रसुलुल्लाह (स.अ.व.) ने एक खुतबे में फ़रमाया कि शेहरूल्लाहिल मोअज़्ज़म  का पहला दस्का (पहले १० दिन) रहमत का दस्का है. इन १० दिनों में मुमिनीन यह अमल करके सवाब का ज़खीरा हासिल कर ले.

१. नमाज़: ५ फरीज़त की नमाज़ सुन्नत और नाफेलत के साथ वक़्त पर अदा करे. रसुलुल्लाह ने फ़रमाया है कि शेहरूल्लाहिल मोअज़्ज़म में एक फरीज़त की नमाज़ पढ़ना दूसरे महीनों में ७० फरीज़त की नमाज़ पढ़ने के बराबर है. शेहरूल्लाहिल मोअज़्ज़म में सुन्नत पढ़ने का सवाब दूसरे महीनों में फरीज़त पढ़ने के सवाब के बराबर है.

२. दोआ :

३. क़ुरआन: हर दिन क़ुरआने मजीद में से कम से कम एक सिपारा पढ़े ताकि महीने में एक क़ुरआन खतम हो सके. कुछ अल्लाह के मुख्लिस बन्दे रमज़ान में हर रोज़ एक क़ुरआन खतम करते है. जो क़ुरआन सरलता से न पढ़ सकता हो वे कई वेबसाइट है जहा पूरे क़ुरआन की ऑडियो होती है वहा ऑडियो सुनकर उसके साथ तिलावत करे. जिन्हें अरबी पढ़ना न आता हो वे वैसे क़ुरआन पढ़े जिसके हुरूफ़/अलफ़ाज़ अंग्रेजी व दूसरी भाषाओं में लिखे हो जहा लग वे अरबी पढ़ना सीख ले.

४. बिहोरी: जितनी हो सके उतनी बिहोरी की नमाज़ पढ़नी चाहिए. बिहोरी का तफ़्सीर से अमल व ज़िकर और तर्जुमा व ऑडियो वेबसाइट पर है.