सैयदी अब्दुलकादिर हकीमुद्दीन ५ वी शव्वालुल मुकर्रम वफ़ात हुए. उसके तीन हफ्ते बाद आपके दुश्मनों ने आपके बदन मुबारक को आपकी कबर से निकाला. उनका दावा यह था कि आपको इस्लाम के हुकुम के खिलाफ दफनाया गया हैं. जब आपके बदन मुबारक को निकाला गया तब मोजिज़ें से आपका बदन सलामत था और बदन मुबारक से खुशबू आ रही थी. आपका कफ़न साफ़ और सूखा था. सैयदी लुकमानजी ने सैयदी हकीमुद्दीन की सीरत में इस मोजिज़ें की तफ़्सीर से ज़िकर फ़रमाई है (बलागुद दावत २८६-२९२). मुमिनीन ने २७ वी शव्वालुल मुकर्रम के रोज़ सैयदी हकीमुद्दीन को दोबारा दफ़न किया. इसलिए आपके उर्स मुबारक की दो तारीखें है: ५ वी और २७ वी शव्वालुल मुकर्रम.

माज़ूनुद दावतिल ग़र्रा सैयदी व मौलाया अब्देअली भाईसाहेब सैफुद्दीन अ.अ.ब. सैयदी अब्दुलक़ादिर हकीमुद्दीन क.स. के उर्स मुबारक के मीकात पर मजलिस अक़्द फरमाएँगे. मजलिस सोमवार के दिन, ७ जून,शाम ६:१५ बजे लाइव रिले की जाएगी इंशाअल्लाह. मुमिनीन इस Zoom लिंक द्वारा मजलिस में शामिल होकर बरकात हासिल करें

मुमिनीन सैयदी अब्दुलकादिर हकीमुद्दीन के उर्स के मीक़ात पर यह अमल करें:

  • सैयदी हकीमुद्दीन की नीयत पर खत्मुल कुरान करें 
  • सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. का कसीदा मुबारका अ हकीम दीनिल्लाहे अब्दल कादेरी पढ़े (यहाँ इस कसीदे का लिसानुद दावत और अंग्रेजी तर्जुमा और उसकी ऑडियो पेश की गई है). 
  • याकूततो दावतिल हक्क शेह्ज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाईसाहेबा का सैयदी हकीमुद्दीन की शान में लिखा हुआ लिसानुद दावत में सलाम पढ़े. 

२ साल पहले सैयदी हकीमुद्दीन की सीरत का लेख पेश किया गया था जो शेह्ज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाईसाहेबा ने लिखा था. उस लेख में सैयदी हकीमुद्दीन की कुदसानी सीरत, खिदमत, इखलास, दाई पर फ़िदा होने की शान, इल्म में महारत और ख़ुलूस, तलबतुल इल्म को इल्म पढ़ाना, मुमिनीन को हिदायत देना, मुमिनीन के बिलाद में सफर करना, खैर रस्मों का जारी करना और आपकी हयात में और आपके वफ़ात के बाद जो मोजिज़ें हुए, उनका ज़िकर है. मुमिनीन इस लेख को पढ़े.