ईद ए गदीर ए खुम के दिन रसूलुल्लाह स.अ. ने आखरी रिसालत पहुंचाई। आप के वसी मौलाना अली स.अ. की वलायत फ़र्ज़ की। हम खुदा का हम्द और शुक्र करते है कि १४०० साल के बाद हम उन लोगों में से है जिन्होंने गदीर के एहेद को वफादारी से निभाया। वलायत के फरिज़त पर हम काइम है, रसूलुल्लाह स.अ. ने अमीरुल मुमिनीन पर जो नस्स फरमाई,उस नस्स का सिलसिला मोहम्मद और अली के फ़रज़न्द अइम्मत ताहेरीन में जारी है। आमिर इमाम स.अ. ने पहले दाई सैयदना ज़ोएब को मौलातुना हुर्रतुल मलेका के हाथ पर काइम फरमाया, हर दाई अपने मनसूस को इमाम उज़ ज़मान के इल्हाम से काइम फरमाते है।

ईद ए गदीर ए खुम के दिन में अमल:

  • गदीर ए खुम के दिन मुमिनीन रोज़ा रखे। यह रोज़ा रखना वाजिब है। अगर कोई सफर पर हो तो बाद में फिर इस नियत पर रोज़ा रखे
  • ज़वाल के वक्त (ज़ोहर और अस्र की नमाज़ पढने से पहले) मुमिनीन दो रकअत शुकरन लिल्लाह की नमाज़ पढ़े और दोआ पढ़े (PDF के लिए यहाँ क्लिक करे)
  • दोआ पढने के बाद मुमिनीन वसीला मुबारक सुने 
  • मुमिनीन सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. का कसीदा  “اليوم عيد غدير خم” पढ़े। (ऑडियो रेकोर्डिंग के लिए यहाँ क्लिक करे)