हम यह मानते हैं कि कुराने मजीद खुदा के किताब हैं और कुरान हक़ हैं जो मोहम्मद रसुलुल्लाह पर उतारे गए. हम यह क्यों मानते हैं?

कुराने मजीद १४०० साल पहले नाज़िल हुए और रसुलुल्लाह, जिनके ऊपर कुरान नाज़िल हुए, आप वफ़ात हो चुके है. हमने आपको कुरान पढ़ते नहीं सुना. किसी और के कहने पर हम यह क्यों मानते हैं कि कुरान खुदा के किताब हैं? अगर रसुलुल्लाह के ज़मान में भी होते तो यह क्यों मानते कि यह खुदा के किताब हैं?

अगर कोई यह माने कि कुरान खुदा के किताब हैं तो कुरान की माअना समझकर तिलावत करने में फायदा हैं, और कुरान की कई तफ़्सीरें की गई है. सब अलग अलग माअना करते है. तो कौन सी माअना सही है?

हम यह भी मानते हैं कि कुराने मजीद रसुलुल्लाह का मोजिज़ा हैं. क्यों? जिसे अरबी ज़बान न आती हो उसके लिए कुरान की फसाहत और बलाग़त का मोजिज़ा क्या माअना रखता हैं?

कुराने मजीद में रसुलुल्लाह की ज़बान पर यह आयत है कि ऐ परवरदिगार मेरी कौम ने कुराने मजीद को एक तरफ रख दिया है. ज़ाहिर में तो यह नहीं है, तो इस आयत की माअना क्या हैं?

मजालिसुल हिक्मत की ५७ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.