बुधवार के दिन ११ वी अप्रैल २०१८, इंदौर में एक अहम् ऐतिहासिक मौका था जब अलग अलग मज़हबों के पेशवाओ व ओलमाओ ने एकजुट होकर, इंसानियत के उसूलों - अमन और इंसानियत के उसूल पर एक होकर, अपने हाथ मिलाकर ऊँचे किए और अदावत फैला रहे लोगो के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हुए.

तक़रीब - मज़हबों के बीच मोहब्बत और सौहार्द ज़ियादा हो, उसके लिए सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) की रज़ा और दुआ लेकर शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहब सैफुद्दीन ने इंदौर में “हमसाज़ इंटरफेथ कॉन्फरन्स” में तक़रीर करने का इज़न क़बूल किया.

वहाँ आचार्य डॉ. लोकेश मुनी, श्री भय्यूजी महाराज, मौलाना महमूद मदानी, डॉ. हरबान सिंहजी, अल्लामा सैयद अब्दुल्लाह तारिक़, प्रो. सैयद अली मोहम्मद नक़वी, फादर होज़े प्रकाश, और डॉ. उदय निर्गुणकर मौजूद थे.

शेह्ज़ादा साहेब ने सैयदना फखरुद्दीन का पैगाम पहुंचाया कि यह ज़रूरी है कि आज हम जो यहाँ कह रहे है उसे जल्द अमल में लाएँ.

आपने फ़रमाया कि तक़रीबन पांच सौ साल पहले, हमारे दुआत यमन, जो एक मुस्लिम देश है वहाँ से हिंदुस्तान आए यह मद्दे नज़र रखकर कि हिंदुस्तान के लोग अमन पसंद है. हर एक मज़हब के लोगों को आज़ादी और अमान है. १९४७ के साल में जब पार्टीशन हुआ और उसके बाद जो दंगे फसाद हुए तब एक शख्स ने ५१ वे दाई सैयदना ताहेर सैफुद्दीन को धमकी दी कि आप हिंदुस्तान से चले जाएँ। लेकिन सैयदना हिंदुस्तान में ही रहे और आपकी क़ौम को भी कहा कि हिंदुस्तान में ही रहे. जब आपके कई खैर ख़्वाहो ने आपको अर्ज़ की कि आप अपने घर के लोगो को हिंदुस्तान से भेज दे तो आपने फ़रमाया की मैं ऐसा नहीं करूँगा, यदि मैं ऐसा करू तो क़ौम के लोगों को कैसे कहूँ कि वे यहाँ रहे. इनायत इलाहिया ने यह बताया की आपका फैसला सही था और दाऊदी बोहरा क़ौम हिंदुस्तान में बहुत कामियाब हुई है.

उसके बाद शेह्ज़ादा साहेब ने क़ुरआने मजीद की इस आयत की तिलावत की “व तआवनु अलल बिर्रे वत-तक़वा वला तआवनु अलल इसमे वल उदवान” - खुदा की तक़वा पर और अच्छाई के कामो के लिए साथ हो जाओ. गुनाहो और अदावत के लिए साथ मत दो.” अच्छाई है और बुराई है. मज़हब के नाम पर कई लोग अच्छाई और भलाई के काम करते है लेकिन अफ़सोस है कि मज़हब के नाम पर कई लोग बुराई भी करते है.

हम मज़हबी लोग है. हम पर लाज़िम है कि साथ मिलकर अच्छाई करे. तालीम, इलाज और दूसरी चीज़ें जिसकी इन्सान को ज़रुरत है. यह ज़रूरतें हर मज़हब के लोगों को है. हम हमारी क़ौम के लोगों की मदद करने की कोशिश करते है, ऐसा भी क्यों न करे कि साथ मिलकर तालीम, आहार, इलाज और ऐसी कई चीज़ों में सबकी मदद करे.

अगर हमारे मज़हबो का इंसानियत की खिदमत के लिए मक़सद एक हो जाए, तो इरादे में जैसे हम साथ है उसी तरह अमल में भी साथ हो जाएँगे।

आपने क़ुरआने मजीद की आयत पढ़ी कि तुम अच्छाई और भलाई से पेश आओ, तो तुम्हारी जिसके साथ अदावत होगी वह तुम्हारा अच्छा दोस्त बन जाएगा.

शेह्ज़ादा साहेब की कॉन्फरन्स में शामिल हुए कई रईसों के साथ लाभदायक और अच्छी बाते हुई और किस तरह एकजुट होकर इंसानियत की भलाई के लिए काम किया जाए उसपर चर्चा हुई. इंशाअल्लाह कॉन्फरन्स में जो इरादा किया है उसपर जल्द ही अमल होगा.