रसुलुल्लाह, नबी, इमाम या दाई की क्या ज़रूरत हैं? कई फ़लासिफ़ा यह कहते है कि अंबिया की ज़रूरत नहीं. इंसान के पास अक़्ल है, तो अक़्ल से इंसान खुद तमाम चीज़ों को समझ सकता है. यदि ऐसा है तो हिदायत और नजात के लिए एक हादी की क्या ज़रूरत है?

मजालिसुल हिक्मत की नौवीं मजलिस में सैयदना फखरुद्दीन त.उ.श. इस अहम सवाल का जवाब फरमाते हैं.

सैयदना यह सवाल भी कायम फरमाते हैं कि यदि हम यह माने कि हादी की ज़रूरत है तो यह हादी कौन है? दावा करने वाले बहुत है. सच्ची बात की हक़ की बात कौन करते है? किसकी तबाअत करनी चाहिए? इस सवाल का जवाब सैयदना अगली मजलिस में फरमाएँगे.