पहले मजालिसुल हिक्मत में बयान हुआ कि शीआ और सुन्नी फिरके किस तरह हुए (मजलिस क्र. ४७-४९), ज़ैदी फिरका मोहम्मदुल बाकिर इमाम स.अ. के ज़मान में कैसे हुआ (मजलिस क्र. ५०), इसना अशरी फिरका जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. के ज़मान में कैसे अलग हुआ (मजलिस क्र. ५१-५२) और मुस्तन्सिर इमाम के बाद निज़ारी फिरका किस तरह अलग हुआ (मजलिस ५६). इस मजलिस में २० वे इमाम आमिर बेअहकामिल्लाह स.अ. के बाद मजीदी फिरका किस तरह हक़ से अलग हुआ, यह ज़िक्र सैयदना त.उ.श. फरमाते हैं.

जब अब्दुल मजीद, जो आमिर इमाम का चचेरा भाई है, उसने आमिर इमाम के क़त्ल के बाद इमामत का दावा किया तो मजीदी फिरके के लोग उसे इमाम मानने लगे. अब्दुल मजीद ने यह दावा किया कि जिस तरह रसुलुल्लाह ने अपने चचेरे भाई अली को वसी कायम किया उसी तरह आमिर इमाम ने अब्दुल मजीद को अपना वारिस बनाया. तो हुदात किराम की इस बातिल के अक़ीदे पर क्या हुज्जत हैं? और २१ वे इमाम तैयेब अबुल कासिम अमीरुल मुमिनीन इमामे हक़ है, यह किस तरह साबित करते हैं.

निज़ारियों ने आमिर इमाम को क़त्ल किया उसके बाद मिसर में क्या हालात बने? अब्दुल मजीद ने किस तरह इमामत का दावा किया? अब्दुल मजीद को आमिर इमाम ने ‘वलीओ एहदिल मुस्लेमीन’ का खिताब क्यों दिया? इमाम के जो दोआत मिसर में थे उनपर क्या क्या ज़ुल्म हुए? और यमन में मौलातोना हुर्रतुल मलेका ने किस तरह अब्दुल मजीद पर हुज्जत कायम की और किस तरह तैयेब इमाम की नस्स साबित की? दोआत ने अब्दुल मजीद की बात में फ़सनेवालो को किस तरह हिदायत दी?

मजालिसुल हिक्मत की ६० वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.