सुलैमानी फिरके के लोग २४ वे दाई के पोते सुलैमान बिन हसन को दाई मानने लगे. जब २६ वे दाई सैयदना दाऊद बिन अजबशाह वफ़ात पाए तो सुलैमान ने २७ वे दाई सैयदना दाऊद बिन कुतुबशाह को आपके वाली के हाथ पर यमन में मीसाक दिया. और तीन साल बाद झूठा दावा किया. २६ वे दाई के कातिब ने झूठा कागज़ बनाया और सुलैमान को भेजा. २६ वे दाई के घर के लोग सुलैमान के साथ हो गए और अहमदाबाद के हाकिम ने उनका साथ दिया. ताकि फ़ित्नत इतनी ज़ियादा हो गई कि २७ वे दाई को पर्दा करना पड़ा. 

दावत में क्या उमूर बने जिनके सबब दाई के घर के लोगों ने मुद्दई सुलैमान को साथ दिया बल्कि उसे आगे किया? २६ वे दाई के कातिब को किसने बढ़ावा दिया? अहमदाबाद का हाकिम २७ वे दाई के खिलाफ क्यों हुआ? इस ज़माने में हुदूद फोज़ला ने किस शान से खिदमत अंजाम दी?

हमारी पहचान दाऊदी बोहरा कौम क्यों है? सैयदना दाऊद बिन कुतुबशाह सच्चे दाई हैं उसकी सबसे बड़ी दलील क्या है?

आज फ़ित्नत करने वालो का अमल सुलैमान की फ़ित्नत से किस तरह मिलता है?

मजालिसुल हिक्मत की ६२ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.

पहले मजालिसुल हिक्मत में बयान हुआ कि शीआ और सुन्नी फिरके किस तरह हुए (मजलिस क्र. ४७-४९), ज़ैदी फिरका मोहम्मदुल बाकिर इमाम स.अ. के ज़मान में कैसे हुआ (मजलिस क्र. ५०), इसना अशरी फिरका जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. के ज़मान में कैसे अलग हुआ (मजलिस क्र. ५१-५२),मुस्तन्सिर इमाम के बाद निज़ारी फिरका किस तरह अलग हुआ (मजलिस ५६), और मजीदीया फिरका २० वे इमाम आमिर बेअहकामिल्लाह स.अ. के बाद किस तरह हक़ से अलग हुआ . इस मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. २७ वे दाई सैयदना दाऊद बिन कुतुबशाह रि.अ. के ज़मान में सुलैमानी फिरका किस तरह अलग हुआ, यह ज़िक्र फरमाते हैं.