नौवीं मोहर्रमुल हराम, हसन इमाम (स.अ.) की मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) ने मोमिनीन को खिताब करते हुए फरमाया कि ए हक की दावत को जवाब देनेवाले मोमिनीन. पंजतन की मोहब्बत करने वाले मोमिनीन. हर ज़मान में पंजतन के वारिस अइम्मत बररत नस्स द्वारा काइम होते है, ताकि इक्कीसवे इमाम तैयेब इमाम (स.अ.) तशरीफ लाए. इसलिए, अब, दावत, “दावत तैयेबीया” के नाम से जानी जाती है. इस नाम में पंजतन के नाम की बरकत है.

तैयेब इमाम (स.अ.) के नाम के हुरूफ़ का अदद २१ है. “त” मौलातोना फातेमा (स.अ.) का है. “य” मौलाना अली (स.अ.) का है और “ब” नबी (स.अ.व.) का है. जो “य” पर तश्दीद है वह शबर और शुबैर का है.

मोहब्बत का बयान फरमाते हुए सैयदना (त.उ.श.) ने सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) के बैत की तिलावत फरमाई.

वज्जह्तो वजही इलैकुम आल यासीन :: वमत तखज़तो सिवा हुब्बी लकुम दीना

ए आले यासीन, आप की ओर मेरा तवज्जोह है. हमारा दीन क्या है कि आप की मोहब्बत.

इमाम बाकिर (स.अ.) और ज़ियाद बिन अल अस्वद की ज़िकर तफसीर से बयान फरमाई. ज़ियाद दूर बिलाद से इमाम की हज़रत में चलते हुए आए. उनके पाँव પર इस लम्बी सफर के कारण बहुत ज़ख्म हो गए. यह हालत देख कर इमाम की आँखों में आँसू आ गए. इमाम ने फरमाया कि “हलिद दीनो इल्लल हुब.” नहीं दीन मगर मोहब्बत -  तीन बार इमाम ने यह फरमाया.

इमाम की हज़रत में जाना, वही हकीकी हज है. ज़ाहिर में हज के मनासिक (अरकान) है और हज करने में बहुत सवाब है लेकिन उन अरकान के मम्सूल का मकाम बहुत बलंद है.

“इस्तेताअतुस सबील” हो तो हज वाजिब होती है. सैयदना (त.उ.श.) ने इसके बारे में बयान फरमाया.

इमाम हसन (स.अ.) और इमाम हुसैन (स.अ.) ने चलते हुए १५ हज की है.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) आपकी उम्मत को नवाज़ते हुए फरमाते है कि जुमोआ की नमाज़ के लिए चल कर जाना मेरी उम्मत के फोकोरा (आर्थिक रूप से कमज़ोर लोग) की हज है. जो मारेफत के साथ हज करता है उसकी हज कबूल होती है और उसके अमल का उसे सवाब होता है. नहीं तो जैसा इमाम अली ज़ैनुल आबेदीन (स.अ.) फरमाते है कि चीख पुकारने वाले बहुत है लेकिन हज करने वाले बहुत कम है. फरज़दक जो शाइर थे वह लिखते है कि यदि हजरे अस्वद को यह मालूम हो जाए कि उसे कौन बोसा देने के लिए तशरीफ ला रहे है तो वह उनके कदमों पर गिर जाएँ.

हजरे अस्वद एक वजह में दाई पर मसल है. (हजरे अस्वद की माना दाई की तरफ मुतवज्जेह है)

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने हजरे अस्वद के पास खड़े हो कर और हिन्द की तरह मुतवज्जेह हो कर फरमाया कि अजब मेरा शौक है कि में उन सब को देखूं, वे मेरे भाईं है. इस कौल में मुराद दोआत की है.

सैयदना अली बिन मौला मोहम्मद बिन अल वलीद (री.अ.) सैयदना हातिम (री.अ.) की शान में कसीदे में अर्ज़ करते है कि आप मेरे काबा है जिसकी तरफ मोमिनीन मुतवज्जेह हो कर नमाज़ पढ़ते है.

दाई की हज़रत में आना, उसमें हज का सवाब है. इस सन्दर्भ में सैयदना (त.उ.श.) ने यह ज़िकर फरमाई कि सैयदना हेबतुल्लाहिल मोअय्यद फिद्दीन (री.अ.) के घर में शादी थी. तब सैयदना अब्दुततैयेब ज़कीउद्दीन (री.अ.) ने इज़न के कागज़ में यह लिखा कि यदि इस शादी में आओगे तो ३ सवाब हासिल होंगे. १) दाई के दिल को खुश करोगे. २) सैयदना इब्राहीम वजीहुद्दीन (री.अ.) के ज़ियारत नसीब होगी. ३) दाई की हज़रत में आने से हज का सवाब हासिल होगा.

दाई के मर्तबे में काइम होने के बाद जिन दोआतों ने हज की उनकी ज़िकरें फरमाई. सैयदना अब्दुलकादिर नजमुद्दीन (री.अ.) जब हज के लिए तशरीफ ले गए, उस ज़माने में सफ़र बहुत लम्बी  और कठिन हुआ करती थी, तो आप ने सैयदी अब्देअली इमादुद्दीन (क.स.) पर नस्स फरमाई और उसके बाद हज के लिए सिधारे. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (री.अ.) ने सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) पर १७ वीं शाबान के दिन नस्स फरमाई और मोमिनीन के दरमियान माज़ून के आला मर्तबे में आप को काइम किया. उसके बाद जब सैयदना बुरहानुद्दीन (री.अ.) पहली हज के लिए सिधारे तब रात को आपने सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) को याद फरमाया और फरमाया कि भाई सब जानते है, दावत का कारोबार जानते है. मैं कह चुका हूँ कि मेरे बाद भाई को दावत के रुतबे में खिदमत करनी है.

मुखालेफीन लोग झूठ बातें करते है और “लाल किताब” बना कर बैठे है. सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) लिसाने सिद्क है.

अबुज़र, जिसकी सच्चाई पर रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने मोहोर की है, वे बैतुल्लाह के परदे पकड़ कर लोगों को खिताब करते थे कि यदि तुम लोगों ने, जिसे खुदा और खुदा के रसूल ने आगे किया है, उन्हें आगे किया होता, अर्थात मौलाना अली (स.अ.) की ताअत की होती, उन्हें दावत सौंपी होती, तो नबी (स.अ.व.) के बाद उम्मत गुमराह न होती.

जब तूफान आता है, (मुश्किल आती है) पानी का बहाव बहुत जियादा होता है तो कई लोग उसमें बह जाते है. जो सफीने में सवार होता है वह बच जाता है.

इमाम हसन (स.अ.) की मजलिस में सैयदना (त.उ.श.) ने “ज़ुर्रियतन बादोहा मिन बअद” की ज़िकर फरमाई और उसमें जिस आराबी ने एहराम की हालत में शुतुरमुर्ग के अंडे खा लिए थे उसकी ज़िकर तफसीर से फरमाई. आराबी ने कफ्फारत के बारे में सवाल किया तो छोटी उम्र होने के बावजूद हसन इमाम (स.अ.) ने शान से उसे तसल्ली बख्श जवाब फरमाया.

सैयदना (त.उ.श.) ने “इन्ना अनज़लनाहो” की सूरत की बाकी तौजीह बयान फरमाई.

दोआतुस सतर की शान बहुत बलंद है. रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने फरमाया है कि उनका मकाम फरिश्तों से भी अफज़ल है. वे बशरी कालिब में फरिश्तें है. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) ने फरमाया है कि अल्लाह के मकाम में इमाम है. दोआत को सफीनतुन नजात चलाने का फरमान किया है. दावतुल हक के धनी दोआतों को बनाया है.

सैयदना (त.उ.श.) ने दोआतों के नाम की तस्बीह की और दोआतों ने किस तरह कप्तान बन कर सफीने को तूफान के होते हुए चलाया, दावत किस तरह संभाली, किस तरह तावील और हकीकत की किताबें लिख कर इमामुज़ ज़मान के फैज़ की बरकत सतर के ज़माने में मोमिनीन की ओर पहुँचाई, और किस तरह आज तक पहुँचा रहे है, उसकी तफसीर से ज़िकर फरमाई.

सैयदना (त.उ.श.) ने मौएज़त करते हुए फरमाया कि दुनिया की ज़िन्दगी किस तरह बितानी चाहिए. रसुलुल्लाह (स.अ.व.) जंग से लौट रहे थे. आपने सब को फरमाया कि लकड़ियाँ जमा करे. सहरा में लकड़ी मिलना मुश्किल लेकिन सब ने छोटी छोटी लकड़ियाँ जमा की. लकड़ियों का एक बड़ा ढेर बन गया. फिर रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने फरमाया कि इस तरह हसनत जमा होती है और इस तरह सैयेअत जमा होती है. खुदा की खुशी हासिल करने की कोशिश करों. साल शुरू होता है हुसैन इमाम (स.अ.) की ज़िकर से और उसकी सआदत ज़ियादा होती जाती है.

सैयदना (त.उ.श.) ने फरमाया कि तुम हुसैन पर आँसू बहाओगे तो मैं इमामुज़ ज़मान को अर्ज़ करूँगा. मैं तुम्हारी जन्नत का ज़ामिन हूँ. आप मौला ने बहुत दुआएँ फरमा कर मोमिनीन को नवाज़ा.

उसके बाद हम्द सलवात पढ़ी और इमाम हुसैन (स.अ.) के शहादत पढ़ी और इमाम हसन (स.अ.) की शहादत पर वाअज़ तमाम फरमाई.