पहले मजालिसुल हिक्मत में यह बयान हुआ कि शीआ और सुन्नी, यह फिरके किस तरह हुए, ज़ैदी फिरका मोहम्मदुल बाकिर इमाम स.अ. के ज़मान में किस तरह हुआ. फिर इसना अशरी फिरका जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. के ज़मान में किस तरह अलग हुआ, यह ज़िक्र हुई. इस मजलिस में इस इख्तिलाफ के बारे में सैयदना त.उ.श. ज़्यादा बयान फरमाते हैं.

इसना अशरी फिरके के लोगों का मानना है कि जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. ने पहले इस्माईल इमाम स.अ. पर नस्स फ़रमाई और आपकी ग़ैबत ज़ाहिर करने के बाद उसे बदलकर इस्माईल इमाम स.अ. के भाई मूसा काज़िम पर नस्स की. हुदात किराम ने इस मान्यता के खिलाफ क्या हुज्जत की हैं? इस्माईल इमाम स.अ. और आपके फ़रज़न्द इमाम मोहम्मद बिन इस्माईल स.अ. की नस्स किस तरह साबित की हैं?

सैयदना अल काज़ी अल नोअमान रि.अ. ने मोइज़ इमाम स.अ. की हज़रत में सवाल अर्ज़ किया की जाफरुस सादिक़ इमाम स.अ. ने यह वाज़ेह क्यों नहीं किया कि आपके वारिस कौन है? अगर आप यह वाज़ेह कर देते तो इख्तिलाफ न होता. तो मोइज़ इमाम स.अ. ने जवाब में क्या फ़रमाया?

मजालिसुल हिक्मत की ५२ वी मजलिस में सैयदना ताहेर फखरुद्दीन त.उ.श. इन सवालों के जवाब फरमाते हैं.