कुराने मजीद में खुदा तआला फरमाते हैं कि ऐ मुमिनीन जब तुम रसूल के साथ कुछ बात करने जाओ, कुछ सवाल अर्ज़ करने जाओ तो रसूल को कुछ हेबत अर्ज़ करो. यह पाकीज़गी का सबब है.

नजवा की माअना क्या है? साहेबुल हक़ को मुमिनीन सलाम अर्ज़ करते है, कुछ रकम अर्ज़ करते है, उसमें क्या फ़ज़ल और सवाब है?

क्या साहेबुल हक़ को नज्वा की ज़रूरत है? अगर ऐसा नहीं है तो क्यों कबूल करते है?

मजालिसुल हिक्मत की ३७ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.