रसुलुल्लाह स.अ. ने शाबान में एक खुत्बा पढ़ा जिसमें आपने फ़रमाया कि शेहरूल्लाह का  तीसरा दस्का इत्कुन मिनन्नार (जहन्नम की आग से आज़ादी)  का दस्का है. इन १० दिनों में मुमिनीन इस तरह से अमल करके सवाब का ज़खीरा करे.

१. नमाज़: ५ फरीज़त की नमाज़ सुन्नत और नाफेलत के साथ वक़्त पर अदा करे. रसुलुल्लाह स.अ. ने फ़रमाया है कि शेहरूल्लाहिल मोअज़्ज़म में एक फरीज़त की नमाज़ पढ़ने का सवाब बाकी महीनों में फरीज़त की ७० नमाज़ पढ़ने के बराबर है. शेहरूल्लाहिल मोअज़्ज़म में सुन्नत पढ़ने का सवाब बाकी महीनों में फरीज़त पढ़ने के सवाब के बराबर है.

फजर की  सुन्नत: फ़रज़ के पहले १ सलाम, ज़ोहोर की सुन्नत: फ़रज़ के पहले ३ सलाम, ज़ोहोर की नाफेलत: फ़रज़ के बाद २ सलाम, असर की सुन्नत: फ़रज़ के पहले २ सलाम, मगरिब की सुन्नत - फ़रज़ के बाद ३ सलाम और दफइल आफात का १ सलाम, ईशा की सुन्नत: फ़रज़ के पहले २ सलाम और ईशा की नाफेलत: फ़रज़ के बाद २ सलाम.

२. दुआ: हर फ़रज़ के बाद “अल्लाहुम्मा हाज़ा शहरो रमज़ान” की दुआ पढ़े. फजर की नमाज़ बाद इमाम अली ज़ैनुल आबेदीन (स.अ.) की दुआ पढ़े. ज़ोहोर के नाफेलत के बाद सैयदनल मोअय्यदुश शीराज़ी की दुआ पढ़े. मगरिब की नमाज़ के बाद, इफ्तार करने से पहले, “अल्लाहुम्मा या मोअतियस सुवालात” की दुआ पढ़े.

  • तीस वी तारीख (३०) ज़ोहोर की नाफेलत के बाद इस दुआ के बजाय शेहरूल्लाहिल मोअज़्ज़म के विदा की दुआ पढ़ें. सैयदना ताहेर फखरुद्दीन ने तिलावत की हुइ इस दुआ की रिकॉर्डिंग सुनने के लिए नीचे क्लिक करे.

३. कुराने मजीद: हर दिन कुराने मजीद में से कम से कम एक सिपारा पढ़े ताकि महीने में एक कुरान खतम हो सके. कुछ अल्लाह के मुख्लिस बन्दे रमज़ान में हर रोज़ एक क़ुरान खतम करते है. जो क़ुरान सरलता से न पढ़ सकता हो वह बहुत सी वेबसाइट जहाँ पूरे क़ुरआन की ऑडियो मिलती है वहाँ ऑडियो सुनकर उसके साथ तिलावत करे. जिन्हें अरबी पढ़ना न आता हो वे वैसे क़ुरान पढ़े जिसके हुरूफ़/अलफ़ाज़ अंग्रेजी व दूसरी भाषाओं में लिखे हो जहाँ तक वे अरबी पढ़ना सीख ले.

४. बिहोरी : जितन इम्कान हो सके उतनी बिहोरी पढ़े. बिहोरी का तफ़्सीर से अमल व ज़िकर और तर्जुमा व ऑडियो वेबसाइट पर है.


६ लैलतुल कदर में अमल:

लैलतुल कदर का फज़ल हज़ार महीनो से ज़ियादा है. इसलिए मुमिनीन इस रात के एक एक पल की गनीमत ले. तमाम रात खुदा की इबादत और बंदगी में गुज़ारे. मगरिब के वक्त से लगाकर सूरज निकलने तक, मुमिनीन तमाम रात जाग कर नमाज़, दुआ, कुराने मजीद की तिलावत और तस्बीह करने में गुज़ारें. नमाज़ खशियत और लोह लगाकर पढ़े. फ़रज़न्दों को भी फजर तक जगाएं. छोटे बच्चों को नमाज़ पढ़ना और दुआ पढ़ना न आता हो तो उन्हें मौलातोना फ़ातेमा की तस्बीह कराएँ और लैलतुल कदर के दिन में उन्हें भी रोज़ा कराएँ.   

लैलतुल कदर में नमाज़ और अमल की तख्मीन वेबसाइट पर उपलब्ध है.

७. आखिर जुमा और नबी के नाम:

अंबिया स.अ. पर सलवात की तस्बीह करे और उसके बाद “इब्तिगाइल फ़ज़्ले वस सवाबे” की दो रकत नमाज़ पढ़े. यह अमल आखिर जुमा की रात से ३० वी रात तक करें. २९ वी शेहरूल्लाह, जुमा के दिन, ज़ोहोर की नमाज़ के पहले भी नबी के नाम की तस्बीह करें. नबी के नाम की ऑडियो, दुआ और नमाज़ की नीयत की पी.डी.एफ. वेबसाइट पर पेश है.  

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने सन १४३८ हि. में लिए हुए वसीला सुनने नीचे क्लिक करें.