ईद के मुबारक मौके पर मुमिनीन इबादत के अमल करे:

ईदुल फितर की रात (बिहोरी हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४२-१४४)

१) मुमिनीन मगरिब और ईशा की नमाज़ सुन्नत और नाफेलत के साथ पढ़े. हर फ़रज़ के बाद तक्बीरा बोले

२) २४ रकअत वश्शेक की नमाज़ पढ़े ( नियत बिहोरी हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४३)

३) दस रकअत ततव्वो की नमाज़ पढ़े (बिहोरी की हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४३)

४) ततव्वो की नमाज़ में जो रुकू और सुजूद में जो तस्बीह ज़ियादा बताई गई है, वह तस्बीह १०० बार करे, और “अस्तगफेरुल्लाह” की तस्बीह १००० बार करे.  

५) मुमिनीन सैयदी माज़ून साहेब अ.अ.ब. का वसीला मुबारका देखें. 

ईदुल फितर के दिन:

१) मुमिनीन फजर की सुन्नत, फजर का फरज़ और ताक़ीब की दुआ पढ़े. हर फ़रज़ के बाद तक्बीरा बोले (ज़ोहोर असर के फ़रज़ बाद भी तक्बीरा बोले)

२) सूरज तुलु होने के बाद “अल्लाहुम्मा इन्ना नतुबो” की दुआ की तिलावत करे (बिहोरी की हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४५, वेबसाइट पर ऑडियो उपलब्ध है)

३) उसके बाद “अल्लाहुम्मा या मोअतियस सुवालात” की दुआ पढ़के इफ्तार करे.

४) ईदुल फितर के दिन मुमिनीन को सिलतुल इमाम (अ.स.) अदा करने की रस्म है, अदा करे.

५) मुमिनीन २ रकअत ईद की नमाज़ पढ़े - जहाँ इमामत की रज़ा हो वहाँ इमामत से पढ़े. (बिहोरी की हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४७)

  • ईद के खुत्बे की नमाज़ का विडियो वेबसाइट पर देखा जा सकता है.

  • जिन्हें “वश-शम्स” और “हल अताक” की सुरत न याद हो वे “इन्ना अन्ज़लनाहो” और “वद-दुहा” की सुरत पढ़ सकते है. वह भी मुश्किल हो तो “इन्ना अन्ज़लनाहो” और “वत-तीन) की सुरत पढ़ सकते है.
  • नमाज़ शुरू करने से पहले हफ्ती में क़ुनूत की दुआ देख ले (बिहोरी की हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४८)

६) एवज़िल खुतबतैन की २ रकअत नमाज़ पढ़े (इमामत से नहीं). (नियत बिहोरी की हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४८)

७) क़िबला रुख खड़े हो कर इमाम अली ज़ैनुल आबेदीन स.अ. की दोआ की तिलावत करे  (बिहोरी हफ्ती जुज़ १, पन्ना क्र. १४९ से १५४) वेबसाईट पर ऑडियो पेश है 

८) मुमिनीन सैयदी माज़ून साहेब अ.अ.ब. का वसीला मुबारका देखें.

९. मुमिनीन सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. का साल १४४१ हि. में तस्नीफ़ फ़रमाया हुआ ईद का कसीदा पढ़ें.

१०. मुमिनीन याकूततो दावातिल हक शेह्ज़ादी डॉ. बज़अत ताहेरा बाईसाहेबा की सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. की शान में इस साल ईदुल फितर के मौके पर लिखी हुई मदेह की तिलावत करें।