जो मुमिनीन मुंबई, ह्युस्टन या लंडन में वाअज़ के लिए हाज़िर न हो सके, व़े अपने शहर में जमा हो कर वाअज़ सुने और नियाज़ करे। आप के शहर में और भी मुमिनीन से संपर्क करने [email protected] पर ई-मेल करें।

जहां इम्कान होगा वहाँ कोंटेक्ट नंबर वेबसाईट पर पेश किया जाएगा। अगर दस दिनों तक जमा होने का इम्कान न हो तो कम से कम आख़री तीन दिन ज़रूर जमा हो।

मुमिनीन “या सैयदुस शोहोदा” और “फुल्कुल हुसैन” के मरसिया अशरह मुबारका में हर रोज़ तिलावत करे। पूरा मरसिया न पढ़ सके तो चन्द बैत पढने की कोशिस करें। “या हुसैन” की तस्बीह आप के नाम के अदद के मुताबिक़ १२८ बार करें (जैसे मौलाना अली के नाम के अदद ११० है) यह बरकतवन्ता नुस्खा सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने बताया हुआ है।