इस साल सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने करम फरमा कर लंडन में अशरा मुबारका की खिदमत ले लिए डॉ. मोइज़ भाईसाहेब मोहियुद्दीन को रज़ा फरमाई। अशरा मुबारका में डॉ मोइज़ भाईसाहेब ने मवाली ताहेरीन के फ़ज़ाइल की ज़िक्र फरमाई और इमाम हुसैन अ.स. और आप के एहले बैत और असहाब की शहादत अजब वलवले से पढ़ी। मुमिनीन को इमाम हुसैन का गम ताज़ा कराया।

डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने मूसा नबी के ज़मान की ज़िक्र की और आप ने दावत काइम करने में जो मेहनते सही, फिरौन ने आप की दुश्मनी की यह ज़िक्र की। डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने मूसा नबी और हारून नबी की रसूलुल्लाह स.अ. और मौलाना अली स.अ. के साथ मिसाल जोड़ कर ज़िक्र की, और रसूलुल्लाह स.अ. की हदीस की ज़िक्र फरमाई के “अली मेरे थकी है जैसे हारून मूसा थकी थे”। आपने इसा नबी के ज़मान की और आप के मौजिज़े की ज़िक्र की, और  शहादत का बयान किया।

डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने रसूलुल्लाह स.अ. के आबा अजदाद की ज़िक्र की जो हक के इमाम थे और मक्का में हाशेमी कुरैशी कबीलों के सरदार थे। इमाम हाशिम की और इमाम कुसई और आप की नसल में इमामो की ज़िक्र की। रसूलुल्लाह स.अ. के मबअस की ज़िक्र की और आप को इस्लाम काइम करने में जो मुश्किलें सेहनी पड़ी उनकी तफसीर से ज़िक्र की। रसूलुल्लाह स.अ. की ज़िक्र के साथ मौलाना अली अ.स. और मौलातुना फातेमा अ.स. के भी फ़ज़ाइल बयान किये। रसूलुल्लाह स.अ. ने ज़मीन में मौलाना अली अ.स. और मौलातुना फातेमा अ.स. की शादी की इसके कब्ल खुदा तआला ने आसमान में शादी की। रसूलुल्लाह स.अ. ने इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. के बारे में जो हदीसें फरमाई है उनकी ज़िक्र की और दोनों इमामैन अक्दसैन के फ़ज़ाइल बयान फरमाए।

डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने बयान किया कि हुसैन इमाम अ.स. की नसल में इमामत क़यामत के दिन तक जारी रहेगी, फातेमियीन के ज़मान की ज़िक्र की और हक के इमाम से खिलाफ़ जो लोग हुए और मुख्तलिफ फिरके कैसे हुए इसके बारे में ज़िक्र की। बाद में डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने बयान किया कि इमाम के सतर के करीब मौलातुना हुररत उल मलेका के हाथ पर दावत का अमर दोआत मुतलकीन को सौंपा गया। सैयदना मोअय्यदुस शिराज़ी का इल्म हुदूद फोज़ोला सैयदना लमक, सैयदना याहया और मौलातुना हुररत उल मलेका के हाथ पर पहले दाई सैयदना ज़ोएब की तरफ नक़ल हुआ, जो यमन में तशरीफ़ रखते थे। सैयदना ताहेर सैफुद्दीन की मशहूर बैत की तिलावत की:

من دعاة قد ايدتهم سواري * بركات المؤيد الشيرازي

सैयदना मोअय्यदुस शिराज़ी की बरकात की सवारी दोआत मुतलकीन की तरफ पहुंची।

आप ने बयान किया कि यमन और हिन्दुस्तान में दोआत मुतलकीन ने दावत काइम करने के खातिर और मुमिनीन के जानों की नजात के खातिर कितनी मेहनतें सही है।

डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने मवाली ताहेरीन के मौएज़त के कलाम में से मौएज़त बयान की के मुमिन अपनी रोज़ाना ज़िन्दगी किस तरह से गुज़ारे। आखेरत को हमेंशा सामने रखना चाहिए। सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि.अ. के कसीदा मुबारक में से कुछ अब्यात की तिलावत की

العقل في الانسان اعلى الجوهر * متلالئ في نفسه كالازهر

डॉ. मोइज़ भाईसाहेब ने अजब वलवले के साथ इमाम हुसैन अ.स. की शहादत पढ़ी, खासकर आशूरा के दिन इमाम हुसैन अ.स. और आप के एहले बैत और असहाब पर जो मुसीबतें उतरी वह ज़िक्र की। मुमिनीन की आँखों से आंसू रवां हुए। रसूलुल्लाह स.अ. के नवासे की मुसीबत याद कर के हर एक मुमिन ने “या हुसैन, या हुसैन” निदा कर के पुरजोश मातम किया।

खुदा तआला डॉ. मोइज़ भाईसाहेब को अफ्ज़लुल जज़ा अता करे और सैयदना त.उ.श. के साये में बाकी रखे।