सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. के साथ शेहरुल्लाह अल मोअज़्ज़म १४३९ हि में मुमिनीन ने दारुस सकीना में नमाज़ अदा की, इबादात की, ताके ईद उल फ़ित्र के दिन आप के साथ, आप का दीदार कर के ईद मनाई। मुमिनीन ने इमाम उज़ ज़मान के दाई के साथ इमामत से नमाज़ अदा कर गुनागुन सवाब हांसिल किया। हर रोज़ फजर की नमाज़ बाद सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. आप के बावाजी साहेब सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. के रौज़े मुबारक पर ज़ियारत के लिए तशरीफ़ के जाते थे और हर रोज़ सैयदना ताहेर सैफुद्दीन, सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि.अ. या सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. की तसनीफ फरमाई मुनाजात की तिलावत फरमाते थे। हर रोज़ मगरिब  ईशा की नमाज़ के बाद मुमिनीन सैयदना के नेअमत साये में इफ्तार और नियाज़ के अलवान तनावुल करते थे। इसी तरह हर रोज़ मज़ारे कुत्बी में इबादुल्लाह के लिए भी नियाज़ होती थी।

हर रोज़ ४० से ज़्यादा मसूल सैयदना फखरुद्दीन की रज़ा मुबारक से बिलाद इमानियाह में इमामत से नमाज़ की तवल्ली करते थे।

मुमिनीन को सैयदना फखरुद्दीन के साये में दिन और रात इबादत की नेअमत और बरकत नसीब हुइ और हिकमत के लाकीमत मोती भी नसीब हुए। सैयदना ने शेहरुल्लाह अल मोअज़्ज़म में तकरीबन ८० सबक पढाए। हर रोज़ हकीक़त के तीन हलके होते थे। मुमिनीन के लिए चार सबक हुए जिसमे सैयदना ने इमाम अली ज़ैनुल आबेदीन स.अ. की दोआ जो हम फजर की नमाज़ बाद पढ़ते है, इस दोआ की ज़िक्र फरमाई। सैयदना फखरुद्दीन ने सबक मुंबई में पढाए, और तमाम आलम में मुमिनीन विडिओ रिले के ज़रिये सबक में शामिल हुए और सभी को आले मोहम्मद का इल्म, इस इल्म के खालिस चश्मे से पढने की बरकत मिली। ( पहले दो सबक की रेकोर्डिंग वेबसाईट पर है, इसे देखने यहाँ क्लिक करें) सैयदना ने हिकमत के जो लाकीमत कलाम फरमाये, और जानो को आला दर्जा अता किया, इस नेअमत पर हम जितना शुकुर करें कम है।

शेहरुल्लाह अल मोअज़्ज़म में सैयदना ने हर वसिला मुबारक में मुमिनीन के हक में बेशुमार दोआए फरमाई। १९  वी शेहरुल्लाह अल मोअज़्ज़म अमीरुल मुमिनीन स.अ. की शहादत की वाअज़ फरमाई और इसमें ईमान के चार दआएमत (स्तंभ) की ज़िक्र फरमाई – अदल, सब्र, यकीन और खुद के जान से जिहाद (जद्दोजहद – संघर्ष)। मुमिनीन जिन्होंने इस साल ज़कात और वाजेबात अर्ज़ किया, उनके हक में मौलाना ने ख़ास दोआ फरमाई के खुदा उन्हें बरकात से नवाज़े। सैयदना ने मौलाना अली स.अ. की शहादत की ज़िक्र अजब शान से फरमाई और वाअज़ तमाम की।

लैलतुल कदर की रात सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने अजब वलवले के साथ वसीला लिया। इमाम उज़ ज़मान स.अ. की ताईद की बरकात नुमाया नज़र आ रही थी। सैयदना के वसीले का तमाम आलम में विडिओ रिले किया गया। मशरिक, मगरिब, दुनिया में जहां कहाँ मुमिनीन बसे है, सभी को इस मुबारक रात में मौलाना के साथ बंदगी करने की अज़ीम नेअमत नसीब हुइ। सैयदना ने इस साल लैलतुल कदर में मुनाजात शरीफा भी तसनीफ फरमाई, जिसकी शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब सैफुद्दीन ने मआना बयान की, और मुमिनीन को दाईज़ ज़मान की मारेफ़त करवाई। (मुनाजात का बयान देखने यहाँ क्लिक करें)

हर शनिवार को सैयदना बैठक में तशरीफ़ लाते थे जिसमें मुमिनीन सैयदना फखरुद्दीन की हज़रत इमाम्मियाह में कदमबोसी का शरफ हांसिल करते थे और रसूलुल्लाह स.अ. के दाई के हाथ पर वाजेबात अर्ज़ कर के दोआओं का ज़खीरा करते थे।

ईद उल फ़ित्र के दिन, सैयदना त.उ.श. ने इवाने फातेमी (दारुस सकीना) में फजर की नमाज़ पढ़ाई और ईद का खुतबा पढ़ा। अजब शान से वसीला लेकर अलाह तआला के नज़दीक दोआ की। ईद उल फ़ित्र की मजलीस में शरबत और वधावा की रस्म के बाद "هلال بدى من خلال الدجنة" कसीदा मुबारक की तिलावत हुइ। फिर शेह्ज़ादा डॉ. अज़ीज़ भाईसाहेब कुत्बुद्दीन ने पुर ख़ुलूस तक़रीर की, मुमिनीन ने शेहरुल्लाह अल मोअज़्ज़म में जो अज़ीम नेअमते हांसिल की इसकी ज़िक्र की, और सभी मुमिनीन के तरफ से हज़रत इमाम्मियाह में शुकुर की अर्ज़ की।

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन ने इस साल ईद उल फ़ित्र के मुबारक मौके पर अइम्मत ताहेरीन स.अ. की मदेह में जो कसीदा मुबारक तसनीफ फरमाया है, उस कसीदा मुबारक की सभी शेह्ज़ादा किराम ने खड़े हो कर तिलावत की। (यह कसीदा और अंग्रेजी और दावत की ज़बान में तर्जुमा वेबसाईटपर है)

याकूतत उल दावतिल हक्क शहज़ादी डॉ. बज़त ताहेरा बाइसाहेबा ने इस साल ईद उल फ़ित्र में लिखी हुइ मदेह की मजलीस में तिलावत हुइ। मुमिनीन को सैयदना त.उ.श. की कदमबोसी का शरफ हांसिल हुआ। मजलीस के बाद मौलाना त.उ.श. सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. की ज़ियारत के लिए पधारे।  मुमिनीन ने इवाने फातेमी में ईद उल फ़ित्र की ख़ुशी के अलवान तनावुल किए।

खुदा तआला सैयदना ताहेर फखरुद्दीन आका त.उ.श. की उम्रे शरीफ को ता रोज़े क़यामत दराज़ करे, ता के हमें शेहरुल्लाह की बरकत हर साल नसीब होती रहे और हमेंशा आप के नूरानी कलाम की बरकात मिलती रहे।