५१ व़े दाई के मिलाद के मुबारक मौके पर मुमिनीन इस तरह अमल करें:

  • सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. ने इमाम उज़ ज़मान की शान में कसीदा मुबारका "يا أيها الطيب والطاهر" की तिलावत करें
  • सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि.अ. ने सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. की शान में सन १३५२ हि में लिखे कसीदा मुबारका "نور محياك يا سيف الهدى لامع" की तिलावत करें
  • सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. ने दावत की ज़बान में लिखे सलाम "اے سيف دين سرور هزارو سلام" की तिलावत करें
  • मुमिनीन सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के नाम मुबारक की तस्बीह करें
  • मुमिनीन याकूततो दावतिल हक़ शेहज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाईसाहेबा की मदेह "मसर्रत मा दीन नु झूमे चमन" पढ़े जो आपने सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. के मीलाद के अवसर पर लिखी थी। 

सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. दावत के अर्श पर ५३ साल तक रहे, और उस अरसे में आप ने दावत के परचम को आसमान में लहरा दिया। आले मोहम्मद के इल्म में आप का मकाम यकता है। आप ने ४० से भी ज़्यादा रिसालत शरीफा तसनीफ फरमाई है, अरबी में दस हज़ार से भी ज़्यादा अब्यात लिखी, हज़ारों सबक पढाये, वाअज़ और बयान फरमाए, आप मुमिनीन पर अजब शफ़कत रखते थे, हर एक का ख्याल रखते थे, बैठकों में एक एक मुमिन के साथ वक्त निकालते थे, देर रात तक, मुमिनीन जहां कही बसते हो वहाँ आप तशरीफ़ ले गए – हिंदुस्तान और तमाम आलम में आप ने सफर की, ऐसी जगहो पर भी तशरीफ़ ले गए जहां सिर्फ बैल गाड़ी से ही पहुंचा जा सकता था, दूर दराज़ शहरों में महीनो तक तशरीफ़ रखते थे, आप ने अजब शान से दावत का निज़ाम मज़बूत किया, आप की अज़ीम कोशिशों के सबब, दावत का आलाम बलंद हुआ, और साथ में उम्मते इस्लाम की भी इज्ज़त ज़्यादा हुइ, इबादुल्लाह को भी आप से बहुत फायदा पहुंचा।

जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने सैयदना ताहेर सैफुद्दीन को चान्सेलरशिप का पद स्वीकारने के लिए अर्ज़ की, उस वक्त यूनिवर्सिटी के वाईस चान्सेलर डोक्टर ज़ाकिर हुसैन ने मौलानल मुक़द्दस का तार्रुफ़ करवाया, डॉ. ज़ाकिर हुसैन ने अपनी तक़रीर में कहा कि “अब तक इस यूनिवर्सिटी के जो भी चान्सेलर रहे, उन सभी का खुद का सिक्का था” (उस वक्त तक चान्सेलर के पद पर नवाब रहे थे, जिन के खुद के नाम का या अपनी रियासत का सिक्का चलन में था, यह माअना रखते कहा) फिर आगे उन्होने कहा की “सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के पास कोई सिक्का नहीं है”, तो सामयीन में सन्नाटा छा गया, तब डॉ. ज़ाकिर हुसैन ने कहा कि “इनका सिक्का तो तमाम मुसलमानों के दिलो पर है”। कुछ समय के बाद डॉ. ज़ाकिर हुसैन हिंदुस्तान के उप-राष्ट्रपति बने और फिर राष्ट्रपति के पद पर पहुंचे।