ज़ाहिर में वफ़ा करने की माअना है कि जो वादा किया हो उसे पूरा करें, अमानत में ख़यानत न करें चाहे जितनी भी मुश्किलें सहनी पड़े, सच बोलें. यह खसलतें अच्छी ख़सलतों में गिनी जाती है लेकिन हकीकत में वफ़ा करने की माअना क्या है?

कुराने मजीद में खुदा तआला फरमाते हैं कि खुदा जो वादा करते हैं उसके खिलाफ नहीं करते. खुदा के वादे की हकीकत क्या है? खुदा ने कौन सा वादा किया है जो खुदा निभा रहे है और निभाएंगे?

उसी तरह खुदा कुराने मजीद में फरमाते हैं कि खुदा ने अपने अंबिया का एहेद और मीसाक लिया है, उसकी माअना क्या है? और खुदा के अवलिया यह वादा किस तरह निभाते हैं?

खुदा ने कुराने मजीद में जो लोग खुदा को दिया हुआ एहेद वफ़ा करते हैं उनकी सना फ़रमाई हैं. तो मुमिन अपना वादा निभाए, मीसाक की शर्तो को वफ़ा करे उसके बारे में क्या बयान है, हुदात किराम ने क्या इरशादात फरमाए हैं और फोज़ला किराम की अखबार में वफादारी के बारे में हमारे लिए क्या सबक हैं?

मजालिसुल हिक्मत की ५८ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.