मुमेनीन इस मुबारक मौके पर बरकात ले और इस तरह अमल करे:

  • मुमेनीन सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) का तसनीफ किया गया कसीदा मुबारका “बनुल मुस्तफल गुर्रुल किरामो मवालीना” की तिलावत करे. इस कसीदे में आप बुरहानुद्दीन मौला (री.अ.) की शानात की ज़िकर फरमाते है.
  • मुमेनीन सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (री.अ.) का तसनीफ किया गया कसीदा मुबारका “या आल ताहर रिदा अन्वारोकुम लामेआ” की तिलावत करे. यह कसीदा आपने ईद-उल- फित्र के अवसर पर १४११ ही. में तसनीफ फरमाया है.
  • सैयदना खुज़ैमां कुत्बुद्दीन (री.अ.) ने जो मदेह सैयदना बुरहानुद्दीन की शान में तसनीफ फरमाई है उसकी तिलावत करे. यह मदेह आपने सैयदना बुरहानुद्दीन की तख्ते नशीनी के मुबारक मौके पर तसनीफ फरमाई थी. शबाबुल इदिज़ ज़हबी की ज़ियाफ़त के मौके पर, सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (री.अ.) की हज़रत मे इस मदेह की तिलावत की गई थी.
  • सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (री.अ.) आका की शान में आपके वारिस सैयदना कुत्बुद्दीन (री.अ.) की शेहज़ादी याकूततो दावतिल हक शेहज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाईसाहेबा की लिखी हुई इस मदेह की तिलावत करे.

मुमेनीन सिजिल्ल १५३ में छपा– “सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (री.अ.) का मीलाद – खुदा के नूर व बुरहान” पढ़ सकते है.