आका मौला सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने मुमिनीन को ख़िताब करते हुए फरमाया कि ऐ मोहम्मद मुस्तफा की उम्मत खास्सा! अली उल मुर्तजा के शिआ खोलोसा! दोनों मकामैन इलाहीऐन मीम और ऐन की मोहब्बत करनेवाले मुमिनीन तुम हो, यह अकीदा रख कर कि मोहम्मद और अली दोनों हम शान और हम पल्ला है।

मौलानल मिनआम ने ज़िक्र फरमाई कि ज़वाल की घड़ी दिन की सातवी घड़ी है, जिस में ज़ोहर की नमाज़ पढ़ते है। तावील की माअना यह है कि मोहम्मद के ४ हर्फ और अली के ३ हर्फ़, मोहम्मद और अली साथ आते है और दावत काइम होती है।

रसूलुल्लाह स.अ. फरमाते है कि आप और मैं ऐ भाई अली एक नूर से पैदा हुए है। मौलाना त.उ.श. ने एक मौजिज़ा बयान किया – आप दोनों एक तंग गली में आमने सामने से आ रहे थे, और रसूलुल्लाह स.अ. और अली स.अ. एक दुसरे में से पारित हो कर चले।

रसूलुल्लाह स.अ. शम्सुल इब्दाअ है और मौलाना अली स.अ. कमर उल इमबिआस, रसूलुल्लाह स.अ. इनशिकाक उल कमर का मौजिज़ा दिखाते है और अली के लिए सूरज रद हो कर वापस असर की घड़ी के स्थान पर आता है।

मौलाना त.उ.श. ने फरमाया कि रसूलुल्लाह स.अ. सैयदुल अंबिया वल मुरसलीन है, अली सैयदूल अवसिया है। रसूलुल्लाह स.अ. की शहज़ादी फ़ातेमा सैयेदतुन निसा ए आलमीन है। रसूलुल्लाह स.अ. के नवासे इमाम हसन और इमाम हुसैन सैयेदै शबाब ए एहले जन्नत है। पंजेतन की शान अज़ीम है। पंजेतन के वारिस अइम्मत ताहेरीन स.अ. भी सब सरदार है।

आज मोहम्मद रसूलुल्लाह स.अ. की मजलीस है जिन्हें खुदा ने रेहमतुन लिल आलमीन बनाकर भेजा।

सैयदनल मोअय्यद रि.अ. हुज्जत कर के बयान फरमाते है कि क्या रसूलुल्लाह स.अ. के बाद नेअमत बंद हो गई? खुदा ने जैसे आप के ज़मान में अदल किया, आखिर के ज़मान में भी खुदा का अदल काइम है। हर ज़मान में एक इमाम रसूलुल्लाह स.अ. के रेहमत के खामीरे के वारिस हाज़िर और मौजूद है। इमाम परदे में है तो दोआत के हाथ पर रेहमत की बरकात मिल रही है। सैयदना अली बिन मोहम्मद बिन अल वलीद सैयदना हातिम को अर्ज़ करते है हम यह कहते ही नहीं के इमाम परदे में है जब कि आप, ऐ खुदा की रेहमत, ऐ इमाम उज़ ज़मान के दाई, आप हमारे दरमियाँ मौजूद है। इमाम की रेहमत की गादी पर इमाम ने दाई को बिठाया है। दाई मुमिनीन को रेहमत से नवाज़ते है।

जो दोआत के दामन से वाबस्ता है वह इमाम से वाबस्ता वाबस्ता है। सैयदना त.उ.श. ने इमाम जाअफ़रुस सादिक स.अ. ने दी हुइ बिशारत की ज़िक्र फरमाई, क़यामत के दिन नाना नबी का दामन हमारे हाथ में होगा और हमारा दामन तुम्हारे हाथ में होगा, तो भला तुम कहाँ जा रहे होगे? इमाम ने जोश में आ कर फरमाया, वल्लाहे इलल जन्नते इन्शाअल्लाह! खुदा की कसम जन्नत की तरफ इन्शाअल्लाह।

सैयदना क़ाज़ी अल नौमान ने शरहुल अखबार में इमाम सादिक की ज़िक्र फरमाई कि मुमिन के लिए मौत के वक्त क्या रेहमत और क्या बिशारत है, सैयदना ने यह ज़िक्र तफसीर से बयान फरमाई।

मौलानल मिनआम ने ज़िक्र फरमाई कि रेहमत हुसैन इमाम के सबब मिली है। इमाम बाकिर स.अ. फरमाते है कि जो हुसैन की मुसीबत को याद कर के रोये, मच्छर के पर के बराबर आंसू निकाले, तो खुदा उसके गुनाह बख्श देगा। वहाँ उस वक्त एक शख्स ने इमाम की यह बात नहीं सचाई, उसने सपने में देखा कि मौलातुना फातेमा उस से बेहद खफा है और उस शख्स को कौसर से महरूम रखा गया, फिर उस शख्स ने इमाम के पास आ कर तौबा की।

आका मौला ने इख्वान उस सफा में से एक अंधे और एक लूले दो शख्स की हिकायत बयान फरमाई कि इन दोनों ने मिल कर उस शख्स की वाड़ी में नुक्सान पहुंचाया जिसने उन दोनों पर रेहमत कर पनाह दी थी। मौलाना ने फरमाया कि रेहमत के साहेब रेहमत करते है, मगर कोई कुफुर (शुकर के विपरीत) करे तो वह अज़ाब के काबिल है। मिसाल दे कर बयान फरमाया कि दावत की तारीख में, दाई के घर में भी ऐसे हालात हुए है, मालिक तो रेहमत करे मगर कुछ ऐसे लोग होते जो फसाद करते है।

सैयदना ने फरमाया कि आज रसूलुल्लाह स.अ. की मजलीस में रेहमत के बारिश बरस रहे है। सैयदना कुत्बुद्दीन फरमाते थे कि बर्तन सीधा हो तो पानी भरा जा सकता है, बर्तन साफ़ होना भी ज़रूरी है, वैसे ही इंसान का अकीदा साफ़ हो, कबूलियत हो। कोई सवाल अगर है तो ज़रूर पूछना चाहिए, इस्तिरशाद का सवाल हो (खुलासा करने), सवाल में ऐतराज़ नहीं होना चाहिये।

आज की मजलीस में आका मौला त.उ.श. ने सूरतुल रेहमान की आयतों की सात फसल बयान फरमाई:

पहली फसल अर रेहमान की माअना अकले अव्वल, दूसरी फसल अर रेहमान की माअना आशिर मुदाब्बिर, तीसरी फसल अर रेहमान से आदम उल कुल्ली, पहले इमाम की मुराद है

चौथी फसल में अर रेहमान से मुराद रसूलुल्लाह स.अ. है, मौलाना ने रसूलुल्लाह स.अ. के अखबार की मुख़्तसर ज़िक्र फरमाई । कुरआन मजीद रसूलुल्लाह स.अ. का मौजिज़ा है।

मौलाना त.उ.श. ने वहये की तीन किसम का बयान कर के फरमाया कि इसमें आला इशारात है।

मौलानल मिनआम ने ज़िक्र फरमाई कि रसूलुल्लाह स.अ. ने हिजरत के बाद एक एक को आपस में भाई बनाया, मगर अली को अपने खातिर रख लिया। आप ने मौलाना अली को फरमाया कि आप तो मेरे भाई है, दुनिया और आखेरत दोनोँ में। सैयदना हमीदुद्दीन केरमानी फरमाते है कि रसूलुल्लाह स.अ. का यह जुमला अली स.अ. पर नस्स का इशारा नहीं तो क्या है।

मौलाना त.उ.श. ने फरमाया कि कि बुरहानुद्दीन आका रि.अ. ने अजब शान से अमल फरमाया। सैयदना कुत्बुद्दीन पर आपने अपने गुरफत में नस्स फरमाई, फरमाया कि भाई को मेरे बाद दावत के रुतबे में खिदमत करनी है, यह बताया कि मेरे बाद दाई आप है। फिर बुरहानुद्दीन आका ने वाअज़ में माज़ून के रुतबे में निराली शान से काइम फरमाया, तीन बार  यह जुमला फरमाया कि अल वलद उल अहब – मेरे प्यारे फरजंद – (जब कि सैयदना कुत्बुद्दीन सैयदना बुरहानुद्दीन के भाई थे, आप की मुराद रूहानी फरजंद से है) दाई के वलद कौन कि दाई, इशारे से फरमाया। आलिम सैयदना बुरहानुद्दीन का इशारा समझ गए, कई ओलोमा सैयदना कुत्बुद्दीन को सजदा बजाते थे, कुछ ने अपने कसीदे में लिखा कि आप को  मूसा के हारून जैसा बनाया। फिर बाद में हालात हुए। दौलत और दुन्यवी रियासत का धुँआ छाया, शैतान अलग अलग किस्म से फसाद करता है, अंधा और लूला मिलकर दावत में फसाद करते है।

मौलाना त.उ.श. ने फरमाया कि तंजील (ज़ाहिरी माअना) का तावील (छिपी हुइ माअना) अली स.अ. बयान फरमाते है। सैयदना ने अमीरुल मुमिनीन स.अ. के इल्म की शानात की ज़िक्र फरमाई, फरमाया कि खुदा के हमनाम अली है। सैयदना ने कहफुर रहमान का मौजिज़ा बयान किया।

तावील अली का मौजिज़ा है। कुछ लोग तावील में नहीं मानते। सैयदना फखरुद्दीन जब मिस्र में कोलेज में थे तब वहां के लोग के हालात पर ज़िक्र फरमाई ।

सैयदना ने ज़िक्र फरमाई कि सादिक इमाम ने रसूलुल्लाह स.अ. की दांग बरकत लेने खातिर अपने हाथ में रखते थे, दांग के बारे में अबू हनीफा ने इमाम से पूछा, लेकिन इमाम के जवाब को सचाया नहीं। फिर सैयदना ने बरकती चीज़ों के बारे में फरमाया कि सैयदना बुरहानुद्दीन और सैयदना कुत्बुद्दीन अशरह मुबारका में सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के बरकती कपडे पहन कर वाअज़ फरमाते थे। सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने सैयदना कुत्बुद्दीन को आशूरा के दिन तख़्त से उतरते हुए अपना बरकती रूमाल अता किया, सैयदना ताहेर फखरुद्दीन नी फरमाया कि आज भी वह रूमाल बरकत के खातिर में अपने साथ रखता हूँ। सैयदना कुत्बुद्दीन, सैयदना बुरहानुद्दीन के थाल से आप ने तनावुल किए हुए खाने से बरकत के लिए खुद और अपने फ़रज़न्दो को खिलाते थे। सैयदना कुत्बुद्दीन इखलास के साथ अमल करते थे, जूठ बोलने वाले तरह तरह के कलाम करते है, हर ज़मान में ऐसे लोग होते है।

मौलाना त.उ.श. ने गुनाह की तीन किसम की ज़िक्र फरमाई, इमाम फरमाते है कि आप मुमिनीन के गुनाह बख्शा देगे, बन्दों के आपस में हुए गुनाह का खमियाज़ा भी अदा कर देंगे।

सैयदना ने फरमाया कि कुरआन का हकीकी इल्म इमाम के नज़दीक है। इमाम पर्दा इख्तियार करते है तब दावत करने दाई को काइम फरमाते है ।

सातवी फसल दोआत मुतलकीन पर सैयदना ने वसल की और फरमाया कि पंजेतन पाक, अइम्मत और दोआत की कुल गिनती करो तो ७८ होती है। (नबी, वसी, फातेमा, २१ इमाम और ५४ दोआत) सूरतुल रहमान की भी ७८ आयत है।

सैयदना ने फरमाया कि रेहमत और फैज़ इमाम से दाई की तरफ एक आँख की मिचकार के लिए भी बंध नहीं होता।

रहमतुन लिल आलमीन रसूलुल्लाह स.अ. के दाई है। दोआत की दोआ के सबब, सैयदना बुरहानुद्दीन और सैयदना कुत्बुद्दीन की दोआ से बारिश हुइ। दाई की दोआ मुस्तजाब है ।

मौलाना ने फरमाया कि इमाम कुरआन ए कुल है, इमाम की मारेफ़त दाई कराते है, और मुमिनीन की दीनी तरबियत करते है, हकीकत के असरार बयान फरमाते है ।

सैयदना ने हिदायत देते हुए फरमाया कि सात दआएमत पर बराबर अमल करे। अमीरुल मुमिनीन के कौल की ज़िक्र फरमाई कि शिआ की सीरत और सूरत में ईमान की झलक हो, सिर्फ कहने या दिखावे के लिए कह देना कि हम शिआ है काफ़ी नहीं।

मौलानल मिनआम ने फरमाया कि ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुन रसूलुल्लाह अलीयुन वलीयुल्लाह, कलेमतुश शहादत, रसूलुल्लाह स.अ. खुद शहादत देते है कि मोहम्मद रसूलुल्लाह है। कोर्ट में वे लोग कहते है कि खुद पर हुइ नस्स के बारे में मनसूस की शहादत मान्य नहीं। रसूलुल्लाह स.अ. खुद अपने मकाम की शहादत देते है, खुद का मकाम बताते है। मौलाना हमीदुद्दीन ने फरमाया है कि चाहे हज़ारों लोग भी शहादत दे दे, मगर नस्स नही हुइ हो तो सही नहीं। मौलाना अली ने फरमाया कि चाहे सभी मेरे खिलाफ़ हो जाए फिर भी मैं ही हक पर हूँ।

सैयदना त.उ.श. ने खुदा के हम्द, सलवात और दोआ के बाद इमाम हुसैन स.अ. की शहादत पढ़ी, और रसूलुल्लाह स.अ. की शहादत पर वाअज़ तमाम की। मुमिनीन ने ज़ोर से मातम किया और आहोज़ारी की।