१० वी शाबानुल करीम १४३९ ही. (२५ अप्रैल, २०१८) के रोज़ सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) की रज़ा मुबारक से शेह्ज़ादा डॉ. अब्देअली भाईसाहेब सैफुद्दीन की कियादत में तक़रीबन ५० मुमिनीन करबला मोअल्ला और नजफे अशरफ ज़ियारत के लिए रवाना हुए. सैयदना की दुआ की बरकत हर कदम पर नज़र आती रही. मुमिनीन ने नजफे अशरफ में अमीरुल मुमिनीन मौलाना अली इबने अबी तालिब (स.अ.) की १० बार ज़ियारत की. करबला मोअल्ला में सैयदुश शोहदा आका हुसैन (स.अ.) की १० बार ज़ियारत की और शब्बरात में कूफ़ा की मस्जिद में वशेक की नमाज़ पढ़ी.

मुंबई एअरपोर्ट से नजफ़ का सफर ४ १/२ घंटे का था. नजफ़ में मुमिनीन बस में अपने होटल पर पहुँचे. यह अमीरुल मुमिनीन के हरम से केवल ३ मिनट की दूरी पर था. वहाँ नाश्ता करके मुमिनीन शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब के साथ पहली ज़ियारत करने के लिए हरम शरीफ की तरफ चले. रोज़ाना हरम के सेहेन में मुमिनीन शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब के साथ जमा होते. शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब सलाम की तिलावत करते और मुमिनीन मरसिया पढ़ते. शेह्ज़ादा साहेब अजब शान से वसीले लेते थे,औलियाउल्लाह ने जो मुसीबतें झेली उसकी ज़िक्र होती. वहाँ के कई शीआ ज़ाएरीन भी आप के बयान से मुतास्सिर हुए.

नजफे अशरफ में मुमिनीन ने अमीरुल मुमिनीन (स.अ.) की मस्जिद - मस्जिदे कूफ़ा - में नमाज़ पढ़ी. शब्बरात की रात, शाबान की १५ वी रात में शेह्ज़ादा साहेब ने मगरिब और ईशा की नमाज़ इमामत से पढ़ाई, अमीरुल मुमिनीन के मेहराब के नज़दीक सलाम की तिलावत फरमाई, अमीरुल मुमिनीन की शहादत पढ़ी, उस मुबारक जगह पर शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब ने वसीला लेकर दुआएँ की, हर मुमिन के दिल पर गहरा असर था.

नजफ में शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहब की कई शीआ रईसों के साथ मुलाकात हुई. वे सब बहुत सन्मान से पेश आए. मुलाकात बहुत सफल रही.

५ वे दिन, मुमिनीन करबला मोअल्ला पहुँचे. मुमिनीन ने आका हुसैन की १०  ज़ियारत की. मुमिनीन होटल पहुँचे, जहाँ से एक ओर मौलाना अब्बास (अ.स.) का हरम नज़र आता था और दूसरी ओर इमाम हुसैन (स.अ.) का हरम नज़र आता था. मुमिनीन मौलाना अब्बास की ज़ियारत के लिए गए. शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब ने इमामत से नमाज़ पढ़ाई और सलाम की तिलावत फ़रमाई. फातेमी मर्सिया पार्टी ने बहुत जज़्बे के साथ मरसियों की तिलावत की. शेह्ज़ादा साहेब ने आका हुसैन और मौलाना अब्बास की शहादत का पुर-दर्द बयान किया. ज़ाएरीन की आँखों के सामने करबला का मंज़र आ गया.

उसके बाद मुमिनीन इमाम हुसैन (स.अ.) के हरम में गए. शेह्ज़ादा साहेब ने सलामों और मरसियों की तिलावत की. आपने वसीला लिया जिसका असर हर एक मुमिन के दिल पर हुआ और सबकी आखों में ऑंसू आ गए. ४ दिन तक मुमिनीन दिन रात सलामो, दुआओ, और मौलाना अब्बास और इमाम हुसैन की ज़ियारत में मशगूल रहे. आखरी दिन, जुमा के दिन, शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब ने वदा का सलाम पढ़ा और भारी दिल के साथ वसीला लिया. आका हुसैन, मौलाना अली अकबर और मौलाना अली असगर की शहादत की ज़िक्र फ़रमाई, सैयदना ताहेर फखरुद्दीन के लिए दुआएँ मांगी, मुमिनीन के लिए दुआएँ फ़रमाई - जो हाज़िर थे उनके लिए और जो नहीं आ पाए उनके लिए, और यह दुआ फ़रमाई की यह ज़ियारत हमारे लिए इमाम हुसैन की आखरी ज़ियारत न हो.   

१९ वी शाबान मुमिनीन करबला से नजफ के लिए रवाना हुए और मौलना अली के हरम में पहुंचे. इत्तफाक से जब मुमिनीन हरम से बाहर आए तो आसमान से बारिश हुआ, जो दुआ की मकबूलियत की निशानी है.

मुमिनीन नजफ़ एअरपोर्ट पर पहुँचे तब कई शीआ रईसों जिनकी शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब के साथ मुलाक़ात हुई थी, उन्होंने सैयदना (त.उ.श.) के लिए खाके शिफा के हदिये पेश किए और दुआ की कि मुमिनीन जल्द ही सैयदना के साथ ज़ियारत पर आए.

मुमिनीन ने खुदा का शुक्र किया, खुदा के वली इमामुज़ ज़मान के दाई का शुक्र किया कि यह नेमत अज़ीमा उन्हें मिली. मुमिनीन शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहेब का भी शुक्र किया जिनके हाथ पर उन्होने करबला और नजफ में बरकात ली. मुमिनीन ने इस सफर में आपस में जो भाईचारा महसूस किया उसके लिए भी शुक्र किया. ज़ाऐरीन मुमिनीन मुल्ला मोहम्मद भाई खोराकीवाला, जिन्होंने इस ज़ियारत की सफर के लिए जो बेहतर खिदमत बजाई, उनका  शुक्र किया. मुमिनात बहनो ने शुक्र किया कि जुमानतो दावतील हक़ शेह्ज़ादी फातेमा बाईसाहेबा और मरजानतो दावतील हक़ शेह्ज़ादी अरवा बाईसाहेबा भी इस सफर में साथ थे. सबकी खुशी का कोई पार नहीं था और बरकात से सबके दिल भरे थे. प्लेन पर चढ़ते वक्त शेह्ज़ादा अब्देअली भाईसाहब ने नजफ के आसमान की ओर नज़र की और दुआ फ़रमाई की “जल्द वापस आए, सैयदना (त.उ.श.) के साथ जल्द वापस आए, इंशाअल्लाह.”