शेहरे रमज़ानुल मोअज़्ज़म साल के १२ महीनों में से एक महीना है. इस महीने की तफ्ज़ील क्यों है? इस महीने को खुदा का महीना क्यों कहते है? क्या दूसरे महीने खुदा के नहीं? शेहरे रमज़ान के मम्सूल कौन है? शेहरे रमज़ान में रोज़े क्यों करते है? रोज़ा करने की माअना क्या है? शेहरे रमज़ान में कुराने मजीद नाज़िल हुए उसकी माअना क्या है? ज़ाहिर में तो दूसरे महीनों में भी कुरान की आयतें उतरी है?

मजालिसुल हिक्मत की आठवीं मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते है. मौलानल मन्नान मुमिनीन को इरशाद करते हैं कि शेहरे रमज़ान की फ़ज़ीलत जानकर इस मुबारक महीने में इबादत करें. खुदा की इबादत, इबादतुल अहरार किस तरह करें यह सिखाते है और ख़ास तौर से मौजूदा हालात में, जिसमें चारों तरफ बीमारी फैली हुई है, उसमें खुदा की बंदगी किस तरह करें, इसके बारे में इरशाद फरमाते है. मजलिस के आखिर में सैयदना त.उ.श. मुमिनीन के लिए बहुत दोआएँ फरमाते है.