “मुसलमानों के एहेमतरीन आलिम और रहनुमा है, दूरंदेशी की नज़र और अमल करने वाले है और दाउदी बोहरा कौम के सरदार है”।

शेख युसूफ भाई मुछाला, जो बम्बई हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट है और मुस्लिम पर्सनल लो बोर्ड का प्रतिनिधित्त्व करते है, उन्होनें सैयदना का परिचय कराते हुए कहा कि आप ने बरसों लग सैयदना बुरहानुद्दीन रि.अ. और सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. के नज़दीक इल्म पढ़ा है और उनकी  खिदमत में हाज़िर रहे है, जिन के सबब आप इल्म में पुख्ता है। शेख युसूफ भाई ने यह भी कहा कि आज के ज़मान के लिए सैयदना एक “डायनेमिक लीडर” है। आप ने मुंबई और लंडन यूनिवर्सिटीओं से डिग्री हांसिल की है और आप ने हिन्दुस्तान और अमेरिका में कारोबार खुद स्थापित कर उसमे भी कामयाबी हांसिल की है।

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने अपनी तक़रीर में हिदायत देते हुए फरमाया कि हमें अपने नफ्स का खुद हिसाब करना चाहिए। हमें और हमारी कौम को क्या करना चाहिए यह सोचना ज़रूरी है। सैयदना ने फरमाया कि हे कौम के रहनुमा की ज़िम्मेदारी है कि अपने लोगो को दुसरे मज़हब के लोगो के साथ मिलन साही से व्यवहार करने की हिदायत दे और मुल्क की तरक्की के लिए काम करें।

सैयदना ने रसूलुल्लाह स.अ. ने फरमाएँ हुए कलाम पढ़े कि, “हर इंसान खुदा का फरजंद है, और जो शख्स खुदा के फ़रज़न्दो को ज़्यादा मदद करे, फायदा पहुंचाएं, उसे खुदा ज़्यादा मोहब्बत करता हे”। सैयदना ने फरमाया कि, “हम दूसरों से खुद के लिए जैसा सुलूक चाहते हो, वैसा सुलूक पहले हमें सब के साथ करना चाहिए”। सैयदना ने गांधीजी की एक ज़िक्र फरमाई की उनको एक माँ ने अपने बच्चे को शक्कर ज़्यादा नहीं खाने समझाने को कहा, गांधीजी ने उस माँ को कुछ दिन बाद फिर आने कहा। जब वह वापस आई तो गांधीजी ने उस माँ से कहा “मैं बच्चे को ज़्यादा शक्कर नहीं खाने कैसे कहूँ जब कि मैं खुद यह नहीं कर सका!”।

सैयदना की तक़रीर और इस सफर की तस्वीरें फातेमी दावत की वेबसाईट पर पेश की गई है।

सैयदना जब स्टेज से निचे तशरीफ़ लाए तब हाज़रीन आप के आसपास जमा हो गए, आप को दोआ की अर्ज़ करने, आप का हाथ चूमने, और आप के साथ फोटोग्राफ लेने। तकरीबन आधे घंटे तक इस तरह मौलानल मिनआम ने हाज़रीन के साथ गुफ्तगू फरमाई।

ईद के समारोह से पहले, सैयदना इंदौर के अखबारों के पत्रकारों की अर्ज़ पर प्रेस कोंफरंस में तशरीफ़ लाए और कई मुद्दों पर हुए सवालों के जवाब फरमाएँ। एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि अगर  कोई नेता – चाहे वह धार्मिक हो या राजकीय – अपने पद का नाजायज़ लाभ लेता है तो इस के बारे में आप का क्या कहना है, सैयदना ने फरमाया कि क़ानून के हाथ सभी के ऊपर है, और ख़ास कर मज़हब के जो रहनुमा है उनकी ज़िम्मेदारी तो दुगनी है, कि जिन बातों की हिदायत वह दूसरों को दे उन पर पहले खुद अमल करें।

एक और सवाल पूछा गया कि दाउदी बोहरा कौम के लिए आप क्या चाहते है, सैयदना ने जवाब फरमाया कि आप अपने पेश्तर दोआत ख़ास कर सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ., सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि.अ. और सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. की बताई हुइ राह पर दीन काईम करते रहेंगे, दीन के उसूलों की हिफाज़त करते हुए, उन उसूलों के मुताबिक़, हाल के ज़मान की ज़रूरतों को ध्यान में रख कर, आप कौम को हिदायत देते है।

अलग अलग मज़हब के लोगों के दरमियान मिलनसाही पर एक सवाल पूछा गया, सैयदना ने जवाब फरमाया कि हम सब एक ही धरती की मिटटी से उगा हुआ अनाज खाते है, तो फिर आपस में झगड़ा किस लिए, हम सभी की खुशहाली आपस में जुड़ी हुइ है।