अल-दाई अल-फातेमी सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) ने मौलातोना फातेमतुज़ ज़हरा की मजलिस में मुमेनीन को खिताब करते हुए फरमाया कि, “ए फातेमतुज़ ज़हरा की मोहब्बत में इखलास करने वाले मुमेनीन.” आप मौला ने पंजतन के बलंद मकाम की मारेफत कराई जिस पंजतन के वसीले से आदम नबी (अ.स.) की तौबा कबूल हुई है.

आपने फरमाया कि मौलाना अली और मौलातोना फातेमा की नसल में कयामत के दिन तक इमामत का सिलसिला जारी रहेगा. अइम्मत “अइम्मत फातेमियीन” के नाम से जाने जाते हैं और सतर के ज़मान में दाई को “अल-दाई अल-फातेमी” और दावत को “फातेमी दावत” कहा जाता है. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) फरमाते हैं कि, “यह अइम्मत फातेमियीन किस शान के अइम्मत है कि उनके इल्म की नहर वह हकीकतन नील नदी है और उनकी दावत मिसर है.”

इमामुज़ ज़मान ज़मीन की पीठ पर हाज़िर है मौजूद है और इसलिए ज़मीन को आसमान पर फखर है.

सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) के ज़मान के आखिर में सैयदना कुतबुद्दीन (री.अ.) ने रासुल हुसैन की ज़रीह को इराक से मिसर लाने के लिए बहुत साए फरमाई (मेहनत की). सियासी मुश्किलात के बावजूद आप मौला ने यह अज़ीम खिदमत अज़म और नशात से अदा की. जब माथेरान में सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) की हज़रत में ज़रीह की तस्वीरें पेश हुई तब आप बहुत खुश हुए और आपने फरमाया कि, “हदिया अपने महल तक पहुँच गया”, और आपने इफ्तेताह के लिए मिसर जाने का इरादा फरमाया. लेकिन आप मौला वफात हो गए और आप के वारिस सैयदना बुरहानुद्दीन (री.अ.) ज़रीह के इफ्तेताह के लिए मिसर तशरीफ ले गए. उस सफ़र के लिए भी कुतबुद्दीन मौला (री.अ.) ने बहुत साए (मेहनत) फरमाई. यह अज़ीम खिदमत जो आपने अज़म और नशात के साथ अदा की उसकी ज़िकर सैयदना (त.उ.श.) ने तफसीर से फरमाई.

सैयदना हेबतुल्लाहिल मोअय्यद फिद्दीन (री.अ.) के ज़माने में मजदू ने जो फित्नत की उस वक्त आपके माज़ून सैयदना अब्दुत तैयिब ज़कीउद्दीन (री.अ.) ने आप की हज़रत में अर्ज़ की कि अगर इमाम खुद भी आ कर फरमाएं कि मैं इमाम हूँ, तो हम अर्ज़ करेंगे कि आपके दाई सैयदना हेबतुल्लाह उज्जेन में मौजूद है. वह हमें फरमाएंगे कि आप इमाम है तो हम आपको सजदा करेंगे.

सैयदना (त.उ.श.) ने मौलातोना फातेमा (स.अ.) के फज़ाइल बयान फरमाएँ.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने मौलातोना फातेमा के आला मकाम के बारे में फरमाया है कि, फातेमा आपके कलेजे का हिस्सा है, फातेमा पर आपका जान कुरबान है, फातेमा सय्यिदतो निसाइल आलमीन है, फातेमा से जन्नत की खुशबू महकती है.

मौलाना अली (स.अ.) और मौलातोना फातेमा की शादी की ज़िकर में फरमाया कि रसुलुल्लाह ने मौलाना अली और मौलातोना फातेमा की शादी की, उसके पहले खुदा ने आसमान में उनकी शादी की. तब तूबा के दरख़्त पर जो सिकाक (चिट्ठियां) आए उन पर कयामत तक जो मुमेनीन आएँगे उनका नाम लिख दिया गया, मुमेनीन के लिए ये जन्नत कि परवानगी है.  

फिर मौलातोना फातेमा की शान में फरमाया कि आपके घर में मलाइकत खिदमत बजाते थे. आपके घर की झाड़ू जिब्रईल करते थे. इस ज़िकर के साथ सैयदना ने यह वसल किया (जोड़कर बयान किया) कि मौलातोना हुर्रतुल मलेका को यह सपना हुआ कि आप इमाम के कसर (महल) की झाड़ू कर रही है. इमाम के फरमान से आपने दोआत मुत्लकीन का सिलसिला जारी किया.

मौलातोना फातेमा की चादर का नूर देखकर यहूद का कबीला इस्लाम ले आया. आज भी वह नूर आलम में चमक रहा है. जो शख्स अपने मन कि आँख और कान खोलकर हक्क की बात मानेगा उसे ये नूर नसीब होगा.

रसुलुल्लाह ने फरमाया है कि “तूबा लेमन रआनी, तूबा लेमन रआ मन रआनी, तूबा लेमन रआ मन रआ मन रआनी.” तूबा उस शख्स के लिए है जिसने मुझे देखा, उस शख्स के लिए जिसने, जिसने मुझे देखनेवाले को देखा, और तूबा उस शख्स के लिए है जिसने, उसे देखा जिसने उसे देखा जिसने मुझे देखा. तूबा लेमन रआनी (जिसने मुझे देखा) की मुराद किस की है कि जिसने रसुलुल्लाह को बसीरत से (मारेफत से) देखा. वह कौन साहेब है कि अमीरुल मुमेनीन. उसी तरह तूबा लेमन रआ मन रआनी (जिसने उसे देखा जिसने मुझे देखा) की मुराद अइम्मत की है और तूबा लेमन रआ मन रआ मन रआनी (जिसने उसे देखा जिसने उसे देखा जिसने मुझे देखा) की मुराद दोआत की है.

सैयदना (त.उ.श.) ने इन्ना अनज़लनाहो की सूरत की तौजीह (वुजूहात) बयान फरमाई. यह बयान सैयदनल काज़िन नोमान (री.अ.) ने फरमाया है और उसमें सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) ने भी बयान फरमाया है.

इन्ना अनज़लनाहो की सूरत में ३० कलेमात है. आप मौला ने इन कलेमात को अइम्मत पर वसल कर के बयान फरमाया और इस तौजीह के साथ मौएज़त (नसीहत) फर्माई.

सैयदना (त.उ.श.) ने रोज़गार के बारे में कई हिदायतें फरमाई और इमाम बाकिर (अ.स.) की रिवायत बयान फरमाई. इमाम बाकिर खेती कर रहे थे. एक शख्स ने आ कर आप से पूछा कि आप क्यों दुनिया के लिए इतनी मेहनत कर रहे है? आप ने उसे जवाब फरमाया कि यदि मैं मेरे अहलो अयाल (परिवार) के खातिर रोज़गार तलब करूँ तो वह खुदा की बंदगी है. रोज़गार तलब करने में खुदा की राह में जिहाद करने के बराबर सवाब है. रोज़गार तलब कर के जो आमदनी होती है उसके ३ हिस्से करने चाहिए. १) अपने परिवार के लिए खर्च करना चाहिए. २) भविष्य के लिए पूँजी संभाल कर रखनी चाहिए. ३) अच्छे कामो में खर्च करना चाहिए.

सैयदना (त.उ.श.) ने मौएज़त फरमाई कि दुनिया हमेशा के लिए नहीं है. दुनिया को अपना मकसद न बनाएँ. मुमिन के लिए दुनिया कैद खाना है और दूसरों के लिए जन्नत है. दुनिया साँप जैसी है. हाथ लगाए तो वह मुलायम है लेकिन उसमें ज़हर भरा हुआ है. मौलाना अली फरमाते है कि दुनिया किसी को भी वफ़ा नहीं करती. दुनिया कैसी है कि, प्यासे को ठंडा पानी मिले और जब वह पानी होठों तक आये तब उसमें कचरा गिर जाए. मौलाना अली ने दुनिया को ३ तलाक दी है. आप ने अपनी सारी दौलत मुस्लेमीन को इफ्तार कराने में खर्च कर दी. दीन को दुनिया पर मुकद्दम करे. दुनिया में जो नसीब में है वह मिलेगा. खुदा राज़िक है (रिज़्क बख्शने वाले है).

हम्द सलवात के बाद आप मौला ने मौलाना अब्दुल्लाह (अ.स.) और मौलातोना सकीना (अ.स.) की शादी की ज़िकर फरमाई और मौलाना अब्दुल्लाह की पुर दर्द शहादत बयान की. उसके बाद आप मौला ने इमाम हुसैन (स.अ.) की शहादत पढ़ी और मौलातोना फातेमा (स.अ.) की शहादत पर वाअज़ तमाम फरमाई.