१६ वी मोहर्रम १४३९ हि सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. के रौज़त के साये में मजारे कुत्बी नियाज़ का खाना शुरू किया। हर मज़हब और दीन के लोगों को नियाज़ का न्योता दिया गया। यह नियत रखते हुए के सभी को सैयदना कुत्बुद्दीन की बरकात मिले।

गुज़िश्ता १२ (बारह) महीनों में तकरीबन ५०,००० (पचास हज़ार) लोग नियाज़ के खाने पर आये।

मुमिनीन को याद है कि जब भी सैयदना कुत्बुद्दीन के घर पर शिफा बुलवाने आते तो आप अक्सर उन्हें फरमाते कि “जमन जमीने जाजो”। आज जो भी आप के रौज़े पर आते है उन्हें आप के वारिस सैयदना फखरुद्दीन की तरफ से नियाज़ का खाना पेश होता है।

खाने में हर रोज़ दाल, चावल और एक मिठाई दोपहर के समय होती है। दोपहर १२ बजे से २ बजे तक, हर रोज़ तकरीबन ७० किलो चावल, ४४ किलो दाल और ८ किलो मिठाई तैयार की जाती है। हर रोज़ १५० से ज़्यादा लोग, अलग अलग मज़ाहिब और अलग अलग तबके से नियाज़ में आ कर खाना खाते है।

मुमिनीन भी नियाज़ में शामिल होते है और सवाब हांसिल करते है।

खुदा तआला सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. के मकाम को जन्नत उल फिरदौस में बलंद करे और आप के वारिस सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. की उमरे शरीफ को क़यामत के दिन तक दराज़ करे।

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