आका मौला सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने मुमिनीन को खिताब करते हुए फ़रमाया कि ऐ अल्लाह के इबाद मुमिनीन, अल्लाह सुबहानहु की नेअमत पर शुकुर करने वाले मुमिनीन। नेअमत उज़मा कौन है कि नबी मोहम्मद स.अ. और आप की इतरत स.अ.। हर ज़मान में एक नेअमत उज़मा, एक इमाम ज़ाहिर और मौजूद है। जिन के तुफैल में दुनिया और आखेरत की नेअमत मिलती है। जब इमाम उज़ ज़मान केहेफ़ुत तकीयत में हो, परदे में हो तब मुमिनीन को यह नेअमत इमाम के दोआत मुतलकीन के हाथ पर मिलती है। ईमान के लोगो के लिए यह ख़ास नेअमत है कि हकीकत के असरार पढ़ना नसीब होता है।

आले मोहम्मद के आलिम से मुराद दाई है, रसूलुल्लाह स.अ. फरमाते है :

"تعلموا من عالم اهل بيتي…"

आलिमे एहले बैत से सीखो, या जो आलिमे एहले बैत से सीखा हो उस से सीखो, तो आग से पनाह होगी।

आज मूसा अ.स. और ईसा अ.स. की मजलीस में मौलानल मिनआम ने फरमाया कि तौरात में मूसा नबी ने दोआत की सिफत देखी, कुरआन में भी दोआत की ज़िक्र है। कुरआने कुल इमाम उज़ ज़मान है, और दोआत मुतलकीन कुरआन की सूरतें है। सब सूरत कुरआन में है है। अमीरुल मुमिनीन स.अ. फरमाते है कि मै बोलता हुआ किताब हूँ। इसी तरह हर ज़मान में आप के शेहजादे इमाम उज़ ज़मान कुरआने नातिक है।

इमाम हुसैन की ज़िक्र में सवाब है, जैसे कुरआन पढने सवाब है और जैसे कुरआन पढने में शिफा है वैसे इमाम हुसैन की ज़िक्र में शिफा और रहमत है

मौलानल मिनआम ने कुरआन मजीद की  इस आयत की तिलावत की:

"وما بكم من نعمة فمن الله"

आप ने फरमाया कि सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने यह आयत शरीफ सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन को इनायत फरमाई। यह ५३ वी आयत है, इशारा कर के बताया कि कुत्बुद्दीन मौला किस मकाम में पहुँचने वाले है।

मौलाना त.उ.श. ने फरमाया कि यह सब नेअमत हुसैन और हुसैन के दाई के तुफैल में मिलती है। यह दारुस सकीना मौलाना कुत्बुद्दीन का महल है। आप इमाम की मारेफ़त कराते है। आप की नेअमतों में हम पले है, बावाजी साहेब की नेअमतो को हमेंशा याद कर शुकुर करता हूँ। आप तख़्त पर जलवा अफरोज होते थे, अजब शान से इल्म नशर फरमाते थे, मुमिनीन को नेअमतो से नवाज़ते थे, दोआ के लाकीमत कलेमात फरमाते थे, खुदा तआला बावाजी साहेब को अफ़ज़लुल जज़ा अता करे।

मौलानल मिनआम ने, अमीरुल मुमिनीन ने शिआ के बारे में जो बिशारत दी है कि क़यामत के दिन जब सभी को कबर से निकाला जाएगा, अर्श के साये में शिआ माएदत तनावूल करते होगे, और बाकी लोग हिसाब में होगे, यह ज़िक्र फरमाई। आले मोहम्मद के मवाइद इल्म की नेअमत है।

सैयदना त.उ.श. ने फरमाया कि खुदा की नेअमत मिले ताहेर शुकुर करें, शुकुर से नेअमत ज़्यादा होती है। खुदा ने नेअमत अता की हो तो दूसरों का भला चाहे और नेअमत का हिस्सा उन्हें भी दें। इस मजरे में मौलाना ने इख्वान उस सफा में से मजूसी और यहूदी हिकायत बयान फ़रमाई जिस में दूसरों के लिए खैर करने की हिदायत है।

रसूलुल्लाह स.अ. फरमाते है कि सभी इंसान खुदा के फरजंद है, खुदा उसे पसंद करते है जो इबादुल्लाह को ज़्यादा से ज़्यादा फायदा पहुंचाए। खुदा ने दौलत दी है, दौलत का घमंड न

हो।

मौलाना त.उ.श. ने नेअमत के शुका के बारे में एक और हिकायत बयान फरमाई, जिस में खुदा तआला एक अबरस (जिसे सफेदी की बिमारी हो), अकरा (जिस के बाल न हो), और आमा (जिसे दिखता न हो), इन तीनों को खुदा ने पहले नेअमत दी और फिर उनका इम्तेहान लिया, जिस ने शुकुर किया उस शख्स पर नेअमत बाकी रही।

मौलाना कुत्बुद्दीन रि.अ. फरमाते थे कि शुकुर में ज़िन्दगी गुज़ारे। छोटी छोटी चीज़ पर भी शुकुर करें। नेअमत के धनी की यह शान है, जो कुरआन में फरमाते है कि शुकुर करोगे तो और ज़्यादा अता नसीब होगी।

सैयदनल मिनआम ने माएदत की ज़िक्र फरमाई। माएदत के पांच हुरूफ़ है, पांच फसल बयान की।

फसल: मूसा अ.स. की ज़िक्र में फरमाया की मूसा की दोआ से बनी इसराइल पर मन और सलवा उतरा (मन-मिठास और सलवा-परिंदा)। इसकी ज़ाहिर और तावील की माअना बयान फरमाई। मन और सलवा हक़ का इल्म है, यह खुदा का एहसान है, इल्म के सबब सुकून है।

दूसरी फसल में ईसा अ.स. की ज़िक्र में फरमाया कि ईसा के माँ साहेबा मरियम पर माएदत उतरा। ईसा ने दोआ की और आप के हवारियीन पर माएदत उतरा, यह ज़िक्र फरमाई।

तीसरी फसल में पंजेतन स.अ. की ज़िक्र फरमाई। अनज़ीर अशीरतकल अकरबीन, की ज़िक्र फरमाई कि रसूलुल्लाह स.अ. ने बनु अब्दुल मुत्तलिब के ४० अश्खास को एक रांग और दूध की एक कदेह पर सैराब कर दिया। बाद में सैयदना ने अमीरुल मुमिनीन कुफा में हज़ारों को खाना खिलाते थे वह ज़िक्र फरमाई।

हुसैन इमाम करबला में तीन दिन भूखे प्यासे रह कर शहादत इख्तियार फरमाते है ताके क़यामत के दिन तक मुमिनीन को माएदत की बरकत मिलती रहे।

चौथी फसल में मौलातुना फातेमा अ.स. पर माएदत उतरा इसकी ज़िक्र फरमाई।

पांचवी फसल में तैयेब इमाम स.अ. की जीके फरमाई। तैयेब इमाम के नाम में पंजेतन की बरकत है। तैयेब इमाम परदे में है, इमामत के आसमान से दोआत पर माएदत उतारते है। दोआत का एहसान है, जो ताईद और फुयुज़ात इमाम आप के दाई की तरफ जारी करते है, दोआत मुमिनीन को उसकी बरकात पहुंचाते है। दोआत ने यह बेहतर रस्म शान से काइम की है कि अशरह मुबारका में आले मोहम्मद के इल्म का रिज़्क मुमिनीन को मिले और इमाम की ताईद की बरकत से मुमिनीन बैहरवर हो, और दोआत की कोशिशो की ज़िक्र मौलाना ने फमाई।

सैयदना इस्माइल बदरुद्दीन रि.अ. ने तलबतुल इल्म के लिए रहने, खाने का इन्तेजाम कर के उन्हें इल्म पढ़ाया। यह सुन्नत आप ने जारी की। आप के वारिस सैयदना अब्देअली सैफुद्दीन रि.अ. ने बारह हज़ार मुमिनीन को दकाल के वक्त सूरत में रखा, दरसे सैफी काइम फरमाया।

सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. ने जामेआ सैफ़ियाह काइम की।

सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि.अ. और आप के वारिस सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. अशरह मुबारका में मुमिनीन की नियाज़ करते थे।

मौलाना त.उ.श. ने फरमाया कि मुमिन को खाने की दावत देना, दाई, इमाम ताके रसूलुल्लाह स.अ. को दावत देने में अज़ीम सवाब है। रसूलुल्लाह स.अ. को ताईफ़ में अंगूर के १८ दाने अर्ज़ किए, जजा यह मिली की उसकी नसल में १८ दोआत हुए।

खाना खाते वक्त यह खुदा की नेअमत है इसके बारे में सोचो और शुकुर करो, इसराफ़ न करो। खाने को ज़ाए न करो, ऐसे ही हर चीज़ में भी ख्याल रखो, नेअमतों की कदर बूझो । फ़रज़न्दो की भी ऐसी तरबियत करो, हिदायत के कलाम फरमाए।

मौलानल मिनआम त.उ.श. ने खुदा का हम्द और सलवात पढ़ कर दोआए फरमाई कि दीन दुनिया की रोज़ी के साथ खुदा तआला इल्म की नेअमत भी अता करे। आले मोहम्मद के इल्म से हयात अबदियाह मिलती है। 

सैयदना ने इमाम हसन स.अ. के दो शेह्ज़ादे कासिम अ.स. और अब्दुल्लाह अ.स. की पुरदर्द शहादत पढ़ी और इमाम हुसैन स.अ. की शहादत की ज़िक्र पर वाअज़ तमाम की।