पहले मजालिसुल हिक्मत में यह बयान हुआ कि शीआ और सुन्नी, यह फिरके किस तरह हुए (मजलिस क्र. ४७-४९), ज़ैदी फिरका मोहम्मदुल बाकिर इमाम स.अ. के ज़मान में किस तरह हुआ (मजलिस क्र. ५०) फिर इसना अशरी फिरका जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. के ज़मान में किस तरह अलग हुआ (मजलिस क्र. ५१-५२) और इस मजलिस में १८ वे इमाम मुस्तनसिर बिल्लाह स.अ. के बाद निज़ारी फिरका किस तरह हक़ से अलग हुआ, यह ज़िक्र सैयदना त.उ.श. फरमाते हैं.

बाज़ तारीख के लोग यह कहते हैं कि निज़ार मुस्तनसिर बिल्लाह का बड़ा बेटा था इसलिए वह सही था. कुछ लोग यह कहते हैं कि उसे “वलीओ एहदिल मुस्लेमीन” का ख़िताब दिया, यह उसकी इमामत की दलील है. कुछ लोग यह कहते हैं कि मुस्तनसिर इमाम ने हसन अल-सब्बाह को, जो निज़ार के साथ जुड़ गया, उसे ख़लवत में फ़रमाया कि निज़ार आपका वारिस है. मवाली ताहेरीन का इन हुज्जतों के सामने क्या जवाब हैं?

हुदात किराम यह किस तरह साबित करते हैं कि १९ वे इमाम अल मुस्ताअली बिल्लाह सच्चे इमाम हैं? मुस्ताअली इमाम की विलादत के समय आपके वालिद ने इशारा करके क्या फ़रमाया? आपकी शादी के समय हिक्मत से क्या अमल फ़रमाया?

मजालिसुल हिक्मत की ५६ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.