“दावत आबाद है” – सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. की अशरा मुबारका १४४१ हि. की पहली वाअज़: सैयदना त.उ.श. ने माज़ून उद दावतिल गर्रा और मुकसिर उद दावत अल-हक अल-मुबीन काइम फरमाए

मुमिनीन को इस नये साल की शुरूआत में बरकात और ज़्यादा मिली, गुनागून हो गयी जब दाई अल-अस्र वल हीन सैयदना व मौलाना ताहेर फखरुद्दीन आका त.उ.श. ने अशरा मुबारका १४४१ की पहली वाअज़ में आपके माज़ून और मुकासिर को काइम फरमाया।

सैयदना ने फरमाया कि बुरहानुद्दीन आका रि.अ. के वफात के बाद सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. ने नस्स की हुज्जत साबित की और हक की बात रख कर दुश्मनों के हमले से दावत की हिफाज़त की। सैयदना ने फरमाया कि सैयदना कुत्बुद्दीन का इरादा था कि आप मरातिब को अपने एहेद के दौरान काइम करें मगर यह इम्कान न हुआ।

सैयदना ने अजब जोश में आ कर फरमाया कि दाई इमाम उज़ ज़मान के फैज़ और त़ाईद से मोअय्यद है और आज की वाअज़ की मजलीस में, इमाम हुसैन अ.स. की मजलीस में आपने इज़न के रुतबा आलियाह में आप के भाई सैयदी माज़ून साहेब अब्देअली भाईसाहेब सैफुद्दीन अताउल्लाहे बका उस शरीफ़ को काइम फरमाया और कसर के रुतबा सामिया में आपके भाई सैयदी मुकसिर साहेब हुसैन भाईसाहेब बुरहानुद्दीन अताउल्लाहे बका उस शरीफ़ को काइम फरमाया। सैयदना ने दोनों साहेबो को वसियत फरमाई कि सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. ने जो तसववुर दी है वैसे दावत की खिदमत इखलास से करें।

जब इन दोनों साहेबों को मौलानल मिनआम ने काइम फरमाया तब दारुस सकीना, इवाने फातेमी खुशी के नारों से गूँज उठा और हज़ारों मुमिनीन की खुश नसीबी कि इस मौके की बहा और बेहजत में वाअज़ की लाइव ब्रोडकास्ट के ज़रिये से शामिल हुए। इस लेहज़े में यह वाज़ेह हो गया कि सैयदना त.उ.श. का कौल – “हक की दावत आबाद है” – इयानन हक है।

सैयदना ने मुमिनीन को हसद से दूर रहने की हिदायत दी, आप ने ज़िक्र फरमाई कि मोइज़ इमाम अ.स. ने इरशाद फ़रमाया है कि हसद के मूल में है खुदा तआला से नाराज़गी – और फरमाया कि यह सब से बड़ी बीमारी है। सैयदना ने उन सब की ज़िक्र की जिन्होंने सैयदना कुत्बुद्दीन पर हसद और अदावत में सैयदना बुरहानुद्दीन रि.अ. पर दस्त दराज़ी की।

सैयदना त.उ.श. ने अशरा मुबारका १४४१ हि की पहली वाअज़ में जो मुमिनीन आप की हज़रत में मौजूद थे, और जो मुमिनीन इंटरनेट के ज़रिये से शामिल हुए, उन्हें रसूलुल्लाह स.अ. की उम्मत, मौलाना अली के शिआ, मौलातुना फातेमा की मोहब्बत करनेवाले और इमाम हसन और इमाम हुसैन की मारेफ़त करनेवालों से ख़िताब फरमाया।

सैयदना ने पंजेतन पाक स.अ. की आला शान की ज़िक्र फरमाई और आदम नबी ने भी पंजेतन पाक का वसीला लिया यह ज़िक्र की। आपने बयान फरमाया कि हर ज़मान में एक रेहनुमा और राहबर मौजूद होने ही चाहिए जो कौम को हिदायत दे, यह अदल के खिलाफ़ कहा जाए कि पंजेतन पाक के बाद आनेवाले ज़मान में मुमिनीन की हिदायत के लिए कोई साहेब न हो। तो हुसैन इमाम के बाद हर ज़मान में आप के वारिस इमाम मौजूद है, और इमाम की गैबत के ज़मान में दोआत का सिलसिला नस्स ब नस्स जारी है – जिस सिलसिले के ५४ व़े दाई आज सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. है।

सैयदना ने फरमाया कि अशरा मुबारका के मुबारक दिनों में मलाएकत जो मुमिनीन हुसैन की मजलिसों में हाज़िर होते है उनकी गिनती करते है – सिर्फ यही नहीं, बलके यह मुमिनीन की आँखों से निकले आंसू जमा करते है – आंसू जो इमाम हुसैन शहीदे करबला की ज़िक्र में निकलते है, जो क़यामत के दिन अपने दरजात को बलंद करनेवाले है।

वाअज़ में "إن كلمة الله هي العليا" की आयत शरीफा की माअना बयान करते हुए सात वुजुहात बयान फरमाएँ. सात वा वजह यह कि खुदा के कलेमाह इमाम की ग़ैबत के नज़दीक इमाम के दाई है। सैयदना ने फरमाया कि मरातिब मुद्दखर (पूर्व निर्धारित) है – किताबुल इल्म में लिखे हुए है, मकतूब है।

सैयदना ने वाअज़ के खिताम में अजब रिक्कत के साथ इमाम हुसैन अ.स. की शहादत पढ़ी, मुमिनीन मुमेनात और फ़रज़न्दों ने पुरजोश मातम किया।