२३ वी जुमादिल उखरा (शनिवार, १० मार्च,२०१८) के दिन ५३ व़े दाई अल मुतलक सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. का दूसरा उर्स मुबारक है।

१९ वी रजब १३८५ ही के दिन ५१ व़े दाई सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. के वफात के बाद, आप के वारिस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि.अ. ने फरमाया कि ५१ व़े दाई के उर्स की मजालिस तीन दिन के लिये अकद हो। उसी तरह १६ वी रबी उल अव्वल १४३५ हि के दिन ५२ व़े दाई सैयदना बुरहानुद्दीन रि.अ. के वफात के बाद ५३ व़े दाई सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. ने फरमाया कि ५२ व़े दाई के उर्स की मजालिस भी तीन दिनों तक अकद की जाए।

आप के नास की इकतेदा करते हुए सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने पिछले साल ये फसल फ़रमाया कि ५३ व़े दाई सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. के उर्स की मजालिस २१ वी, २२ वी और २३ वी जुमादिल उखरा, तीन दीन तक अकद की जाए।

Amal Details

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने "نسيم بركات العرس المبارك" (नसीमे बरकातुल उर्स अल मुबारक) उर्स मुबारक की बरकात की नसीम (ठंडा पवन) ये तारीखी नाम इनायत फरमाया, जिसके अरबी हुरूफ़ के अदद १४३८ होते है जो सैयदना कुत्बुद्दीन के पहले उर्स का हिजरी साल है ।

इन तीन दिनो में मुमिनीन सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. की नियत पर खतमुल कुरआन की तिलावत करे और यह अमल करे:

२१ वी रात

  • खतमुल कुरआन

  • सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. का कसीदा मुबारका "يا ازهرا زهرت به الزهراء" की तिलावत करें

  • निचे दी हुइ फेहरिस्त में से एक मरसिया जो सैयदना कुत्बुद्दीन की याद में लिखे गये है, पढ़े

  • इमाम हुसैन स.अ. का नोहा पढ़े

  • मदेह पढ़े

२२ वी रात

  • खतमुल कुरआन

  • सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. का कसीदा मुबारका "أ لسان صدق بالحقيقة كلم" की तिलावत करें

  • निचे दी हुइ फेहरिस्त में से एक मरसिया जो सैयदना कुत्बुद्दीन की याद में लिखे है, पढ़े

  • इमाम हुसैन स.अ. का नोहा पढ़े
  • मदेह पढ़े

२३ वी रात

  • मगरिब ईशा की नमाज़ के बाद तवस्सुल की नमाज़ पढ़े

  • नियत: “उसल्ली सलातस सलवाते अल दाईल अइम्मतिल फातेमीयीन सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन व तवस्सुले बेही इलल्लाहे तआला रकअतयने लिल्लाह”

  • “उसल्ली सलातस सलवाते व दोआए ले दाईल असरे वल हीन सैयदना ताहेर फखरुद्दीन रकअतयने लिल्लाह”

  • खतमुल कुरआन पढ़े

  • सदकल्लाह की दोआ पढ़े (तर्जुमा और विडिओ देखने यहाँ क्लिक करे)

  • सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने सैयदना कुत्बुद्दीन की शान में जो कसीदा मुबारका तसनीफ फरमाया है – “सलामुन अलयका अ कुत्बल हुदा” – इस सलाम की तिलावत करे (ऑडियो और दावत की ज़बान में तर्जुमा वेबसाईट पर पेश है)

  • याकूतत उल दावतिल हक्क शहज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाइसाहेबा ने सैयदना कुत्बुद्दीन की शान में दावत की ज़बान में लिखे हुए सलाम की तिलावत करे

 

मुमिनीन उर्स मुबारक की वाअज़ रात या दिन में सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. की वाअज़ मुबारक सुने। (मुंबई में वाअज़ तमाम होने के बाद लिंक शाए होगी और यु-ट्यूब के ज़रिये से वाअज़ देखी जा सकती है)

सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. की याद में मरसिया की फेहरिस्त:

१ शेह्ज़ादा अज़ीज़ भाईसाहेब का लिखा कसीदा  "الا أولياء الله في الخلد احياء"

२ बावाजी साहेब गुजरी गया छे – याकूतत उल दावतिल हक्क शहज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाइसाहेबा

३ दिल नी धड़कन खुज़ैमा खुज़ैमा – याकूतत उल दावतिल हक्क शहज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाइसाहेबा

४ नूर रुपाला सोहामना – ज़मररूदत दावतिल हक्क शहज़ादी डॉ बज़त सैफियाह बाईसाहेबा

५ कुत्बुद्दीन नी इतनी नेअम छे - ज़मररूदत दावतिल हक्क शहज़ादी डॉ बज़त सैफियाह बाईसाहेबा

६ घना याद आवे छे बावाजी साहेब – जुमानत ए दावतिल हक्क शहज़ादी फातेमा बाइसाहेबा

७ कुत्बुद्दीन गुजरी गया - मरजानत ए दावतिल हक्क शहज़ादी अरवा बाइसाहेबा

८ गुजरी गया मौला कुत्बुद्दीन – शहज़ादी आमेनाह बाईसाहेबा