सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) ने आशुरा के दिन मोमिनीन को खिताब करते हुए फरमाया कि ए हुसैन इमाम की मोहब्बत करने वाले मोमिनीन, खमसत अतहार की मोहब्बत करने वाले मोमिनीन, एक एक इमाम ताकि तैयेबुल अस्र और ५१, ५२, और ५३ वें दोआतों की मोहब्बत करने वाले मोमिनीन, मम्लूको आले मोहम्मद, हुसैन इमाम के दाई की मोहब्बत करने वाले मोमिनीन.

इस मोहब्बत के कारण इमाम के शीआ को जो शफाअत नसीब होती है, उस सन्दर्भ में इमाम बाकीर (स.अ.) फरमाते है कि हम तुम्हारी शफाअत करेंगे, और इमाम मंसूर फरमाते है कि यदि गुनाहों के कारण हमारे शीआ में सी किसी को आग में डाला जाएगा तो, आपने अपनी आस्तीन ऊँची कर के कहा कि, मैं यह हाथ डाल कर उसे आग से बचा लूँगा. यदि मैं यह न करू तो मैं तुम्हारा इमाम नही.

इमाम मोमिन को बिशारत देते हुए फरमाते है कि जब मोमिन के गले दम आएगा (आखिरी साँसे आएगी) तब उसे अवलिया की मोहब्बत के कारण जन्नत नसीब होगी और पंजतन जन्नत में उसके रोफका (साथी) होंगे.

जब यज़ीद खलीफा बना और लोग उसे बैअत देने जा रहे ते, तब कुछ शीआ इमाम हुसैन (स.अ.) की हज़रत में आए. उन्होंने अर्ज़ की कि हमने इरादा किया कि आप के दर पर आएँ. यह सुन कर इमाम हुसैन घर में तशरीफ ले गए और आपने २ रकअत नमाज़ पढ़ी और उनके हक मे दोआ फरमाई.

सैयदना फखरुद्दीन ने दोआ फर्माई कि जिस तरह खुदा लैलतुल कदर को अफज़ल तरीके से एहया करने की यारी अता फरमाएँ, उसी तरह खुदा तआला आशुरा का दिन अफज़ल तरीके से जिंदा करने की यारी अता फरमाएँ.

सैयदना (त.उ.श.) ने आज ७ देआमत जो ७ नोतोका पर मसल है, उन सात देआमत को इमाम हुसैन (स.अ.) की ज़िकर के साथ वसल कर के बयान फरमाया.

सब अवलिया की ज़िकर की जाती है, सब इमाम है लेकिन इमाम हुसैन (स.अ.) जैसे कोई इमाम है जिन्होंने अपनी जीव ज़ात खुदा की राह में खर्च कर दी और अव्वलीन और आखेरीन का दैन अदा कर दिया. सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) फरमाते है कि सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) ने फरमाया था कि हुसैन इमाम के साथ आपके एहले बैत भी यह दैन अदा करने में शामिल है.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने अपने शेह्ज़ादे इब्राहीम को हुसैन इमाम (स.अ.) पर फिदा किया उसकी ज़िकर सैयदना (त.उ.श.) ने फरमाई. 

सैयदना (त.उ.श.) ने दोआतों के नाम की तस्बीह का बयान फरमाया बिल खुसूस ५१, ५२ और ५३ वें दाई की ज़िकर फरमाई.

५१ वें दाई, शानात का ज़ुहूर, या, ज़ुहूर की शानात कहें तो बजा है. मौलाना अली (स.अ.) फारिसुल मिम्बरे वल मैदान, उसी तरह आपके दाई भी. आप ने अजब शान के रसाइल तसनीफ किए. सैयदना बुरहानुद्दीन (री.अ.) फरमाते है कि कुरान का फैज़ इन रसाइल में आपने समा दिया, ज़खीरा बना कर गए है.

५२ वें दाई सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) के वारिस, अजब नूर की तजल्ली आप मे थी. जब आप इमाम हुसैन की ज़िकर करते तो आँखों से आँसू रवा हो जाते. आपका एहेद गोया सुलेमान की शाही की तरह था. जलाल के साहेब थे.

उनके वारिस, सैयदना खुज़ैमा कुतबुद्दीन (री.अ.), ५३ वें दाई. ५० साल तक बुरहानुद्दीन आका (री.अ.) के माज़ून व मन्सूस रहें. २ साल का एहेद था. आपका एक दिन एक उम्र के मानिंद और आपकी उम्र एक ज़माने के मानिंद थी. यह आपकी शान थी. आप फतहे मुबीन की तमहीद कर के मलए आला की ओर तशरीफ ले गए. सैयदना (त.उ.श.) ने आप की शानात की कई ज़िकर फरमाई.

उसके बाद ज़ोहोर असर की नमाज़ हुई.