५ मोहर्रमुल हराम को सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) ने मूसा (अ.स.) की ज़िकर बयान फरमाई. मूसा (अ.स.) ने खुदा को अर्ज़ की, कि ए अल्लाह मैं तौरात में एक उम्मत की ज़िकर देखता हूँ. उनके फज़ाइल इतने जियादा है कि नज़दीक है कि वह अंबिया हो जाए. मूसा ने खुदा को अर्ज़ की, कि ए अल्लाह तू उन्हें मेरी उम्मत में से करना. तो खुदा ने फरमाया कि वह अहमद की उम्मत है. मूसा ने शौक किया कि ए खुदा तू मुझे उस उम्मत में से करना. खुदा ने जवाब दिया कि तुम वह उम्मत में से ही हो और इस्लाम के दीन पर हो. उम्मत से मुराद दोआत मुत्लकीन  की है जिनके फज़ाइल खुदा ने तौरात में बयान किए है.

सैयदना (त.उ.श.) ने फरमाया कि इमामुज़ ज़मान कुराने कुल (पूरे कुरान) है और दोआत कुरान की सूरतें है.

सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) फरमाते है कि तौरात, इंजील और कुरान इमाम की शान में नाज़िल किए गए है (खुदा द्वारा उतारे गए है) और लोगों को इमाम की मारेफत (पहचान) दोआत कराते है.

रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने गदीर के दिन मौलाना अली (स.अ.) पर नस्स फरमाई, उस खुतबे में आपने फरमाया कि में तुम्हारे दरमियान २ भारी चीज़ रखकर जा रहा हूँ, किताबुल्लाह और मेरी इतरत. जो कयामत के दिन मुझे कौसर पर आ मिलेंगे. उनसे तमस्सुक करोगे (उनसे जुड़े रहोगे) तो कभी भी गुमराह नहीं होंगे.

कुरान अदा करता है कि यदि तुम्हें कुछ समझ न आए तो “अह्लुज़ ज़िकर” से पूछो. अह्लुज़ ज़िकर से मुराद अइम्मत ताहेरीन की है और सतर में दोआत मुत्लकीन अह्लुज़ ज़िकर है.

कुरान की तिलावत करने की माना (अर्थ) इमाम की वलायत है. सैयदना (त.उ.श.) ने कुरान की तिलावत करने की ओर रगबत दिलाई (शौक दिलाया). आपने फरमाया कि कुरान नूर है. रसुलुल्लाह (स.अ.व) ने अरबी ज़बान (भाषा) में यह फैज़ व नूर को मुमेनीन की ओर पोह्न्चाया. तंज़ील (कुरान का ज़ाहिर) आपका मोजिज़ा है और तावील (कुरान की छुपी हुई माना) अली (स.अ.) और अइम्मत (स.अ.) का मोजिज़ा है.

इमाम सादिक (स.अ.) से जो ज़िकर है कि मोमिन को मौत के वक्त क्या करामत है वह ज़िकर सैयदना (त.उ.श.) ने फरमाई.

सैयदना (त.उ.श.) ने मूसा नबी की असा (दांग) की पांच फसल (वुजूहात) बयान फरमाई.

मूसा नबी (अ.स.) की तरबियत आपके दुश्मन फिरऔन के घर में होती है. “वल्लाहो गालिबुन अला अम्रेही वलाकिन्न अक्सरन नासे ला यालमून” खुदा अपने अमर पर गालिब है लेकिन अक्सर लोग यह जानते नहीं. कुरान में अंबिया के किस्सों की ज़िकर है और उसमें अकलमंद शख्स के लिए इबरत (सबक) है. रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने फरमाया है कि जो उम्मतें हुई उनके नक्शेकदम तुम भी चलोगे. मूसा नबी ने सत्तर हज़ार लोगों के दरमियान हारून पर नस्स फरमाई और फरमाया कि मैं वापस आऊंगा फिर भी लोग गुमराह हो गए और सामेरी और इजिल को मानने लगे. इसी तरह रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने मौलाना अली (स.अ.) पर सत्तर हज़ार मुस्लेमीन के दरमियान नस्स फरमाई.

सैयदना फखरुद्दीन ने दांग के ७ किस्सों का ज़ाहिर बयान किया और उनकी खास माना बयान फरमाई. जैसे, मूसा नबी ने पत्थर पर दांग मारी तो पानी के १२ चश्मे जारी हुए, फिरऔन के दरवाज़े पर आपने दांग मारी तो दरवाज़ा खुल गया, फिरऔन के दरबार में जादूगरों के सामने आपने अपनी दांग डाली तो वह अज़दहा (बड़ा साँप) बन गई और जादूगरों के साँपों को निगल गई, मूसा नबी बनु इसराईल को लेकर मिसर से निकले और बीच में समुद्र आया और फिरऔन का लश्कर आपका पीछा कर रहा था तो आपने समुद्र में दांग मारी और समुद्र के २ हिस्से हो गए.  

अमीरुल मुमेनीन की नसीहत बयान की कि नेअमत तुम्हारे पास आए तो बराबर शुकुर अदा न करके उसे दूर मत कर दो. उसके मुतअल्लिक अबरस (जिसकी त्वचा में रोग हो), आअमा (जिसे दिखाई न देता हो) और अक्रा (जिसके सर पर बाल न हो) की रिवायत बयान फरमाई.

दुसरे वजह में सुलेमान की असा (दांग) की ज़ाहिर ज़िकर व उसकी तावील बयान फरमाई.

सैयदना अब्देअली सैफुद्दीन (री.अ.) के ज़माने में जिस वक्त आपके मन्सूस का इन्तिकाल हो गया तब मुनाफेकीन कहने लगे कि अब कौन है जिसे मन्सूस बनाएंगे? आपने फरमाया कि इमामुज़ ज़मान मुझसे बेखबर नहीं है. वह मुझे इल्हाम करेंगे. आपने अपने मन्सूस को दावत के रुतबे के लिए किस तरह तैयार किया, इल्म, अदब सियासत ताकि चलना भी सिखाया यह ज़िकर सैयदना ने तफसीर से फरमाई. जब सैयदना अब्देअली सैफुद्दीन (री.अ.) का इन्तिकाल हुआ तो सैयदना मोहम्मद इज्ज़ुद्दीन (री.अ.) आपके जनाज़े में अज़मत के खातिर खुले पाँव चल कर पधारे.

सैयदना अब्देअली सैफुद्दीन (री.अ.) ने सैयदना मोहम्मद इज्ज़ुद्दीन (री.अ.) को मख्फी में दाई के मर्तबे के लिए तैयार किया. सैयदना (त.उ.श.) ने इस ज़िकर के साथ यह भी ज़िकर फरमाई कि सुलेमान नबी ने आपके वारिस पर, काइम इमाम (स.अ.) ने मंसूर इमाम पर, सातवें दाई सैयदना एहमद ने आठवें दाई सैयदना हुसैन पर, और सैयदना बुरहानुद्दीन (री.अ.) ने सैयदना कुत्बुद्दीन (री.अ.) पर कई हिकमतों के कारण बिना किसी को शाहिद रखे मख्फी में नस्स फरमाई.

सैयदना फखरुद्दीन (त.उ.श.) ने फरमाया कि दाई अल-सतर इमाम की दांग है. इमाम के इल्हाम से सब अमल करते है. इमाम के फैज़ (ताईद) पर दाई का एतेमाद है (पूरा भरोसा है). दाई मुमेनीन को लेकर इमाम की तरफ पोहंच जाएँगे.

नौजवान बच्चे उनके माँ बाप की दांग है. माँ बाप ने तरबीयत की (पाला पोसा) तो बच्चे बड़े हुए, अब वे माँ बाप को भूल न जाए. माँ बाप को बुढापा आएँ तो बच्चों को उनका सहारा बनना चाहिए. माँ बाप को नर्सिंग होम में न रख दे. बच्चों को माँ बाप की खिदमत करनी चाहिए.

सैयदना (त.उ.श.) ने मुमेनीन के लिए अजब वलवले से दोआ फरमाई. हम्द और सलवात के बाद आपने हुसैन इमाम के फरजंद अली अकबर की पुर गम शहादत पढ़ी और इमाम हुसैन की शहादत पर वाअज़ तमाम फरमाई.