इस मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. सुलैमानी फिरका हक़ से किस तरह अलग हुआ उसकी ज़िक्र में ज़्यादा बयान फरमाते हैं. पिछली मजलिस में ज़िक्र फ़रमाई कि सुलैमानी फिरके के लोग २७ वे दाई सैयदना दाऊद बिन कुतुबशाह रि.अ. के ज़मान में अलग हुए. सुलैमान बिन हसन जो २४ वे दाई का पोता है, उसे दाई मानने लगे.

इस मजलिस में सैयदना दाऊद की अकबर बादशाह के दरबार में सुलैमान पर ज़फ़रयाबी हुई उसकी ज़िक्र फरमाते हैं.

सुलैमान ने लाहौर में अकबर बादशाह के दरबार में क्या चाल चली जिससे अकबर बादशाह का एक वज़ीर उसके साथ हो गया? सैयदना दाऊद को अहमदाबाद में क्यों मख़फ़ी होना पड़ा? हुदूद फोज़ला पर क्या ज़ुल्म और सितम हुए?

फिर क्या उमूर बने जिसके कारण सैयदना दाऊद अकबर बादशाह के दरबार में तशरीफ़ ले गए? वहाँ मुमिनीन और सुलैमानियों के दरमियान किस तरह कज़िया चला? और सैयदना दाऊद की अकबर बादशाह के दरबार में क्या शानात ज़ाहिर हुई?

मजालिसुल हिक्मत की ६४ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं


पहले मजालिसुल हिक्मत में सैयदना त.उ.श. ने दावत की तारीख में फिरके किस तरह हुए उसकी ज़िक्र फ़रमाई. शुरू में बयान हुआ कि शीआ और सुन्नी फिरके किस तरह हुए (मजलिस क्र. ४७-४९), उसके बाद  ज़ैदी फिरका मोहम्मदुल बाकिर इमाम स.अ. के ज़मान में कैसे हुआ (मजलिस क्र. ५०), और इसना अशरी फिरका जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. के ज़मान में कैसे अलग हुआ (मजलिस क्र. ५१-५२), और मुस्तन्सिर इमाम के बाद निज़ारी फिरका किस तरह अलग हुआ (मजलिस ५६), और मजीदीया फिरका २० वे इमाम आमिर बेअहकामिल्लाह स.अ. के बाद किस तरह हक़ से अलग हुआ. और इस मजलिस में २७ वे दाई सैयदना दाऊद बिन कुतुबशाह रि.अ. के ज़मान में सुलैमानी फिरका हक़ के रास्ते से किस तरह अलग हुआ उसकी ज़ियादा ज़िक्र फरमाते हैं (मजलिस क्र. ६२-६३)