ईद ए ग़दीरे खुम के मौके पर सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने पुर शान वाअज़ फरमाई जिस से मुमिनीन के अकाइद और अज़म मज़बूत हुए। यहाँ वाअज़ की मुख़्तसर जिकर पेश करते है। वाअज़ मुबारक सैयदना त.उ.श. ने मौलाना अली स.अ. के शिया की लिए बिशारत की ज़िक्र से शुरू फरमाई  "شيعة علي هم الفائزون" (अली के शिया जीत को परामने वाले है) सैयदना त.उ.श. ने सैयदना मोअय्यद के बयान में से फरमाया कि अली के शिया को कोई परेशानी नहीं। आप ने फरमाया कि रसूलुल्लाह स.अ. के शिया वह है जो अमीरुल मुमिनीन की मोहब्बत रखते है। और अपना अकीदा है की इस ज़मान में – बलके इस घड़ी में रसूलुल्लाह स.अ. और अमीरुल मुमिनीन की इतरत में से एक इमाम उज़ ज़मान धरती पर  हाज़िर और मौजूद है। सैयदना त.उ.श. ने वाज़ेह फरमाया कि दोआत मुतलकीन के नामो को अमीरुल मुमिनीन ने किताब उल इल्म में लिख दिए है और आप ने शुक्र किया कि आज हम अली के मोहिब्बीन में से है। आप ने जोश में आ कर फरमाया की आज अमीरुल मुमिनीन की मोहब्बत का दिन है

सैयदना त.उ.श. ने तफसीर फरमाई कि गदीर का दिन भी जुमोआ का दिन था और आप ने अमीरुल मुमिनीन स.अ. के खुतबे में से बयान फरमाया। आप ने ज़िक्र की कि अक्सर लोग इस दिन में रसूलुल्लाह स.अ. ने फरमाए अमल को जान कर भी भूल जाते है।

सैयदना ने फरमाया कि गदीर के दिन का रोज़ा रखने में तमाम ज़िन्दगी भर रोज़ा रखने के बराबर सवाब है और सौ (१००) हज और सौ (१००) उमरह करने का सवाब है। आप ने फरमाया कि दो (२) रकअत शुकरन लिल्लाहे तआला की नमाज़ पढने में एक लाख (१००,०००) हज और एक लाख (१००,०००) उमरह करने का सवाब है। इस दिन में रोज़दार को इफ्तार कराने की ज़िक्र फरमाई।

इमाम उज़ ज़मान की ताईद की सवारी के साथ सैयदना ने

"لا حول ولا قوة الا بالله العلي العظيم" की सात (७) फुसूल (पहलू) की तौजीह (मआनी) बयान फरमाई। मुमिनीन को अपनी रोजाना की ज़िन्दगी में अमल में लाने के लिए कई हिदायत मिली।

सात वी फसल में आप ने मुमिनीन को इस तस्बीह को हमेंशा करने की हिदायत दी, कि जिसके बारे में रसूलुल्लाह स.अ. ने फरमाया कि “ला हौल” की तस्बीह खुदा के कई खजानों में से एक खज़ाना है और ९९ बीमारियो से शिफा है। जिस में पहला मर्ज़ हम-गम है। सैयदना ने फ़रमाया कि यह दुनिया मुसीबत का घर है जिससे किसी को अमान नहीं है। हुदात किराम वसीयत करते है कि दुनिया में हमेंशा खुदा पर भरोसा रखे और

 "لا حول ولا قوة الا بالله العلي العظيم"की तस्बीह से यारी तलब करे। सैयदना की वाअज़ की झलक देखने यहाँ क्लिक करे।

सैयदना त.उ.श. ने इमाम हुसैन स.अ. की पुरदर्द शहादत पढ़ कर बयान को तमाम किया।

बयान में आप ने मुमिनीन के हक में कई दोआ फरमाई कि सभी को खुदा तआला हिफाज़त और अमान में रखे और दुश्मनों से हिफाज़त करे।

सैयदना त.उ.श. ने मिसाक की इबारत पढ़ना शुरू किया और हातिम भाईसाहेब बिन शेह्ज़ादा डॉ. अब्देअली भाईसाहेब सैफुद्दीन का मिसाक लिया। मिसाक खुदा और खुदा के अवलिया का एहेद है यह अकीदा रख कर मुमिनीन ने इमाम उज़ ज़मान के दाई सैयदना फखरुद्दीन को मिसाक दिया।

मिसाक के बाद सैयदना नमाज़ पढने तशरीफ़ लाए और शुकरन लिल्लाह की नमाज़ पढ़ी। आप के वसीले का हर एक मुमिन के दिल पर गहरा असर हुआ और यकीन पर यकीन हुआ कि मुमिन की दोआ अइम्मत ताहेरीन और दोआत मुतलकीन के वसीले से कबूल होगी।