अल दाई अल फातेमी सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने इमाम हुसैन स.अ. की अज़ा की पहली मजलीस में मुमिनीन को ख़िताब करते हुए फरमाया कि ए अल्लाह के इबाद मुमिनीन, ए पंजेतन पाक स.अ. की मारेफ़त करनेवालों और उनका वसीला लेनेवालों, वसीला जो नबी आदम स.अ. ने अपनी खता की मगफेरत की दोआ मांगते वक्त “कलेमात” (पंजेतन स.अ.) का वसीला पेश किया, और खुदा तआला ने आदम स.अ. की तौबा कबूल फरमाई। खुदा का शुकुर हमें रसूलुल्लाह स.अ. और आप की इतरत अइम्मत ताहेरीन स.अ. की मारेफ़त, ताअत करनेवाले लोगो में से किया।

अइम्मत ताहेरीन की शानात की ज़िक्र में सैयदना क़ाज़ी अल नौमान रि.अ. ने आप की किताब मजालिस वल मुसाएरात में लिखा है, जो आप ने इमाम मोइज़ स.अ. से सुना, इमाम फरमाते है कि सैयदुल मुरसलीन के फ़रज़न्द हम है, दुश्मन हमारे हक का इनकार करते है, खुदा ने हमें तफ्ज़ील बख्शी है, खुदा ने हमारी ज़िक्र आदम को पैदा करने से भी पहले की है, हमारे सिवा इस फ़ज़ल का कौन दावा कर सकता है। सैयदना ने इमाम के कलेमात की तफसीर फरमाई।

पंजेतन के वारिस इमाम उज़ ज़मान तैयेब उल अस्र वल अवान स.अ. इस ज़मीन की पीठ पर हाज़िर और मौजूद है, यह हमारा अकीदा है। इमाम उज़ ज़मान कौन कि जिस के लिए यह आलम पैदा किया गया है। इमाम उज़ ज़मान की मारेफ़त दोआत मुतलकीन कराते है । ५१, ५२ और ५३ व़े दाई मला ए आला की तरफ, इमाम उज़ ज़मान की दावत कर के सिधारे। आप यह बताते रहे कि मौलल खलाइक इमाम उज़ ज़मान है। दोआत मुतलकीन का हम जितना शुकुर करे कम है।

हक की दावत को जो जवाब दें उन्हें अमीरुल मुमिनीन मौलाना अली स.अ. बुशरा सुनाते है जिस के सबब अकीदा मज़बूत होता और मोहब्बत ज़्यादा होती है। अली फरमाते है रसूलुल्लाह स.अ. वफात न हुए मगर तुम से खुश थे।

अगर तुम में से कोई न होता तो दुनिया के लोगो को तैयेबात का रिज़्क हांसिल न होता। औरों के लिए दुनिया में नसीब है मगर आखेरत में उनके लिए कोई नसीब नहीं। शीअतो अलीयून हुमुल फ़ाएज़ून किस वजह से है, इमाम हुसैन ने सजदे में फरमाई उस दोआ के सबब।

रसूलुल्लाह स.अ. ने मौलातुना फातेमा को इमाम हुसैन की शहादत की खबर सुनाई, फ़रमाया जिस वक्त हुसैन शहीद होगे उस वक्त न मैं, न तुम, न अली होगे, तो फातेमा ने पुछा कि फिर हुसैन पर रोएगा कौन? रसूलुल्लाह स.अ. ने फरमाया कि मेरी उम्मत के मर्द और औरत सभी हुसैन पर रोएंगे, एहले बैत की मुसीबत याद कर के रोएंगे। हर साल मातम को ताज़ा करेंगे, और ज़्यादा करेंगे। क़यामत के दिन मुमेनात जो हुसैन पर रोए हो उनकी शफाअत फातेमा आप करना, जो मर्द हुसैन पर रोए हो उनकी शफाअत मैं करूँगा। हर आँख जो हुसैन पर रोई होगी खुश होगी, अर्श के साए में अमान में होगी।

हुसैन इमाम के दाई ने गमज़दा हो कर फरमाया कि मुमिनीन इस मुसीबत को याद कर के आँखों से आँसू बहा लो। इन मुसीबतों को याद कर के आँसू बहाएंगे के नहीं

  • ३ दीनो की भूख और प्यास याद करेंगे के नहीं
  • अब्बास अलमदार के दो हाथ कटें वह याद करेंगे के नहीं
  • अली अकबर के सीने में बरछी लगी वह याद करेंगे के नहीं
  • सैयदुस शोहोदा इमाम हुसैन को सजदे में शिमर ने ज़बेह किया और आप के रास को भाले की नोंक पर ऊंचा किया और बदने अतहर पर घोड़े दौडाए वह याद करेंगे के नहीं

हुसैन के दाई तुमसे पूछते है कि तुम मेरे साथ आँसू निकालोगे या नहीं, और मैं इमाम उज़ ज़मान से अर्ज़ करूँगा कि आप अपने शिया को जन्नत में दाखिल करोंगे के नहीं!

मातम की फलसफत जानो कि एक आँसू के बदल आठ जन्नत मिलती है। आँसू का पानी – पानी का मसल इल्म है, आले मोहम्मद के इल्म की बरकत हुसैन के तुफैल में मिलती है। दोआत मुतलकीन ने रस्म की है कि हुसैन की ज़िक्र के साथ आले मोहम्मद की और आप के इल्म की ज़िक्र हो। मुमिनीन के नुफुस की तरफ नूर पहुंचे। नया साल शुरू हो और  बरकत मिले जिस से मुमिन सिराते मुस्तकीम पर साबित रहे। दोआतो का यह एहसान है कि सामने से बुला कर, नज़दीक कर के इल्म अता फरमाते है।

“ان في خلق السموات والارض .” की आयत की माअना बयान फरमाई, जिस में आसमानों और ज़मीन की पेदाइश का ज़िक्र है। अक्लमंद लोगो को खिताब है कि खुदा की इस खिलकत में गौर और फ़िक्र करे। पैदा किया वह बातिल नहीं।

पेदाइश के बारे में कुराने मजीद में कई आयत है, जिस की ज़ाहेरी माअना में इख्तेलाफ है। एक आयत में ज़िक्र है कि ६ दिन में आसमान और ज़मीन बनाई, एक आयत में २ दिन में बनाया। दोनों आयत कुरआन में है, कुरआन में इख्तेलाफ कैसे हो? हुदात किराम इनकी माअना का खुलासा करते है। दावत के किताबों में खज़ाने भरे है, जिस में हकीकत के भेद समांए हुए है।

सैयदना अल मोअय्यद ज़िक्र करते है कि रसूलुल्लाह स.अ. ने फरमाया है कि खुदा की खिलकत में तफ़क्कुर एक साल की इबादत से खैर है। साज़वार है की माअना समझ कर इबादत करें।

खुदा ने अक्ल अता की है, ऐसी कुव्वत जो आसमान ज़मीन के बारे ख्याल करे, यहाँ रह कर वहाँ के बारे में सोचे। पेदाइश के बारे में सोचे, कि खुदा ने इसे बिना मकसद नहीं बनाया।

दुनिया के लोग पैदाइश और उत्क्रांति के बारे में अलग अलग ‘थियरी’ काइम करते है, और बाईबल में इन से अलग ज़िक्र है, जिस से उन्हें उलझन वाकेअ होती है। इन दुन्यवी थियरीओं और धारणाओं को मुकद्दम कर के खुदा में ही मानना छोड़ देते है। अपने हुदात समझाते है हक की बात, भेद की बात, जो इल्म और किसी के पास नहीं। जो हक की दावत को जवाब देता है, इल्म के लिए कोशिष करता है, उसी के लिए यह नेअमत है।

ईज़ाह वल बयान किताब में ८ व़े दाई सैयदना हुसैन फरमाते है:

खुदा ने खल्क, पैदाइश, पैदा किया, क्या वजह? यह सवाल अगर करे, तो क्या खुदा को कोई हाजत या ज़रुरत पेश आई, तो खुदा की रुबुवियत (खुदाई) पर कलाम हो जाए। अगर हाजत नहीं तो क्या खेल-खेल में? ऐसा भी तो नहीं। कोई यह कहे कि एहसान या फायदा पहुंचाने – तो कई लोग ऐसे है जो बेफ़रमानी करे और जो अज़ाब के लायक हो, तो इसमें एहसान कैसा? अगर कोई कहे कि हिकमत खातिर पैदा किया तो पैदा करके फिर मौत क्यों दे? फिर सैयदना इन सवालों का जवाब फरमाते है।

आप फरमाते है कि अरबी में खल्क यानि कोई पदार्थ हो जिसमें से नइ चीज़ पैदा करना। मगर इब्दाअ लफ्ज़ की माना यह है कि “ला मिन शेअ” बिना किसी माद्दे (पदार्थ) से पैदा करना। अल-इब्दा का आलम – सूरत नूरानियाह – खुदा ने कैसे बनाई यह जान ना मुमकिन ही नहीं। खल्क से मुराद, इस आलम की है, जो आशिर मुदब्बिर ने हय्युला और सूरत में से बनाया।

ददुसरे सवाल में इस आयत की ज़िक्र फरमाई : "تبارك الله احسن الخالقين"

इस आयत की ज़ाहेरी माअना अगर सोचे तो शिर्क हो जाए, कि कई पैदा करने वालों में से खुदा बेहतर में बेहतर है।

जवाब में फरमाते है, जिस से शिफा होती है, कि यहाँ मकसद जिस्मानी पैदाइश का नहीं है बलके दीन की पैदाइश की ज़िक्र है।

दीनी खल्क की माअना यह कि जान में हकीकत के इल्म के भेद और तसव्वुर नक्श करें। सूरत नूरानी बने जिसे हमेंशा की बका मिले

जो यह अमल करें, दुसरे इन्सान के जान को तैयार करे वह खालिक कहलाया जाए। हर रूहानी और जिस्मानी हद खालिक है। उनके दून के- बाद के साहेब के लिए खालिक है। मुमिन के खालिक माज़ून है, माज़ून के खालिक दाई है।

आहसनुल खालेकीन यानि अकले अव्वल – जो बरकात के असल है, जो दीनी तरतीब में सबसे साबिक है।

कुरआन में खुदा फरमाते है " ربكم الذي خلقكم من نفس واحدة وخلق منها زوجها" – आदम के पहले के दौर के आखरी इमाम जो आदम के बावा है – मुस्तकर इमाम है – आप दौर उस सतर के लिए आदम को मुस्तवदाअ बनाते है।

रसूलुल्लाह स.अ. की हदीस है की खुदा ने आदम को अपनी सूरत पर बनाया, ज़ाहीर की माअना यह नहीं है, तावील की माअना हमारे हुदात बयान फरमाते है

७ फसल बयान फरमाई, मुख़्तसर में

  • आदम उल कुल्ली पहले इमाम इस ज़मीन की पीठ पर
  • आदम दौर उस सतर के पहले नातिक
  • मोहम्मद – आदम उद दौर
  • अली – नातिक के वसी
  • सादिक इमाम मोजिज़ा दिखाकर पंजेतन की सूरत में ज़ाहिर होते है
  • दाई अस सतर सैयदना ताहेर सैफुद्दीन फरमाते है इमाम उज़ ज़मान के नासूत दाई है, इमाम की सूरत
  • मुमिन, खुदा के अवलिया से जो हिदायत ले, ताबे हो उनकी भी इस तरह नूरानी सूरत बन जाती है

मौएज़त के कलाम फरमाएँ, खैर के काम करे, सच्चा बोले, बुजर्गों के नेक वतीरत पर चले, फिर सूरत नुरानिया बने, अवलियाह उन्हें अपने साथ कर अपने ज़ूमरह में पहुंचाते है।

हम्द की इबारत पढ़ी, हुसैन इमाम मोहर्रमुल हराम की २ रि तारीख करबला पहुंचे यह ज़िक्र फरमाई और इमाम हुसैन की शहादत पर वाअज़ तमाम हुइ