ईद उल अदहा और हिज़्बे खलीलुल्लाह का प्रोग्राम

ज़िल हिज्जतुल हराम की दसवी (१०) रात ईद उल अदहा की रात सैयदना ताहेर फखरुद्दीन ने मगरिब ईशा की नमाज़ इमामत से पढ़ाई और वशेक की नमाज़ दारुस सकीना में अदा की। ईद के दिन सैयदना ने फजर की नमाज़ और ईद का खुतबा पढ़ाया। इमाम अली ज़ैनुल आबेदीन स.अ. की दोआ मेहराब में पढने के बाद आप ने वसीला लिया और दोआ फरमाई कि खुदा तआला मुमिनीन की इबादत और कुरबानी कबूल फरमाए। बाद में आप ने कुरबानी फरमाई और सैयदना कुत्बुद्दीन की ज़ियारत के लिए तशरीफ़ लाए। ईद की ख़ुशी की मजलीस में सूरतुल फ़तेह की तिलावत हुइ। सैयदना ताहेर सैफुद्दीन का कसीदा मुबारका

 "يا امام الزمان يا من اضحى" की तिलावत हुइ और बाद में मुमिनीन को कदमबोसी का शरफ हांसिल हुआ और ईद का नाश्ता तनावुल किया।

फिर सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. हिज़्बे खलीलुल्लाह के क़ुरबानी के प्रोग्राम में दारुस सकीना के बाग़ में पधारे। सैयदना के इरशाद मुताबिक़ और ज़ाहरा हसनात के ज़ैरे एहतेमाम में ९९ कुरबानियो का गोश ज़ाती तौर पर हिज़्बे खलीलुल्लाह के मेम्बरान ने मुंबई में तकरीबन २५०० घरों में तकसीम किया।

दुबई सफ़र

११ वी ज़िल हिज्जतुल हराम सन १४३९ हि (२२ अगस्त २०१८) सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने दाई होने के बाद पहली बार मुमिनीन की अर्ज़ कबूल फरमाते हुए दुबई की तारीखी सफ़र की। दुबई के मुमिनीन के अजब बलंद नसीब कि ईद उल अदहा के अय्याम में सैयदना त.उ.श. उन के शहर में तशरीफ़ लाए।

दुबई के एअरपोर्ट पर सैयदना त.उ.श. का “सुलतान उल बोहरा” की तरह VIP इस्तिक्बाल हुआ ( सैयदना बुरहानुद्दीन रि.अ. को अक्सर “सुलतान उल बोहरा” से खिताब किया जाता था जब आप दुबई पधारते थे) दुबई के मुमिनीन सैयदना त.उ.श. के इंतेज़ार में थे। आप मुमिन मुखलिस भाई के घर तशरीफ़ फरमा हुए।

१२ वी ज़िल हिज्जतुल हराम दुबई के मुमिनीन ने अजमान बिलाद में सहरा में एक वाड़ी में कुरबानी का इंतेज़ाम किया था। जहां सैयदना त.उ.श. ने एक ऊँट और तीन बकरे की ज़बीहत की। गर्मी की मौसम के बावजूद मुमिनीन फजर से इस वाकए को देखने जमा हो गए थे। तकरीबन ६०० किलो क़ुरबानी के गोश को १ किलो के पेकेट में नज़दीक में रहते कारीगरों को तकसीम किया गया।

फिर सैयदना त.उ.श. ज़ीयाफत की मजलीस में जलवा नुमा हुए और ज़ोहर असर की नमाज़ इमामत से पढ़ाई। आप ने दुबई के मुमिनीन के दरमियाँ बयान फरमाया और इमाम हुसैन की शहादत पढ़ी (बयान देखने यहाँ क्लिक करें) बयान में सैयदना ने मुमिनीन की सना करते हुए फरमाया की सभी सिराते मुस्तकीम पर साबित है और बावन व़े दाई सैयदना बुरहानुद्दीन के सच्चे मनसूस सैयदना कुत्बुद्दीन को मानने वाले है।  आप ने फरमाया कि आप दावत काइम फरमा रहे और दावत की हिमायत कर रहे है, जैसे कुत्बुद्दीन मौला ने हिमायत की और मुमिनीन को सबर और हिम्मत की वसीयत फरमाई। आप ने मुमिनीन को शौख दिलाया कि मीकात पर सभी जमा हो कर बरकात हांसिल करें। आप ने मुमिनीन के हक़ में बेशुमार दोआए फरमाई कि खुदा तआला हर मुश्किल को आसान करे और रोज़ी में बरकत और कुशादगी बख्शें। बाद में मुमिनीन को सैयदना की कदमबोसी और हज़रत में निजी अर्ज़ करने का भी शरफ मिला।

मुमिनीन के इज़देहाम के बावजूद सैयदना ने एक एक मुमिन की अर्ज़ सुन कर हिदायत दी – दीन, सेहत, एहलो अयाल, कारोबार सभी पहलुओं पर आप ने मुमिनीन को सही रास्ता बताया। मिसाक की मजलीस भी अक्द हुइ जिस में मुमिनीन भाईओं और मुमेनात बहनों ने मौलना त.उ.श. को मिसाक दिया। मुमिनीन जो पहली बार सैयदना से मिले उन के दिलों पर सैयदना त.उ.श. की शान और हेबत देख कर गहरा असर हुआ।

जुमोआ के दिन मौलाना त.उ.श. ने ज़ोहर असर की नमाज़ इमामत से पढ़ाई और कदमबोसी का शरफ अता फरमाया। नमाज़ बाद एक मुमिन मुखलिस भाई की ऑफिस में कदम मुबारक के लिए तशरीफ़ लाए। उस मुमिन भाई की अर्ज़ सुन कर दुबई के मुश्किल कारोबारी मान्हौल में किस तरह कामयाबी हांसिल की जाए इसके बारे में हिदायत दी। आप ने कुरआन मजीद की आयत पढी “खुदा तआला तुम्हें ऐसी जगह से रिज्क अता करता है जहाँ का तुम्हें गुमान भी नहीं”।

जुमोआ के दिन दोपहर को मुमिनीन के हक़ मे दोआ फरमा कर मुंबई तशरीफ़ लाए। जिन भाईओ और बहनों को दुश्मन ने गुमराह कर दिया है उन के हक़ में दोआ की कि व़े हक़ की तरफ़ लौट आए और हक़ की दावत को जवाब दें।

मुमिनीन ने सैयदना को विदा किया तो एक तरफ फरहत और ख़ुशी थी कि इतने थोड़े से अरसे में इतनी नेअमतें मौलाना त.उ.श. ने अता फरमाई। दूसरी तरफ मौलाना के विदागिरी का दिलो पर हुज़ुन था।

ईद के प्रोग्राम और दुबई सफ़र की विडिओ फातेमी दावत की वेबसाईट पर पेश की गई है, इसे देखने यहाँ क्लिक करें।