हर इंसान का तजुर्बा है कि दुनिया बला और मुसीबत का घर है, और आखिर मौत आती है. यह हकीकत है. कोई भी इंसान - चाहे अमीर हो या गरीब - उसे दुनिया में तकलीफ पहुँचती है.

खुदा तआला कुराने मजीद में फरमाते हैं कि खुदा सब्र करने वालो को बेगैर हिसाब अजर अता करते हैं. यह भी फरमाते हैं कि खुदा सब्र करने वालो को मोहब्बत करते हैं, उन्हें पसंद करते हैं.

सवाल यह उठता है कि इन मुश्किल हालात में इंसान को सब्र क्यों करना चाहिए? और सब्र करने में सवाब का बयान क्यों है? सब्र किस तरह करें और क्या नीयत रखें? सब्र करने से मुमिन को दुनिया की ज़िन्दगी में क्या फायदे हासिल होते हैं?

मजालिसुल हिक्मत की २५ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.