जिहाद इस्लाम के सात देआमत में से एक देआमत है. हर मुमिन पर वाजिब है, फ़र्ज़ है. लेकिन जिहाद की माअना क्या है? सैयदना ताहेर फखरुद्दीन इन सवालों का जवाब ३ हिस्सों में फरमाते है. जवाब का पहला हिस्सा आपने १४ वी मजलिस में फ़रमाया जिसमें आपने जिहादे अकबर की ज़िक्र फ़रमाई. १५ वी मजलिस में दावत के दुश्मनों के साथ जिहाद क्यों और किस तरह करनी चाहिए उसकी ज़िक्र फ़रमाई.

सैयदना ताहेर फखरुद्दीन मजालिसुल हिक्मत की १६ वी मजलिस में जिहाद की माअना का तीसरा हिस्सा बयान फरमाते है. इस मजलिस में आप तीन पहलू बयान फरमाते है:

१. शरीअत के मुताबिक़ महिलाएँ हाथ और तलवार से जिहाद नहीं कर सकती. तो महिलाएँ जिहाद का सवाब किस तरह हासिल कर सकती हैं?
२. जो हलाल की रोज़ी तलब करें उसे जिहाद का अज़ीम सवाब क्यों हासिल होता है?
३. बुज़ुर्गों को हज में जिहाद का सवाब क्यों?