सैयदना फखरुद्दीन ने गांधीजी के १५० व़े जन्मदिन के समारोह में तक़रीर में फ़रमाया कि गांधीजी ने हमे आज़ादी दिलाई। उनकी याद जिंदा करने हम सब आज़ादी और तरक्की के लिए कोशिष करे, अहिंसा से, भाईचारे से, किसी को कम या ज़्यादा कर के नहीं बल्के समान रूप से। यह समारोह बोम्बे स्टोक एक्सचेंज के हॉल में आयोजित किया गया।

सैयदना ने फरमाया कि कुछ ही दिनों पहले हमारे इमाम हुसैन की शहादत का दिन, आशूरा का दिन था, और फरमाया कि गांधीजी ने कहा है कि ज़ुल्मरानी के खिलाफ़ जीत किस तरह हांसिल की जाए यह सबक मैंने हुसैन से सीखा है। हम मिलजुल कर साथ रहकर, एक दुसरे का सम्मान करते हुए अमनो अमान में कैसे रहे और एक दुसरे को फायदा कैसे पहुंचाए इसकी मिसाल गांधीजी ने काइम की है।

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन ने फरमाया कि आप के जद (दादाजी साहेब) ५१ व़े दाई सैयदना ताहेर सैफुद्दीन साहेब के गांधीजी के साथ बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। जब गांधीजी ने दांडी यात्रा की तो उस वक्त दांडी गाँव में सैयदना के बंगले में, सैफी विला में, गांधीजी ठहरे थे। आज़ादी के बाद सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने वह बंगला पंडित नेहरु के हाथों हिन्दुस्तान की सरकार को हदिया पेश किया था।

यह समारोह जैन मज़हब के पेशवा आचार्य डॉ. लोकेश मुनि और आप की संस्था ‘अहिंसा विश्व भारती’ के ज़ैरे एहतेमाम हुआ, जिसका नाम ‘आलमी अमन – अहिंसा’ रखा गया।

आचार्य डॉ. लोकेश मुनि हिंदुस्तान और तमाम आलम में अमान और तकरीब के लिए कई बरसों से कोशिष करते आए है, इस की कदर करते हुए सैयदना फखरुद्दीन ने आचार्य डॉ. लोकेश मुनि जी को इस समारोह में ‘सैयदना कुत्बुद्दीन हार्मनी प्राइज़’ पेश किया। आचार्य लोकेश जी ने अलग अलग धर्म और मज़हब के लोगो को इंसानियत के उसूल पर एक साथ जमा किया।

सैयदना फखरुद्दीन साहेब ने आप के वालिद साहेब, दाउदी बोहरा कौम के ५३ व़े दाईल मुतलक की याद में ‘सैयदना कुत्बुद्दीन हार्मनी परैज़’ काइम किया ताके हर साल किसी एक हस्ती या एक संस्था को यह दिया जाए जो तकरीब और मुख्तलिफ मज़हबो के दरमियान मिलनसाही के लिए कोशिष करते आए है। पहला ‘सैयदना कुत्बुद्दीन हार्मनी प्राइज़’ सैयदना फखरुद्दीन ने माननिय दलाई लामा को २०१७ की साल में नई दिल्ही में सैयदना की मेज़बानी से आयोजित तकरीब फंक्शन में पेश किया था।

इस फंक्शन में कई मज़हब और धर्मो के पेशवा और साथ में हुकूमत के भी कई अग्रणी हस्तियों एक साथ जमा हो कर तकरीब और मिलनसाही की चर्चा की।