फलसफत की माअना क्या है? हक़ की फलसफत किस तरह पहचाने? उसके मुताबिक़ ज़िन्दगी में किस तरह अमल करे? उसकी गरज़ क्या है?

फलसफत यानी एक सोचने का तरीका, एक नज़रिया.

इमाम अहमद अल-मस्तूर अ.स. इख़्वानुस सफा की रिसालत में फरमाते है कि फलसफत की माअना यह है कि इंसान अपनी हद में खुदा से तशब्बोह करे.

खुदा का इदराक इंसान की कुव्वत के बाहर है. अगर इंसान खुदा का इदराक नहीं कर सकता तो खुदा से तशब्बोह करने की माअना क्या है?