सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) ने आठवीं मोहर्रमुल हराम को मौलाना अली इब्न अबी तालिब (स.अ.) की मजलिस में मुमेनीन को खिताब फरमाया कि, ए अलीए आला, आकाए दो जहान, मुश्किल कुशा के शीआ खोलोसा. हर वक्त हर घडी में या अली! या अली! या अली! निदा देनेवाले मुमिनीन !

आपने इस बैत की तिलावत की, इज़ा नादैता मौलाना अलिय्यन अगासक फिल मोहिम्मातिस सिआबी. और इज़ा नादैतहू मुस्तहदियन फिल उमूरे हदाक मिन्हाजस सवाबी.

जब मुश्किल अमर पेश आए और निर्णय लेना मुश्किल हो तो इस बैत की तिलावत करने से सही निर्णय वाज़ेह हो जाता है. मुश्किल आए तो इस बैत की तिलावत करनी चाहिए. कितने भी गुनाह क्यों न हो, मौलाना अली (स.अ.) के गुलामों को आखेरत के बारे में कोई फिकर नहीं है. उसके नसीब में जन्नत है.

बनू रीयाह के गुलाम की ज़िकर फरमाई. मौलाना अली की वलायत के कारण उसकी जो करामत ज़ाहिर हुई कि मलाइकत के ७० कबीले, हर कबीले में ७०००० फरिश्तें, वे खुदा के फरमान से आसमान से उतरे और रसुलुल्लाह के साथ गुलाम के जनाज़े पर नमाज़ पढ़ी.

सैयदनल काज़िन नोमान ने फरमाया है कि अली (स.अ.) की वलायत उसके ही दिल में उतरती होती है जिसे खुदा तौफीक अता करे.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने फरमाया है कि आप और मैं ए भाई अली एक तीनत (मिट्टी) से पैदा हुए है और उसमें जो हिस्सा बाक़ी रह गया उसमें से तमाम शीआ पैदा हुए है.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने मौलाना अली (स.अ.) को “अबू तुराब” के नाम से खिताब किया. सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) ने अमीरुल मुमेनीन (स.अ.) की मारेफत कराते हुए फरमाया है कि यदि हम उनके क़दम की खाक भी हो तो भी हमारे नसीब की बलंदी आसमान पर है. 

सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (री.अ.) को नजफ में अमीरुल मुमेनीन (स.अ.) की ज़रीह में दाखिली नसीब हुई.  सैयदना बुरहानुद्दीन का आप पर लुत्फे खाफी था तो आपने कुतबुद्दीन मौला (री.अ.) को फरमान किया कि आपके पास ही ठहरे और आप के साथ ज़रीह मे दाखिली करें. वहाँ जो खादिम थे उन्होंने सैयदना बुरहानुद्दीन को अर्ज़ की कि ज़रीह में से आपको जो हीरे जवाहेरात रक्म लेने हो आप ले सकते है. अबू तुराब के दाई ने फरमाया कि मुझे सिर्फ तुराब चाहिए, खाके शिफा चाहिए.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने फरमाया है कि शीअतो अलीयुन हुमुल फाएज़ून, अली के शिआ जीत परामनार है. शीआ खोलोसा का यह अकीदा है कि मौलाना अली (स.अ.) के वारिस इमाम हर ज़मान में मौजूद है और सतर में मौलाना अली (स.अ.व.) के दाई हर ज़मान में हाज़िर है. दोआत के नाम किताबुल इल्म में लिखे हुए है.

सैयदना अब्दुलकादिर नजमुद्दीन (री.अ.) के ज़माने में एक शीआ शख्स ने अली की शान मे कसीदा लिखा. उसके सपने में अमीरुल मुमेनीन (स.अ.) पधारे. मौलाना अली (स.अ.) ने फरमाया कि हमारे दाई अब्दुलकादिर नजमुद्दीन कबूल करेंगे तो मैं यह कसीदा कबूल करूँगा. मौलाना अली (स.अ.) के दाई की मोहब्बत से इमाम की और मौलाना अली (स.अ.) की मोहब्बत कबूल है.

सैयदना (त.उ.श.) हर मजलिस में सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) को खूब वलवले के साथ याद करते है. आप की नज़रात, आप के बयान, आप के सबक, आप की शफकत बहुत याद आती है. आप की सीरत थी कि आप खुदा की बंदगी में ज़िन्दगी गुज़ारते, और बहुत दुआएँ फरमाते. आप की कुदसी ज़ात, नूरानी चेहरा बहुत याद आता है. आप की ज़िकर से दिल को सुकून और इत्मेनान होता है.

सैयदना (त.उ.श.) ने “अली” के नाम की तौजीह बयान फरमाई. “अली” के नाम में जो हर्फ़ है उनके अदद ११० है.

अ – आप ऐनुल्लाहिल अज़ीमा. आँख जो सब देखती है. हर चीज़ पर आगाह है. सैयदना (त.उ.श.) ने मौलाना अली (स.अ.) ने जाबिर को नूर मे चलकर रसुलुल्लाह (स.अ.व.) की ज़ियारत कराने के लिए जो मोजिज़ा ज़ाहिर किया उसकी ज़िकर फरमाई. 

ल – लिसाने सिद्क, सच्चाई की ज़ुबान. सादेकीन कौन है कि जिस के अन्दर नस्स का रूह है. सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) पचास वर्ष तक सैयदना बुरहानुद्दीन के माज़ून थे. जो माज़ून यह कहते है कि मुझ पर नस्स हुई है तो यह शहादत सच्ची है क्योंकि शहादत जो चीज़ हुई हो उस के बारे में होती है. जो बात नहीं बनी हो उस पर शहादत  नहीं गुज़ारी जाती, इस तरह शहादत नहीं होती.

सैयदना (त.उ.श.) ने मौलना अली (स.अ.) के इल्म की शान के बारें में ज़िकर फरमाई. मौलाना अली (स.अ.) ने फरमाया है कि “सलूनी अम्मा दूनल अर्श” अर्श के दून (नीचे) जो पूछना हो पूछो. सैयदना (त.उ.श.) ने जोश से फरमाया कि क्या किसी आम इंसान मे यह ताकत है जो ऐसा कह सके.

अब्दुल्लाह बिन अब्बास जो अल्लामा थे (इल्म में आला दर्जा था), आप को जब किसीने पुछा कि अमीरुल मुमेनीन और आपके इल्म में कितना फांसला है तो फरमाया कि समंदर और समंदर में से एक चिड़िया अपनी चोंच मे जितना पानी पी सके उतना है.

अमीरुल मुमेनीन (स.अ.) ने कुमैल बिन ज़ियाद को इल्म के बारे में जो इरशादात फरमाएँ कि इल्म दुन्यवी दौलत से अफज़ल है उसकी तफसीर से ज़िकर सैयदना फखरुद्दीन ने फरमाई.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने फरमाया कि इल्म तलब करना हर मुस्लिम और मुस्लिमा पर फरीज़त है. सैयदना (त.उ.श.) ने इल्म हासिल करने के लिए बहुत रगबत दिलाई. आपने फरमाया कि दुनिया का इल्म हासिल करना अच्छी बात है लेकिन आले मोहम्मद का इल्म हासिल करने से आखेरत में दरजात बलंद होते है. मुफीदे हक (सच्चे मुफीद) से इल्म ले. इल्म तलब करने में इज्तिहाद (मेहनत) करे, कोशिश करे. इल्म पढने के लिए वक्त निकाले. जो इल्म हासिल किया उसके मुताबिक अमल भी करे.

सैयदनल मोअय्यदुश शीराज़ी (री.अ.) इमाम मुस्तंसिर (अ.स.) के बाबुल अबवाब है. आप के इल्म की कई ज़िकरें आई है. आपनें ८०० मजालिस पढ़ी है. आज तक आप के इल्म की बरकात दावत में जारिया है. दावत की गादी इल्म पर है दुनिया के महलों में नहीँ. सतर के दोआत के तरफ सैयदनल मोअय्यद के इल्म की सवारी पहुंची है.

मिन दोआतिन कद अय्यदतहुम सवारी बरकातिल मोअय्यादिश शीराज़ी

मोअय्यदे असगर, सैयदना अब्देअली सैफुद्दीन (री.अ.) का इल्म में बहुत आला दरजा है. आप ने दरसे सैफी बनाई. आप के वारिस सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) मोअय्यद की मिसल कसाइद, रसाइल और वाअज़ में तौजीहात बयान फरमाई.

य – यदुल्लाह. अली खुदा के हाथ है. सैयदना (त.उ.श.) ने खैबर की जंग की तफसीर से ज़िकर फरमाई. जिसमे अमीरुल मुमिनीन ने एक हाथ से खैबर के किले के दरवाज़े को उखाड़ लिया और उसकी ढाल बना कर ज़ुल्फ़िकार से मरहब के गो टुकड़े कर दिये।

सैयदना (त.उ.श.) ने “इन्ना अनज़लनाहो” की तौजीह का बाकी बयान फरमाया.

सैयदना (त.उ.श.) हर वाअज़ में मौएज़त (नसीहत) का बयान फरमाते है. आपने फरमाया कि अकलमन्द कौन है कि जो अपनी ज़िन्दगी में वह नसीहतें अपनाएँ. उस पर अमल करे. हिदायत के नूर से इक्तिबास करे (हासिल करे) बरकत ले. मुमिन अपनी बाकी उम्र में इल्म पढ़ें, इबादत करे और आखेरत की तैयारी करे, नयी शुरुआत करे.

हम्द सलवात के बाद आप मौला ने हुसैन इमाम की शहादत अरबी ज़बान में पढ़कर यमन के मुमेनीन को खिताब फरमाया और उसके बाद अमीरुल मुमेनीन की शहादत अजब दर्दनाक तारीके से और वलवले से पढ़कर वाअज़ तमाम फरमाई.