ईद ए गदीर ए खुम के दिन रसूलुल्लाह स.अ. ने आखरी रिसालत पहुंचाई। आप के वसी मौलाना अली स.अ. की वलायत फ़र्ज़ की। हम खुदा का हम्द और शुक्र करते है कि १४०० साल के बाद हम उन लोगों में से है जिन्होंने गदीर के एहेद को वफादारी से निभाया। वलायत के फरिज़त पर हम काइम है, रसूलुल्लाह स.अ. ने अमीरुल मुमिनीन पर जो नस्स फरमाई,उस नस्स का सिलसिला मोहम्मद और अली के फ़रज़न्द अइम्मत ताहेरीन में जारी है। आमिर इमाम स.अ. ने पहले दाई सैयदना ज़ोएब को मौलातुना हुर्रतुल मलेका के हाथ पर काइम फरमाया, हर दाई अपने मनसूस को इमाम उज़ ज़मान के इल्हाम से काइम फरमाते है।

ईद ए गदीर ए खुम के दिन में अमल:

  • गदीर ए खुम के दिन मुमिनीन रोज़ा रखे। यह रोज़ा रखना वाजिब है। अगर कोई सफर पर हो तो बाद में फिर इस नियत पर रोज़ा रखे
  • ज़वाल के वक्त (ज़ोहर और अस्र की नमाज़ पढने से पहले) मुमिनीन दो रकअत शुकरन लिल्लाह की नमाज़ पढ़े और दोआ पढ़े (PDF के लिए यहाँ क्लिक करे)
  • दोआ पढने के बाद मुमिनीन वसीला मुबारक सुने 
  • मुमिनीन सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. का कसीदा  “اليوم عيد غدير خم” पढ़े। (ऑडियो रेकोर्डिंग के लिए यहाँ क्लिक करे)  
  • यूट्यूब पर वाअज़ मुबारक का रिले: माज़ूनुद दावतिल ग़र्रा सैयदी व मौलाया अब्देअली भाईसाहेब सैफुद्दीन अ.अ.ब. ईद के दिन (१८ वी ज़िल हिज्जतिल हराम | २७ वी जुलाई) वाअज़ मुबारक फरमाएँगे. वाअज़ का रिले सुबह १०:३० (बजे इंडिया टाइम) शरू होगा इंशाअल्लाह.

  • इंडिया के टाइम ज़ोन के मुमिनीन के लिए Zoom पर मीसाक:

    हुदात किराम ने यह रसम की हैं कि ईदे ग़दीरे खुम के दिन मुमिनीन मीसाक की तजदीद करें. सैयदना त.उ.श. ने करम और एहसान फरमाकर Zoom पर मीसाक की तजदीद के लिए रज़ा फ़रमाई हैं. मुमिनीन ईद के दिन इस Zoom लिंक पर वाअज़ बाद तकरीबन १२:३० बजे (इंडिया टाइम) बजे हाज़िर होकर मीसाक की तजदीद कराएं.
  • अमरीका और केनेडा के टाइम ज़ोन के मुमिनीन के लिए Zoom पर मीसाक की मजलिस: दूसरे टाइम ज़ोन में मौजूद मुमिनीन इस लिंक पर ईद के दिन शाम ६:४५ बजे इंडिया टाइम (सुबह ६:१५ बजे पी.डी.टी.) हाज़िर होकर मीसाक की तजदीद कराएं.
  • नए मीसाक: जिन मुमिनीन को नए मीसाक के लिए अपना नाम अर्ज़ करना हो तो वे [email protected] पर अर्ज़ करें.

  • मजलिस की आदाब: मुमिनीन मजलिस की आदाब का ख़याल रखें, कौमी लिबास में हाज़िर हों और अपना केमेरा चालु रखें और अपने पूरे नाम के साथ Zoom पर शामिल हों.
  • अगर कोई मुमिनीन गदीर के दिन यह सब अमल न कर सके, बिमारी, या मुमेनात को नमाज़ न पढनी हो, तो बाद में किसी दिन रोज़ा और नमाज़ अदा करे