हिज़ होलीनेस सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ५३ व़े दाई अल मुतलक सैयदना खुज़ैमा क़ुतबुद्दीन रि.अ. के मनसूस (वारिस) है, और आप ५४ व़े दाई है। दाउदी बोहरा कौम के अकीदे (मान्यता) के मुताबिक़ इमाम के सतर (अज्ञातवास) के दौरान, इमाम अपनी पूरी सत्ता अपने दाई को सौंप देते है।

अल दाई अल अजल अल फातेमी सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श., मुक़द्दस मौलाना सैयदना खुज़ैमा क़ुतबुद्दीन रि.अ. के मनसूस है, दाउदी बोहरा कौम के ५४ व़े दाई है । इमाम मोइज़ सअ ने

सैयदना क़ाज़ी अल नौमान को फरमाया था “ एक मौला वफ़ात हुए, मगर एक मौला बाकी है । (मौलाका मदा व-मौलाका बकेया)

अल दाई अल अजल अल फातेमी सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श., ५३ व़े दाई अल मुतलक,, जिन्हें हम सदा याद करते रहेंगे, सबके प्यारे मुक़द्दस मौलाना सैयदना खुज़ैमा क़ुतबुद्दीन रि.अ. के मनसूस (वारिस) है, और आप ५४ व़े दाई है। इमाम मोइज़ स.अ. ने सैयदना क़ाज़ी अल नौमान को फरमाया था “ एक मौला वफ़ात हुए, मगर एक मौला बाकी है । (मौलाका मदा व-मौलाका बकेया)। इस साल २७ मोहर्रम, सैयदी फखरुद्दीन शहीद के उर्स मुबारक के रोज़, पोकोनोस शहर, अमेरिका मे सैयदना क़ुतबुद्दीन ने नस्स फरमा कर सैयदना ताहेर को अपना मनसूस काइम फरमाया और लकब फखरुद्दीन इनायत किया । मौलाना क़ुतबुद्दीन ने शाहीदो (साक्षियो) को नस्स खानगी रखने फरमाया, और अपने हाथ मुबारक से लिखे नस्स की वसीयत के कागज़ की अमानत सौंपी ।

सैयदना बुरहानुद्दीन और सैयदना क़ुतबुद्दीन ने तरबियत की

सैयदना क़ुतबुद्दीन के सब से बड़े शेह्ज़ादे, मौलाना ताहेर का जन्म मुंबई मे २६वीं रबी उल आखिर १३८८ हि. (२१ जुलाई,१९६८) के रोज़ ५२वे दाई सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के ज़मान मे हुआ । सैयदना बुरहानुद्दीन ने आप को आप के जद (दादा जी) सैयदना ताहेर सैफुद्दीन का नाम दिया। सैयदना बुरहानुद्दीन ने आप को दोआओ से नवाज़ा और हाद्दियत का शरफ बख्शा । मौलाना ताहेर को बचपन से नौजवानी तक मौलाना बुरहानुद्दीन से इल्म पढने का शरफ मिला । मौलाना क़ुतबुद्दीन ने आप को बज़ातिश शरीफा आले मोहम्मद का इल्म पढ़ाया और दावत के उमूर और सियासत मे माहिर किया । मौलाना ताहेर ने मिसर मे रहकर अरबी ज़बान और कुरआने मजीद के  हिफ्ज़ और तिलावत की तालीम ली है।

दुन्यवी तालीम

मौलाना ताहेर ने दुन्यवी तालीम मे भी महारत हांसिल की, आप ने अरबी लिटरेचर मे लंडन यूनिवर्सिटी - स्कूल ऑफ़ ओरिएंटल एंड आफ्रिकन स्टडीज़ (SOAS) से एम. ए. (M.A.) की डिग्री हांसिल की है, और इसके पहले मुंबई यूनिवर्सिटी मे अरबी लिटरेचर मे आप प्रथम रहकर बी. ए. की डिग्री हांसिल की ।

व्यापार मे महारत

सैयदना इस्माइल बदरुद्दीन बावा रि.अ. की तरह – जिन के उर्स मुबारक के दिन इस साल सैयदना क़ुतबुद्दीन जन्नत नशीन हुए और मौलाना ताहेर दाई के मरतबे में काइम हुए – मौलाना ताहेर भी व्यापार वाणिज्य के मामलों मे माहिर है, ख़ाससतन वित्तीय मामलों मे, और साथ साथ कृषि के बारे मे भी आप को गहरा तजरबा है ।

 

सैयदना फखरुद्दीन ने सैयदना बुरहानुद्दीन और आप के मनसूस सैयदना क़ुतबुद्दीन की नशात और लगन से बरसों तक खिदमत बजाई है ।

आप को २० साल की कम उम्र मे सैयदना बुरहानुद्दीन ने मोहर्रम के सिर्फ ३ दिन कब्ल अशराह की वाअज़ थाना शहर में करने को फरमाया। सैयदना बुरहानुद्दीन ने आप को यकायक पूछा की क्या वाअज़ करने को तैयार हो तो सैयदना फखरुद्दीन ने नमताई से अर्ज़ की अगर मौला का फरमान हो तो तैयारी भी हो जाएगी। सैयदना फखरुद्दीन ने मोहम्मदियाह, उज्जैन और राजकोट में भी वाअज़ फरमाई।

मुंबई के भेंडी बाज़ार इलाके मे, कौमी फसाद के दौरान सैयदना बुरहानुद्दीन आका खुद की ज़ात मुबारक पर हमला हुआ। उस वक्त भी आप अजब हिम्मत दिखा कर मौला की हिफाज़त में आगे रहे। सख्त हमले के सबब मुमिनीन स्तब्ध हो गए थे, हमले से किस तरह बचाव किया जाए समज नहीं आ रहा था, फिर सैयदना फखरुद्दीन के साथ हुए और सैयदना बुरहानुद्दीन पर हमला नाकाम किया।

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन ने सैयदना खुज़ैमा क़ुतबुद्दीन की, जिस वक्त आप सैयदना बुरहानुद्दीन के माजून और मनसूस थे, उस अरसे में, १४ साल की उम्र से खिदमत बजाते रहे, और १८ साल की उम्र मे तो आप ने माजून ए दावत की ऑफिस की हर कारोबारी ज़िम्मेदारी संभाल ली, जैसे किताबो की खिदमत (वाअज़ और बयान की तैयारी) दीनी संस्थाओ की रचना और प्रबंधन की खिदमत, मुमिनीन से मुलाक़ात, बैठक और अन्य प्रोग्रामो के इन्तेजाम की खिदमत की। सैयदना क़ुतबुद्दीन भी अपनी हजरत में आने वाले मुमिनीन को सैयदना फखरुद्दीन के पास सविस्तार अर्ज़ सुना कर मशवराह लेने भेजते और आप मुमिनीन के शादी, व्यापार के मुद्दों, लोगो के दरमियाँ वाद-विवाद में मध्यस्थी कर के सुलह-संप कराते। सैयदना ताहेर ने इस तरह आप की ३० साल की खिदमत के दौरान हज़ारों मुमिनीन की हाजत रवाई की है और अनेक लोगो की मुश्किलें दूर कर कई मुमिनीन की ज़िंदगी को संवारा है । ये सब ऐसे मुश्किल हालात में अंजाम दिया जब बुरहानुद्दीन मौला के माजून पर खुद के रिश्तेदार ही तरह तरह के कलाम करते थे। कुछ मौके ऐसे भी आये जब सैयदना क़ुतबुद्दीन पर सख्त हमले हुए, आप की ज़ात ए शरीफ पर जिस्मानी हमले भी किये गए, ऐसे मौके पर सैयदना फखरुद्दीन ने जाँफेशानी से आप की खिदमत की।

सैयदना क़ुतबुद्दीन के ज़मान में खिदमत की ज़िक्र

सैयदना बुरहानुद्दीन रि.अ. के वफात के बाद, २ साल से मौलाना ताहेर ने सैयदना क़ुतबुद्दीन की फातेमी दावत का यूनाइटेड स्टैट्स में निज़ाम संभाला है, और बेकर्सफिल्ड, कलिफ़ोर्निया मे आप के मकान मे इमामत से नमाज़ और दावत की मजालिस अकद फरमाते है, जो तमाम आलम मे यु-ट्यूब के ज़रिये रिले हती है । इन दोनों साल मोहर्रम में आप की वाअज़ भी ओं-लाइन रिले की गयी और हज़ारों मुमिनीन ने मौलाना ताहेर की वाअज़ सुन कर आप के बयान में ज़िक्रे हुसैन स.अ. की बरकात ली और आले मोहम्मद स.अ. के इल्म की नेमत हांसिल की।

अल्लाह तआला सैयदना क़ुतबुद्दीन रि.अ. को पंजेतन पाक स.अ. और अइम्मत ताहेरीन स.अ. के साये में जन्नात उन नईम में दोआत मुत्लकीन की सफ्फ में, सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. और सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि.अ. के शफीक साये में आला मकाम अता करे, खुदा तआला सैयदना क़ुतबुद्दीन को इमाम उज़ ज़मान की दावत और उसके अदना खादिमो की तरफ से अफ्ज़लुल जज़ा अता फरमायें।

अल्लाह तआला मौलाना ताहेर को और सैयदना क़ुतबुद्दीन को ज़िंदगी के हर पल याद करने वाले हम गुलामों को सबरे जमील अता फरमायें।

अल्लाह तआला सैयदना ताहेर फखरुद्दीन की उम्रे शरीफ को ता रोज़े क़यामत दराज़ करे, और इमाम उज़ ज़मान की खिदमत के खातिर कुव्वत अता फरमायें। अल्लाह तआला सैयदना क़ुतबुद्दीन को आप के मनसूस और अज़ीज़ शेहज़ादे में कुर्रत उल ऐन (आँखों की ठंडक) अता फरमायें।