सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ., दूसरा उर्स मुबारक : २३ वी जुमादिल उखरा १४३९ हि. नसीमो बर्कातिल उर्स अल मुबारक

सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. के दुसरे उर्स मुबारक को मुमिनीन ने अपने बावा मुश्फिक के फ़ज़ाइल और शानात को याद करते हुए और आप के एहसानात का शुकुर करते हुए मनाया।

दारुस सकीना में सैयदना कुत्बुद्दीन के मज़ार ए अक्दस में तीन रात और उर्स मुबारक के दिन खतमुल कुरआन की मजलीस अक्द हुइ। २१ वी और २२ वी रात जुमादिल उखरा मुमिनीन इवाने फातेमी में मजलीस में शामिल हुए और कुत्बुद्दीन मौला की याद में कुरआन मजीद और मरसिया की तिलावत हुइ और इमाम हुसैन स.अ. का मातम हुआ। मजलीस के बाद मुमिनीन ने सलवात की नियाज़ में अलवान तनावुल किए। मुमिनीन ने उर्स के अय्याम में दिन और रात ज़ियारत का शरफ हांसिल किया।

२२ वी जुमादिल उखरा (जुमोआ के दिन) कुत्बुद्दीन मौला के वारिस मुबीन सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. ने इवाने फातेमी में इमामत से ज़ोहर - असर की नमाज़ अदा की। नमाज़ बाद सैयदना ज़ियारत के लिये पधारे। सैयदना ने पहले का संदल निकाल कर कबर मुबारक पर गसील का अमल फ़रमाया।

२३ वी जुमादिल उखरा, उर्स मुबारक की रात, इवाने फातेमी में सैयदना फखरुद्दीन ने मगरिब – इशा की नमाज़ पढ़ाई, सैयदना कुत्बुद्दीन रि.अ. के तवस्सुल की २ रकअत नमाज़ भी अदा की। नमाज़ बाद आका मौला त.उ.श. सैयदना कुत्बुद्दीन के मज़ार ए अक्दस के सेहेन में उर्स मुबारक की मजलीस में जलवा अफरोज़ हुए। इस मुबारक जगह में, और इस मजलीस में जन्नत की खुशबु महक रही थी।

सैयदना कुत्बुद्दीन का रौज़ा मुबारक ज़मीन में रोशन सितारे की तरह चमक रहा था। इन्शाअल्लाहो तआला, जैसे सैयदना ने सुबह उर्स मुबारक की वाअज़ में दोआ फ़रमाइ, कुत्बुद्दीन मौला का रौज़ा मुबारक जल्द ही तामीर होगा। मौलाना ने फ़रमाया की मुमिनीन

मोहब्बत से रौज़त मुबारका के तामीर की खिदमत में शामिल हो रहे है, और अल्लाह तआला और अल्लाह के वली सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन की ख़ुशी हांसिल करने जो मुमिनीन इसमें शामिल होना चाहते है व़े अब भी शामिल हो सकते है। मुमिनीन मुमेनात और उनके प्यारे फरजंदो को सैयदना कुत्बुद्दीन की ज़ियारत की बरकत इन्शाअल्लाह मिलती रहेगी।

उर्स की मजलीस में आका मौला और तमाम मुमिनीन ने खतमुल कुरआन की तिलावत की, और सैयदनल मिनआम ने अजब शान से सदकल्लाह की दोआ पढ़ी, सदकल्लाह के बाद सैयदना कुत्बुद्दीन की याद में मरसिया ख्वानी हुइ। शेह्ज़ादा डॉ. अज़ीज़ भाईसाहेब ने सैयदना कुत्बुद्दीन के एहसानात और शानात याद करते हुए पुर असर तक़रीर की। तक़रीर में सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. की और सैयदना कुत्बुद्दीन शहीद रि.अ. की शानात को जोड़ कर सात फसल बयान की।

उर्स की रात मजलीस के बाद आका मौला त.उ.श. कुत्बुद्दीन मौला की ज़ियारत के लिये रौज़त मुबारका में पधारे। आप की चारो जानिब मुमिनीन और मुमेनात हाज़िर थे। सैयदना ने कबर मुबारक पर संदल चढ़ाया और गिलाफ और फूल की चादर चढ़ाई गयी। अगले दिन, वाअज़ में सैयदना ने करम फरमा कर कहा कि आप हंमेशा सभी मुमिनीन की तरफ से ज़ियारत करते है, मुमिनीन जहां कही भी रहते हो।

२३ वी तारीख सुबह उर्स मुबारक के दिन, मौलानल मन्नान ने इमामत से फजेर की नमाज़ इवाने फातेमी में अदा की। सुबह १०:३० बजे आका मौला त.उ.श. कुत्बुद्दीन मौला की ज़ियारत के लिये तशरीफ़ लाए। बाद में इवान में मजलीस और वाअज़ के लिये जलवा अफरोज हुए। उर्स मुबारक की खतमुल कुरआन की मजलीस सैयदना इस्माइल बदरुद्दीन बावा रि.अ. और सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. दोनो दाई की नियत पर अक्द हुइ। आप दोनों मौला का उर्स २३ वी जुमादिल उखरा के रोज़ है। मजलीस में मरसिया ख्वानी हुइ।

उर्स के दिन सैयदनल मिनआम ने तख्ते इमामी पर जलवा अफरोज हो कर अजब शान से वाअज़ मुबारक फरमाई। इमाम उज़ ज़मान से फैज़ और ताईद का सरयान आका मौला की वाअज़ में इयानन नज़र आ रहा था। मौलाना त.उ.श. ने अपने मवाली ताहेरीन के बयानों से बरकत ले कर “जन्नत” के सात वुजुहात का बयान फरमाया। आप ने सैयदना अल मोअय्यद अल शिराज़ी रि.अ. के बयान में से ज़िक्र फरमाई कि नबी, वसी इमाम और दाई हक्कन जन्नत की तरफ हिदायत देते है। इन साहेबो में जन्नत का नूर है, गोया इनकी ज़ात ही जन्नत है।  मौलाना ने सैयदना कुत्बुद्दीन की पुर असर ज़िक्र फ़रमाइ। आप ने फ़रमाया कि सैयदना कुत्बुद्दीन के जीवन का एक दिन पूरी ज़िन्दगी के बराबर था, और आप की ज़िन्दगी एक ज़माने के बराबर थी। रसूलुल्लाह स.अ. ने फ़रमाया है कि जन्नत मुमिनीन की तरफ शौख करती है क्योंकि एक एक मुमिनीन जन्नत में पहुंचता है तो जन्नत की रौशनी ज़्यादा होती है। सैयदना कुत्बुद्दीन के नूर से जन्नत की रौशनी अदआफन मुदाअफन ज़्यादा हुइ। मौलाना ने सभी मुमिनीन मुमेनात और उनके प्यारे फ़रज़न्दो के लिये बहुत दोआ फरमाई।

 

सैयदना कुत्बुद्दीन शहीद रि.अ. का उर्स मुबारक

सैयदना कुत्बुद्दीन शहीद रि.अ. के उर्स मुबारक की रात आप के वारिस सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. उर्स मुबारक की मजलीस में इवाने फातेमी में जलवा अफरोज हुए। खतमुल कुरआन के बाद सदकल्लाह की दोआ की तिलावत फरमाई। कसीदा मुबारका और सैयदना कुत्बुद्दीन के हादेसा की तिलावत हुइ। आका हुसेन स.अ. का मातम हुआ।

अल्लाह तआला जन्नतुल फिरदौस में सैयदना कुत्बुद्दीन शहीद रि.अ., सैयदना इस्माइल बदरुद्दीन रि.अ.  और सैयदना खुज़ैमा कुत्बुद्दीन रि.अ. की तरफ हमारा सलाम पहुंचाए और सैयदना कुत्बुद्दीन के वारिस सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. की उमरे शरीफ को तारोज़े क़यामत दराज़ फरमाए। आप, मुमिनीन को जन्नत की तरफ हिदायत देने हंमेशा बाकी रहे। अल्लाह तआला आप को नसरे अज़ीज़ और फतहे मुबीन अता करे। आमीन, या रब्बल आलमीन।