रसुलुल्लाह स.अ.व. फरमाते हैं कि जो शख्स मेरे फ़रज़न्द हुसैन पर आँसू बहाएगा, या दूसरों को रुलाएगा, यदि रोना न आए तो रोने का असर अपने चेहरे पर ज़ाहिर करेगा उसके लिए जन्नत वाजिब है.

नबी-ए-सादिक की हदीस के मुताबिक़ हुसैन पर रोने वाले को सवाबे अज़ीम हासिल होता है. यह सवाब क्या है कि जन्नत. तो इतना बड़ा अजर क्यों? हम हुसैन इमाम स.अ. की ज़िक्र करते है, आपको याद करके आप पर आँसू बहाते है, उसमें क्या हिक्मत है? फ़लसफ़त क्या है? हम यह क्यों करते है?

मजालिसुल हिक्मत की २४ वी मजलिस में, अशरा मुबारका के नज़्दीक, सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.